भारत एवं बांग्लादेश के मध्य विवाद के प्रमुख मुद्दों का परीक्षण कीजिए एवं द्विपक्षीय सम्बन्धों में सुधार हेतु सुझाव दीजिए।
Ans: परिचय (Introduction):
भारत और बांग्लादेश ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक दृष्टि से एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। 1971 में स्वतंत्रता के बाद से दोनों देशों के सम्बन्ध सामान्यतः सहयोगात्मक रहे हैं, परंतु कुछ मुद्दों पर मतभेद भी बने हुए हैं। इन विवादों का समाधान दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- जल बँटवारा विवाद (Water Sharing Dispute): सबसे प्रमुख मुद्दा गंगा और तीस्ता नदी के जल वितरण को लेकर है।
- सीमा विवाद: 2015 के भूमि सीमा समझौते (Land Boundary Agreement) से अधिकांश मुद्दे सुलझे, परंतु कुछ सीमाई अतिक्रमण अब भी होते हैं।
- अवैध आव्रजन (Illegal Migration): असम व पूर्वोत्तर भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ एक संवेदनशील विषय है।
- सीमापार तस्करी (Cross-border Smuggling): मवेशी, नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है।
- रोहिंग्या शरणार्थी संकट: इस मुद्दे पर दोनों देशों की स्थिति और सहयोग की सीमा भिन्न है।
- सीमा सुरक्षा बलों के बीच तनाव: कभी-कभी गोलीबारी और विवाद की घटनाएँ संबंधों को प्रभावित करती हैं।
- व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance): भारत को व्यापार में अधिक लाभ होने से बांग्लादेश में असंतोष रहता है।
- परिवहन व संपर्क (Connectivity): हाल के वर्षों में सड़क, रेल और जलमार्गों से संपर्क बेहतर हुआ है।
- ऊर्जा सहयोग: बिजली व ईंधन के क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश सहयोग बढ़ा है।
- संस्कृतिक संबंध: साझा भाषा, परंपरा और धर्म दोनों देशों को जोड़ते हैं।
- कूटनीतिक प्रयास: द्विपक्षीय वार्ताओं और उच्चस्तरीय यात्राओं से संबंधों में सकारात्मक सुधार हुआ है।
- भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति बांग्लादेश को क्षेत्रीय सहयोग का प्रमुख भागीदार बनाती है।
- सुझाव (Suggestions):
- तीस्ता जल समझौते पर शीघ्र समाधान किया जाए।
- सीमा प्रबंधन में संयुक्त निगरानी और तकनीकी सहयोग बढ़ाया जाए।
- व्यापार संतुलन के लिए बांग्लादेश को अधिक बाज़ार पहुँच दी जाए।
- सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाए।
निष्कर्ष (Conclusion):
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं, पर विवादों का समाधान आवश्यक है। आपसी विश्वास, संवाद और समान हितों पर आधारित नीति से दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और प्रगति के अग्रदूत बन सकते
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