समावेशी विकास की अवधारणा समझाइये। भारत में समावेशी विकास के क्या मुद्दे एवं चुनौतियाँ हैं? स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

समावेशी विकास (Inclusive Growth) का अर्थ है ऐसा विकास जिसमें समाज के सभी वर्गों – गरीब, महिला, किसान, श्रमिक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक –  को समान अवसर मिले। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करना है। यह विकास को “सबका साथ, सबका विकास” की भावना से जोड़ता है।

समावेशी विकास के प्रमुख मुद्दे (Main Issues of Inclusive Growth):

  • आय और संपत्ति का असमान वितरण।
  • ग्रामीण-शहरी विकास में असंतुलन।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच।
  • रोजगार सृजन की कमी और असंगठित क्षेत्र की समस्याएँ।
  • सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी में कमी।
  • लैंगिक असमानता और महिलाओं की आर्थिक स्थिति।
  • कृषि क्षेत्र की धीमी प्रगति।
  • आधारभूत ढाँचे (Infrastructure) की कमी।
  • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का अभाव।
  • पर्यावरणीय असंतुलन से प्रभावित गरीब वर्ग।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ, विशेषकर पूर्वोत्तर और पिछड़े राज्यों में।
  • डिजिटल विभाजन (Digital Divide) की बढ़ती खाई।
  • भारत में चुनौतियाँ (Challenges in India):
  • नीति क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता की कमी।
  • भ्रष्टाचार और संसाधनों के अनुचित उपयोग।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश की आवश्यकता।

निष्कर्ष (Conclusion): समावेशी विकास तभी संभव है जब आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ। इसके लिए जन-केन्द्रित नीतियाँ, सुशासन और समान भागीदारी आवश्यक हैं।

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