भारत में संघीय ढाँचा विभिन्न राज्यों की विविध आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को कैसे समायोजित करता है ? क्या इसके सम्मुख कुछ चुनौतियाँ भी है, यदि है, तो उसका समाधान कैसे किया जाता है ?
Ans: परिचय:
भारत का संघीय ढाँचा (Federal Structure) एक संविधानिक समझौता है जो एकता में विविधता को बनाए रखता है। यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करके शासन को संतुलित बनाता है। परंतु, विविध सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
मुख्य बिंदु:
- भारतीय संविधान ने शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों – संघ, राज्य और समवर्ती – में किया है।
- यह विभाजन राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीति बनाने की स्वतंत्रता देता है।
- वित्त आयोग राज्यों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है ताकि विकास का असमानता कम की जा सके।
- भाषा, संस्कृति और धर्म की विविधता को संविधान द्वारा मान्यता दी गई है।
- राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा, शिक्षा नीति और स्थानीय प्रशासन में लचीलापन दिया गया है।
- अंतरराज्यीय परिषद् और नीति आयोग जैसे संस्थान सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देते हैं।
- आपातकालीन स्थितियों में केंद्र को अधिक अधिकार मिलते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।
- राजनीतिक दलों का राज्य और केंद्र स्तर पर समन्वय नीति-निर्माण में मदद करता है।
- फिर भी, वित्तीय असमानता और संसाधन वितरण पर विवाद संघीय संतुलन को चुनौती देते हैं।
- राज्यों द्वारा क्षेत्रीय अस्मिता या अलगाववाद की भावना कभी-कभी तनाव उत्पन्न करती है।
- केंद्र का अत्यधिक हस्तक्षेप राज्यों की स्वायत्तता को सीमित करता है।
- इन चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और सहकारी संघवाद की भावना आवश्यक है
निष्कर्ष:
भारतीय संघवाद लचीला और व्यावहारिक है, जो विविध राज्यों की आकांक्षाओं को संतुलित करता है। परंतु इसकी सफलता निरंतर संवाद, सहयोग और समान विकास के प्रयासों पर निर्भर करती है।
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