लचीलेपन और कठोरता के संदर्भ में भारतीय संविधान की तुलना अन्य आधुनिक संविधानों से कैसे की जा सकती है ?

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और संतुलित संविधान है, जिसमें न तो पूर्ण कठोरता है और न ही पूर्ण लचीलापन। यह विशेष रूप से इस प्रकार निर्मित किया गया है कि समय और परिस्थितियों के अनुसार संशोधन संभव हो सकें। लचीलापन और कठोरता के इस मिश्रण के कारण यह संविधान स्थायित्व और परिवर्तनशीलता दोनों को संतुलित करता है।

मुख्य बिंदु (12 Important Points):

  • ब्रिटेन का संविधान पूर्णतः लचीला है, क्योंकि वहाँ संसद सर्वोच्च है और संशोधन सामान्य कानूनों की तरह होते हैं।
  • अमेरिका का संविधान अत्यंत कठोर है; संशोधन के लिए दोनों सदनों और राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है।
  • भारत का संविधान इन दोनों के बीच का संतुलित रूप है।
  • अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया तीन प्रकार की है – सरल, विशेष, और राज्यों की सहमति से।
  • केवल संसद द्वारा संशोधन योग्य प्रावधान इसे लचीला बनाते हैं।
  • संघीय ढाँचे या न्यायपालिका से जुड़े प्रावधानों के लिए राज्यों की सहमति आवश्यक है, जो इसे कठोर बनाते हैं।
  • संविधान में अब तक 100 से अधिक संशोधन हुए हैं, जो इसके लचीलेपन का प्रमाण हैं।
  • फिर भी, मूल ढाँचे (Basic Structure) को परिवर्तित नहीं किया जा सकता, जो कठोरता दर्शाता है।
  • केशवानंद भारती मामला (1973) ने संविधान की मूल संरचना को सुरक्षित रखा।
  • इस संतुलन से संविधान समय के साथ विकसित होता रहा है।
  • अन्य आधुनिक संविधानों की तुलना में यह अधिक व्यावहारिक और अनुकूलनीय है।
  • इसकी यह प्रकृति भारतीय लोकतंत्र को स्थिरता और प्रगतिशीलता दोनों प्रदान करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारतीय संविधान का लचीलापन इसे समयानुकूल बनाता है, जबकि कठोरता इसके मूल मूल्यों की रक्षा करती है। इसी संतुलन के कारण यह संविधान विश्व के सबसे जीवंत और दीर्घजीवी संविधानों में स्थान रखता है।

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