भारतीय संविधान न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को कैसे सुनिश्चित करता है ? मूल संरचना सिद्धान्त के महत्त्व पर चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय:

भारतीय संविधान में न्यायपालिका को लोकतंत्र का संरक्षक माना गया है। इसकी स्वतंत्रता नागरिक अधिकारों की रक्षा और सत्ता के दुरुपयोग पर नियंत्रण के लिए अनिवार्य है। मूल संरचना सिद्धांत ने इस स्वतंत्रता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की है।

मुख्य बिंदु:

  • न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं कार्यकाल संविधान के अनुच्छेद 124–147 (सुप्रीम कोर्ट) और 214–231 (हाई कोर्ट) में निर्धारित हैं।
  • न्यायाधीशों को विधायिका या कार्यपालिका के दबाव से मुक्त रखा गया है।
  • वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें संसद के नियंत्रण से बाहर रखी गई हैं।
  • न्यायाधीशों को केवल महाभियोग प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता है।
  • न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) का अधिकार प्राप्त है।
  • केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने “मूल संरचना सिद्धांत” प्रतिपादित किया।
  • इस सिद्धांत के अनुसार, संविधान का संशोधन उसकी मूल आत्मा — जैसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता, विधि का शासन, और मौलिक अधिकार — को नष्ट नहीं कर सकता।

निष्कर्ष:

न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है। मूल संरचना सिद्धांत ने इसे स्थायी संरक्षण देकर संविधान की सर्वोच्चता और नागरिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.