नई आर्थिक नीति ने किस प्रकार भारत में रोजगार के ढाँचे को परिवर्तित किया है ? मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

1991 में लागू की गई नई आर्थिक नीति (New Economic Policy – NEP) के तीन मुख्य घटक थे — उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization)। इस नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को खुले बाजार से जोड़ा और रोजगार संरचना में व्यापक परिवर्तन लाए।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • सेवा क्षेत्र का विस्तार – आईटी, बैंकिंग, टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में रोजगार तेजी से बढ़ा।
  • असंगठित क्षेत्र में वृद्धि – लचीले श्रम बाज़ार के कारण अस्थायी व अनुबंधित नौकरियों में वृद्धि हुई।
  • औद्योगिक रोजगार में गिरावट – स्वचालन और प्रतिस्पर्धा से पारंपरिक उद्योगों में नौकरियाँ घटीं।
  • महिला रोजगार में परिवर्तन – सेवा और लघु उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी।
  • कौशल आधारित रोजगार – उच्च शिक्षा व तकनीकी दक्षता की माँग बढ़ी।
  • ग्रामीण-शहरी असमानता – ग्रामीण रोजगार अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा।
  • स्वरोजगार व स्टार्टअप संस्कृति – उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला।

निष्कर्ष (Conclusion): नई आर्थिक नीति ने भारत के रोजगार ढाँचे को पारंपरिक कृषि आधारित से सेवा व कौशल आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित किया। यद्यपि इससे अवसर बढ़े, परंतु असमानता और अस्थायी रोजगार जैसी चुनौतियाँ भी उभरीं।

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