भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान का अधिकार राष्ट्रपति की अधिकार से किस प्रकार भिन्न है ?

Ans: भूमिका :

भारतीय संविधान में दया, क्षमा, उपशमन और दंड परिवर्तन के अधिकार राष्ट्रपति (अनुच्छेद 72) और राज्यपाल (अनुच्छेद 161) दोनों को दिए गए हैं। इनका उद्देश्य न्याय के साथ मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना है। किंतु दोनों के अधिकारों की सीमा और क्षेत्र अलग-अलग हैं।

मुख्य बिंदु:

  • संवैधानिक आधार: राष्ट्रपति का अधिकार अनुच्छेद 72 में, जबकि राज्यपाल का अनुच्छेद 161 में निहित है।
  • प्रभाव क्षेत्र: राष्ट्रपति का अधिकार पूरे भारत पर लागू होता है, जबकि राज्यपाल का अधिकार केवल अपने राज्य तक सीमित है।
  • विधायी क्षेत्र: राष्ट्रपति केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत अपराधों पर दया दे सकते हैं; राज्यपाल केवल राज्य कानूनों के अंतर्गत।
  • मृत्युदंड: राष्ट्रपति मृत्युदंड को क्षमा कर सकते हैं; राज्यपाल केवल उसे स्थगित या परिवर्तित कर सकते हैं।
  • न्यायिक शक्तियाँ: राष्ट्रपति सैन्य न्यायालयों द्वारा दिए गए दंड को भी क्षमा कर सकते हैं; राज्यपाल नहीं।
  • अधिकार का उपयोग: राष्ट्रपति केंद्र सरकार की सलाह पर कार्य करते हैं; राज्यपाल राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर।
  • विस्तार का स्तर: राष्ट्रपति का दया अधिकार अधिक व्यापक और प्रभावशाली है।

निष्कर्ष :

अतः राज्यपाल का क्षमादान अधिकार सीमित है और केवल राज्य के अपराधों तक सीमित रहता है, जबकि राष्ट्रपति का अधिकार राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक और सर्वोच्च होता है।

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