बंगाल में क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकास को रेखांकित कीजिए ।
Ans: भूमिका (Introduction):
बंगाल भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन का सबसे सशक्त केन्द्र रहा। प्रारम्भ में यह आन्दोलन राजनीतिक असंतोष से प्रेरित था, परंतु शीघ्र ही यह सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम में बदल गया। बंगाल के युवाओं ने संगठन, बलिदान और साहस से आज़ादी के संघर्ष को नई दिशा दी।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- 1905 में बंग-भंग (Partition of Bengal) के विरोध ने क्रान्तिकारी गतिविधियों की भूमि तैयार की।
- अनुशीलन समिति (1906) की स्थापना ने संगठित क्रान्तिकारी आन्दोलन की शुरुआत की।
- अरविन्द घोष और बारिन्द्र घोष ने युवाओं को देशभक्ति और सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित किया।
- युगान्तर और संध्या जैसे पत्रों ने जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 1908 का अलीपुर बम काण्डबंगाल के आन्दोलन का निर्णायक मोड़ बना।
- खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी जैसे युवाओं ने बलिदान से राष्ट्र को झकझोर दिया।
- 1912 का हार्डिंग बम काण्ड ने आन्दोलन को अखिल भारतीय स्वरूप दिया।
- प्रथम विश्वयुद्ध के समय जर्मनी के सहयोग से गदर व अनुशीलन समिति ने विद्रोह की योजना बनाई।
- 1915 के बाद आन्दोलन भूमिगत होकर गुप्त संगठनों में जारी रहा।
- रासबिहारी बोस और जतिन मुखर्जी (बाघा जतिन) ने राष्ट्रीय क्रान्ति की रूपरेखा तैयार की।
- 1920 के बाद गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन से कई क्रान्तिकारी राष्ट्रीय धारा में जुड़े।
- बंगाल के इस आन्दोलन ने अगली पीढ़ी के क्रान्तिकारियों (जैसे भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद) को प्रेरित किया।
निष्कर्ष (Conclusion):
बंगाल का क्रान्तिकारी आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा था। इसने पूरे देश में देशभक्ति, साहस और बलिदान की लौ प्रज्वलित कर स्वतंत्रता की नींव को सुदृढ़ किया।
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