“उत्तर प्रदेश में पंचायती राज प्रणाली की सफलता की लंबी कहानियाँ हैं ।” उपयुक्त उदाहरणों से इसकी पुष्टि कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

पंचायती राज प्रणाली (Panchayati Raj System) भारत के ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बनी है। इससे ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और जनसहभागिता को नई दिशा मिली है।

मुख्य बिंदु:

• 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई।

• ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों स्तरों पर जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं।

• राज्य में लगभग 58,000 ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं।

• पंचायतों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क निर्माण जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।

• स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

• कई पंचायतों ने डिजिटल शासन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं — जैसे “ई-गवर्नेंस ग्राम” मॉडल।

• महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण ने स्थानीय नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन लाया।

• शाहजहाँपुर, बहराइच और बाराबंकी जिलों की पंचायतों ने सामुदायिक स्वास्थ्य व जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

• ग्राम निधि और जनसहयोग से पंचायतें आत्मनिर्भर बन रही हैं।

• पंचायत चुनावों ने ग्रामीण नागरिकों में राजनीतिक चेतना को प्रबल किया।

• सामाजिक न्याय और हाशिए के वर्गों की भागीदारी में वृद्धि हुई है।

• पंचायतें स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान करने में सफल रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की पंचायती राज प्रणाली ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है। यह जनसहभागिता, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।

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