“फ्रांस की क्रान्ति प्रबोधनकाल का सुपरिणाम थी ।” – टिप्पणी कीजिए । “

Ans: भूमिका (Introduction):

फ्रांस की क्रांति (1789) यूरोप के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी। यह केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि विचारों की क्रांति भी थी। इस क्रांति की जड़ें प्रबोधनकाल (Age of Enlightenment) के उन विचारों में थीं जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व का संदेश दिया।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • प्रबोधनकाल (Enlightenment) ने मानव बुद्धि, तर्क और विज्ञान को महत्व देने की प्रेरणा दी।
  • दार्शनिकों जैसे रूसो (Rousseau), वोल्टेयर (Voltaire) और मोंतेस्क्यू (Montesquieu) ने निरंकुश राजतंत्र की आलोचना की।
  • रूसो के “Social Contract” सिद्धांत ने जनसत्ता (sovereignty of people) की अवधारणा को जन्म दिया।
  • मोंतेस्क्यू ने शासन में शक्ति-विभाजन (separation of powers) का विचार दिया, जो बाद में लोकतंत्र की नींव बना।
  • वोल्टेयर ने धार्मिक असहिष्णुता और चर्च के प्रभुत्व का विरोध किया।
  • तर्क और विवेक को प्रबोधनकाल ने पारंपरिक मान्यताओं पर श्रेष्ठ ठहराया।
  • फ्रांस की जनता में समानता और न्याय की भावना प्रबोधन विचारों से जागी।
  • इन विचारों ने राजा लुई 16वें की निरंकुश सत्ता को चुनौती देने का साहस दिया।
  • मुद्रण और प्रकाशन के विकास से प्रबोधन के विचार जन-जन तक पहुँचे।
  • क्रांति के घोषणापत्र “मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा” में प्रबोधन विचार झलकते हैं।
  • क्रांति के बाद धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की स्थापना प्रबोधन की उपलब्धि थी।
  • इस प्रकार, प्रबोधनकाल की वैचारिक चेतना ही क्रांति का बौद्धिक आधार बनी।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः फ्रांस की क्रांति केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं, बल्कि विचारों का विस्फोट थी। यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि फ्रांस की क्रांति प्रबोधनकाल का प्रत्यक्ष सुपरिणाम थी, जिसने आधुनिक लोकतांत्रिक युग की नींव रखी।

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