बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण स्थान है। व्याख्या कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म के उद्भव, विकास और प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ बुद्ध के जीवन से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ घटीं, जिन्होंने बौद्ध धर्म को विश्वव्यापी स्वरूप दिया। इस प्रदेश की भूमि बुद्ध के उपदेशों, शिक्षाओं और स्मृतियों से अनुप्राणित मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • लुम्बिनी के समीप कपिलवस्तु: सिद्धार्थ गौतम का बाल्यकाल कपिलवस्तु (वर्तमान सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश के निकट) में बीता।
  • सारणाथ (वाराणसी): बुद्ध ने यहाँ अपने पाँच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया — ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ यही से प्रारंभ हुआ।
  • कुशीनगर (गोरखपुर): यहीं बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ, जो बौद्ध श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ है।
  • श्रावस्ती: बुद्ध ने अपने जीवन के अधिकतम वर्ष यहाँ बिताए और अनेक उपदेश दिए।
  • कौशाम्बी: यहाँ बुद्ध ने संघ की स्थापना और संगठनात्मक कार्यों का विस्तार किया।
  • संकिसा (फर्रुखाबाद): माना जाता है कि यहीं बुद्ध स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आए थे।
  • बौद्ध स्तूप और विहार: सारनाथ, श्रावस्ती और कुशीनगर में बने प्राचीन स्तूप बौद्ध कला के अनमोल उदाहरण हैं।
  • अशोक का योगदान: सम्राट अशोक ने उत्तर प्रदेश में अनेक स्तंभ, स्तूप और शिलालेख बनवाकर बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया।
  • बौद्ध शिक्षा केंद्र: सारनाथ और श्रावस्ती प्राचीन काल में बौद्ध अध्ययन के प्रमुख केंद्र रहे।
  • अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ यात्रा मार्ग: उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थल आज भी वैश्विक पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं।
  • आधुनिक पुनर्जागरण: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने यहाँ से बौद्ध धर्म के नवजागरण को गति दी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: बौद्ध विचारधारा ने प्रदेश की कला, वास्तुकला और सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म की जीवन यात्रा का साक्षी और केंद्र बिंदु रहा है। यह भूमि आज भी विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए श्रद्धा, अध्ययन और प्रेरणा का प्रमुख स्थल है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.