‘भूदान आन्दोलन’ भारत में भूमि सुधार का एक हिस्सा था ? इसके प्रमुख प्रभावों की विवेचना कीजिये ।
Ans: परिचय (Introduction):
‘भूदान आन्दोलन’ (Bhoodan Movement) की शुरुआत 1951 में आचार्य विनोबा भावे ने की थी, जिसका उद्देश्य भूमिहीन किसानों को स्वेच्छा से दान में भूमि दिलाना था। यह आंदोलन अहिंसा और स्वैच्छिक सहयोग पर आधारित था।
मुख्य प्रभाव (Key Impacts):
- भूमि सुधार का नैतिक पहलू – यह आंदोलन कानूनी न होकर नैतिक भूमि पुनर्वितरण का माध्यम बना।
- भूमिहीनों को भूमि प्राप्ति – लाखों एकड़ भूमि दान में मिलने से गरीब किसानों को जमीन मिली।
- सामाजिक समरसता – जमींदारों और किसानों के बीच संबंधों में सुधार हुआ।
- ग्राम स्वराज की भावना – गांवों में आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला।
- सरकारी भूमि सुधारों पर प्रभाव – इस आंदोलन ने सरकार को भूमि सुधार नीतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।
- सीमित सफलता – कई मामलों में दान की गई भूमि कानूनी या उपयोगी नहीं थी।
- आन्दोलन का प्रसार – बाद में ग्रामदान, संपत्तिदान जैसे आंदोलनों में भी विस्तार हुआ।
निष्कर्ष (Conclusion):
भूदान आन्दोलन को भारत में भूमि सुधार का नैतिक व सामाजिक अंग कहा जा सकता है। यद्यपि इसकी सीमाएँ थीं, परंतु इसने ग्रामीण चेतना और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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