उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं? सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास का उपयोग करके उन्हें कैसे संबोधित किया जा सकता है?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। राज्य में गेहूँ, चावल, गन्ना, आलू, दालें और तिलहन जैसे प्रमुख फसलें उत्पादित होती हैं। किन्तु कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन में अनेक संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य चुनौतियाँ (Main Challenges):

  • भूमि विखंडन: छोटे व बिखरे खेतों के कारण उत्पादकता कम है।
  • सिंचाई असमानता: पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक सिंचाई जबकि पूर्वी में अभाव।
  • भंडारण और कोल्ड चेन की कमी: फलों व सब्जियों का भारी नुकसान।
  • कृषि विपणन में बिचौलियों की भूमिका: किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
  • कृषि आधारित उद्योगों की कमी: मूल्य संवर्द्धन सीमित है।
  • आधुनिक तकनीकों की जानकारी का अभाव: पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता।
  • मौसमीय अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समाधान (Science & Tech-based Solutions):
  • स्मार्ट कृषि तकनीकें जैसे IoT, सेंसर और ड्रोन से फसल प्रबंधन सुधारा जा सकता है।
  • ई-नाम (e-NAM) और डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म से किसानों को सीधा बाजार मिल सकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और लॉजिस्टिक नेटवर्क को बढ़ाकर हानि घटाई जा सकती है।
  • कृषि जैव प्रौद्योगिकी से उच्च उत्पादक व रोग-रोधी किस्में विकसित की जा सकती हैं।
  • कृषि-स्टार्टअप्स और मिलियम फार्मर्स स्कूल से प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से उत्तर प्रदेश की कृषि अधिक उत्पादक, टिकाऊ और समावेशी बन सकती है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों सशक्त होंगी।

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