उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास की क्या उपलब्धियाँ हैं? इससे समाज के गरीब वर्ग के उत्थान में किस प्रकार मदद मिलेगी?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) का क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार ने कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई अनुसंधान संस्थान और नीतिगत पहल की हैं। यह विज्ञान राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज के गरीब वर्गों के जीवन स्तर सुधार में भी सहायक बन रहा है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • उत्तर प्रदेश की बायोटेक नीति 2022 ने अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया।
  • लखनऊ बायोटेक पार्क और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के प्रमुख केंद्र हैं।
  • सीएसआईआर–आईआईएमटी (लखनऊ) में औषधीय पौधों और जैविक दवाओं पर कार्य हो रहा है।
  • कृषि क्षेत्र में टिश्यू कल्चर तकनीक से उच्च उत्पादक किस्में विकसित की गईं।
  • सूखा-रोधी और रोग-प्रतिरोधी बीजों का विकास किया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ी।
  • डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में जीनोमिक सुधार से उत्पादन में वृद्धि हुई।
  • पर्यावरण संरक्षण हेतु अपशिष्ट जल उपचार में सूक्ष्मजीव आधारित तकनीक अपनाई जा रही है।
  • बायोफर्टिलाइज़र और बायोपेस्टिसाइड से खेती की लागत कम हुई।
  • जैव चिकित्सा अनुसंधान से सस्ती वैक्सीन और औषधियाँ विकसित की जा रही हैं।
  • ग्रामीण युवाओं के लिए बायोटेक स्टार्टअप और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए।

गरीब वर्ग के उत्थान में योगदान: इन नवाचारों से किसानों की उत्पादकता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिससे गरीब वर्ग की आय व जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion): जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम सिद्ध हो रहा है।

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