बफर स्टॉक से आप क्या समझते हैं ? क्या भारत में खाद्य सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है ? स्पष्ट रूप से व्याख्या कीजिये ।
Ans: भूमिका (Introduction) –
बफर स्टॉक (Buffer Stock) से तात्पर्य सरकार द्वारा आवश्यक मात्रा में खाद्यान्नों (जैसे गेहूँ, चावल आदि) का भंडारण करना है, ताकि आपातकालीन स्थितियों—जैसे सूखा, बाढ़ या बाजार में मूल्य अस्थिरता—में जन-आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यह प्रणाली भारत की खाद्य सुरक्षा नीति का एक प्रमुख आधार है।
मुख्य बिंदु (Main Points):
- बफर स्टॉक का निर्माण भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा किया जाता है।
- इसका उद्देश्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देना और उपभोक्ताओं के लिए खाद्यान्न की स्थिर आपूर्ति बनाए रखना है।
- यह स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीब व कमजोर वर्गों तक भोजन पहुँचाने में सहायक होता है।
- प्राकृतिक आपदाओं या आपूर्ति संकट के समय यह भंडार देश को राहत प्रदान करता है।
- बफर स्टॉक मूल्य स्थिरीकरण (Price Stabilization) का भी प्रभावी साधन है।
- सरकार प्रत्येक वर्ष खाद्य सुरक्षा मानदंडों के अनुसार न्यूनतम बफर स्टॉक सीमा निर्धारित करती है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ने इस प्रणाली को कानूनी समर्थन दिया है।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी योजनाओं के सफल संचालन के पीछे यही तंत्र कार्य करता है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान बफर स्टॉक ने देशभर में मुफ्त अनाज वितरण संभव बनाया।
- हालांकि, अत्यधिक भंडारण से गोदामों पर दबाव, खाद्यान्न की बर्बादी और वित्तीय बोझ भी बढ़ता है।
- इसलिए, तकनीकी भंडारण, आपूर्ति प्रबंधन और समयबद्ध निकासी जरूरी है।
- डिजिटल निगरानी और ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली बफर स्टॉक प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बना सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion) –
स्पष्ट है कि भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफर स्टॉक नितांत आवश्यक है। यह न केवल संकट के समय भोजन की उपलब्धता बनाए रखता है, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा भी करता है।
Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.