2014 के पश्चात भूख और गरीबी पर भारत की प्रगति क्या है ? व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

2014 के बाद भारत सरकार ने भूख (Hunger) और गरीबी (Poverty) को कम करने के लिए कई व्यापक नीतियाँ और योजनाएँ शुरू कीं। इनका उद्देश्य था—“सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर आधारित समावेशी विकास सुनिश्चित करना। हालाँकि कुछ प्रगति हुई है, फिर भी भूख और कुपोषण जैसी समस्याएँ आज भी चुनौती बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • 2014 के बाद गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत लगातार घटा है।
  • नीति आयोग के अनुसार, 2013-14 से 2022 तक लगभग 24 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर आए।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) ने भोजन का अधिकार सुनिश्चित किया।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, और जल जीवन मिशन ने जीवन स्तर में सुधार किया।
  • मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण रोजगार के माध्यम से आय में वृद्धि की।
  • जन-धन योजना ने वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ाया, जिससे गरीब तबकों की पहुँच बैंकिंग तक हुई।
  • आयुष्मान भारत योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाया।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई और लीकेज घटाया।
  • कोविड-19 के दौरान सरकार की राहत योजनाओं ने गरीब वर्गों को आंशिक सहारा दिया।
  • फिर भी, ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024 में भारत की रैंक अभी भी चिंताजनक है (100 से नीचे)।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, बेरोजगारी और मूल्यवृद्धि जैसी समस्याएँ अब भी गरीबी को बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

2014 के बाद भारत ने गरीबी घटाने और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। फिर भी, स्थायी विकास के लिए रोजगार सृजन, पोषण सुधार और सामाजिक सुरक्षा को और सशक्त बनाना आवश्यक है।                  

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