क्षेत्रवाद भारत के विकास में किस प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न करता है ?

Ans: परिचय (Introduction):

क्षेत्रवाद (Regionalism) का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र के हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखना। यह भारतीय लोकतंत्र में विविधता के साथ जुड़ा एक सामाजिक-राजनीतिक भाव है। परंतु जब यह अति रूप लेता है तो राष्ट्र की एकता और विकास में बाधा बनता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • क्षेत्रीय असमानता और संसाधनों के असमान वितरण से क्षेत्रवाद बढ़ता है।
  • इससे राष्ट्रीय एकता और अखंडता को खतरा उत्पन्न होता है।
  • विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में राजनीतिक टकराव पैदा होता है।
  • राज्यों के बीच जल, सीमा और रोजगार संबंधी विवाद बढ़ते हैं।
  • प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और असमान आर्थिक विकास होता है।
  • जातीय एवं भाषाई तनाव समाज में अस्थिरता लाते हैं।
  • राष्ट्रीय नीतियों के विरुद्ध क्षेत्रीय स्वार्थ हावी हो जाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion): क्षेत्रवाद भारत की प्रगति के मार्ग में सामाजिक और राजनीतिक विभाजन उत्पन्न करता है। संतुलित विकास और राष्ट्रीय एकता ही इसका स्थायी समाधान है।

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