भारत में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में वित्त आयोग क्या भूमिका निभा सकता है और इसने अब तक क्या उपाय किए हैं ?
Ans: परिचय (Introduction):
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में क्षेत्रीय असमानताएँ (Regional Inequalities) एक प्रमुख चुनौती हैं। इन असमानताओं को कम करने में वित्त आयोग (Finance Commission) की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह आयोग केन्द्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के माध्यम से संतुलित विकास सुनिश्चित करता है।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- वित्त आयोग का गठन अनुच्छेद 280 के तहत हर पाँच वर्ष में किया जाता है।
- इसका मुख्य कार्य केन्द्र और राज्यों के बीच राजस्व विभाजन (Tax Devolution) निर्धारित करना है।
- आयोग वित्तीय संसाधनों का ऐसा वितरण करता है जिससे पिछड़े राज्यों को अधिक सहायता मिल सके।
- यह राज्यों की वित्तीय क्षमता और आवश्यकताओं का तुलनात्मक मूल्यांकन करता है।
- आयोग राज्यों की जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, आय स्तर और राजकोषीय अनुशासन जैसे मानदंडों को ध्यान में रखता है।
- 14वें वित्त आयोग ने राज्यों को कुल कर राजस्व का 42% हिस्सा देने की अनुशंसा की, जिससे राज्यों की स्वायत्तता बढ़ी।
- 15वें वित्त आयोग ने राज्यों के प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (Performance-based incentives) को जोड़ा।
- विशेष सहायता पूर्वोत्तर, पहाड़ी और आकांक्षी जिलों के लिए दी गई।
- आयोग ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुदान देने की व्यवस्था की।
- इसने राज्यों के वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया।
- आयोग की सिफारिशों से क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।
- फिर भी, राज्य-स्तरीय नीति कार्यान्वयन में असमानताएँ बनी हुई हैं।
निष्कर्ष (Conclusion):
वित्त आयोग भारत में वित्तीय समानता और क्षेत्रीय संतुलन का प्रमुख साधन है। इसके विवेकपूर्ण सुझावों से राज्यों की आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
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