उत्तर प्रदेश में रोजगार क्षमता बढ़ाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की क्या भूमिका है? युवाओं को अधिक रोजगार के अवसर देने के लिये इसे कैसे सशक्त किया जा सकता है?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है जहाँ युवाओं की संख्या बड़ी है। ऐसे में रोजगार सृजन राज्य की प्राथमिक आवश्यकता है। इस दिशा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public–Private Partnership: PPP) मॉडल राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: PPP मॉडल से सड़कों, औद्योगिक गलियारों, हवाईअड्डों और लॉजिस्टिक्स पार्कों का निर्माण हुआ, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित हुए।
  • शिक्षा एवं कौशल विकास: निजी क्षेत्र के सहयोग से कौशल विश्वविद्यालयों और ITI संस्थानों की स्थापना हुई।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में PPP: निजी अस्पतालों के साथ करार से चिकित्सा सेवाएँ विस्तारित हुईं, जिससे मेडिकल स्टाफ को रोजगार मिला।
  • औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) जैसी पहलों से MSME क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ा।
  • डिजिटल और स्टार्टअप इकोसिस्टम: PPP मॉडल के तहत आईटी पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
  • पर्यटन विकास: PPP के माध्यम से धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार।
  • कृषि मूल्य श्रृंखला: निजी निवेश से कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयाँ और एग्री-बिजनेस को बल मिला।

सशक्तिकरण हेतु सुझाव (Suggestions):

PPP परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।

स्किल इंडिया जैसी योजनाओं को निजी उद्योगों से सीधे जोड़ा जाए।

नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को सरकारी वित्तीय सहायता दी जाए।

निष्कर्ष (Conclusion): सार्वजनिक-निजी भागीदारी रोजगार सृजन का सशक्त उपकरण है। यदि इसे कौशल विकास और उद्योग विस्तार से जोड़ा जाए, तो उत्तर प्रदेश युवाओं के लिए अवसरों का केन्द्र बन सकता है।

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