लोक प्रशासन में कार्यरत अधिकारी के लिए सिविल सेवा मूल्यों का स्वरूप क्या होना चाहिए? वह अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में इन मूल्यों के बीच कैसे संतुलन स्थापित कर सकता है? समझाइये।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोक प्रशासन में कार्यरत अधिकारी समाज और सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है। उसके आचरण में सिविल सेवा मूल्यों का प्रतिबिंब जनविश्वास और सुशासन की नींव बनता है। अतः इन मूल्यों का स्पष्ट स्वरूप और संतुलित पालन अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सत्यनिष्ठा (Integrity): ईमानदारी और नैतिकता को प्रत्येक कार्य का आधार बनाना।
  • निष्पक्षता (Impartiality): सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना, किसी भी दबाव से मुक्त रहना।
  • उत्तरदायित्व (Accountability): अपने निर्णयों और कार्यों के लिए जनता और सरकार के प्रति जवाबदेह रहना।
  • पारदर्शिता (Transparency): नीतियों और निर्णयों को स्पष्ट, सार्वजनिक और जाँच योग्य रखना।
  • लोकहित की भावना (Public Service Orientation): निजी लाभ से ऊपर जनहित को रखना।
  • कर्तव्यनिष्ठा (Dedication to Duty): प्रशासनिक कार्यों को समय पर और पूर्ण समर्पण से पूरा करना।
  • संवेदनशीलता (Empathy): विशेषकर कमजोर वर्गों की समस्याओं के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखना।
  • व्यावसायिकता (Professionalism): ज्ञान, दक्षता और नैतिकता का संयोजन बनाए रखना।
  • शुचिता (Probity): पद की गरिमा बनाए रखते हुए भ्रष्टाचार रहित आचरण अपनाना।
  • साहसिकता (Courage of Conviction): सही निर्णय के लिए नैतिक साहस दिखाना, चाहे दबाव कोई भी हो।
  • संतुलन (Balance): निजी जीवन में सादगी, संयम और पारिवारिक मूल्यों का पालन करते हुए सार्वजनिक जीवन में निष्पक्षता बनाए रखना।
  • निरंतर आत्ममंथन (Self-evaluation): अपने आचरण की समय-समय पर समीक्षा करना ताकि नैतिकता बनी रहे।

निष्कर्ष (Conclusion):

सिविल सेवक के लिए नैतिक मूल्य केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि आचरण की रीढ़ हैं। जब वह निजी और सार्वजनिक जीवन दोनों में इन मूल्यों का संतुलन रखता है, तभी वह सच्चे अर्थों में जनसेवक कहलाता है।

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