भारत में ऊर्जा संसाधनों की लगातार बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं? विशेष रूप से अक्षय एवं टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, जहाँ ऊर्जा संसाधनों की माँग निरंतर बढ़ रही है। पारंपरिक स्रोतों जैसे कोयला और पेट्रोलियम पर अत्यधिक निर्भरता पर्यावरणीय संकट को जन्म दे रही है। इसलिए भारत अब अक्षय (Renewable) और टिकाऊ (Sustainable) ऊर्जा स्रोतों की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।

भारत में ऊर्जा माँग पूरी करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम (Major Steps Taken to Meet Energy Demand):

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission): 280 GW सौर ऊर्जा उत्पादन लक्ष्य (2030 तक)।
  • राष्ट्रीय पवन ऊर्जा नीति: पवन ऊर्जा के उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहन।
  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना: नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर ग्रिड एकीकरण हेतु।
  • इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA): सौर ऊर्जा के वैश्विक सहयोग में भारत की अग्रणी भूमिका।
  • हाइड्रोपावर विकास: छोटे और मध्यम जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा।
  • बायो-ऊर्जा और कचरे से ऊर्जा कार्यक्रम: कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति: ईंधन खपत कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने हेतु।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE): ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री कुसुम योजना: किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध कराना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को प्रोत्साहन: निजी क्षेत्र के लिए कर रियायतें और निवेश सुरक्षा।
  • हाइड्रोजन मिशन: हरित हाइड्रोजन को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के रूप में विकसित करना।
  • राज्यों में ऊर्जा नीति सुधार: विकेन्द्रीकृत सौर परियोजनाओं और माइक्रोग्रिड का विस्तार।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है। सौर, पवन और हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित नीतियाँ न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता लाएँगी बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास को भी सुनिश्चित करेंगी।

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