शीतोष्ण चक्रवात पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए । यह भारत को कैसे प्रभावित करता है ?
Ans: प्रस्तावना (Introduction) –
शीतोष्ण चक्रवात (Temperate Cyclone) वे वायुमंडलीय तंत्र हैं जो 30° से 60° अक्षांशों के बीच शीतोष्ण क्षेत्रों में बनते हैं। इनका निर्माण ठंडी और गर्म वायु द्रव्यों के मिलन से होता है, जिससे वायुमंडल में अस्थिरता उत्पन्न होती है। इन्हें मध्य अक्षांशीय चक्रवात (Mid-latitude Cyclones) भी कहा जाता है।
मुख्य बिंदु (Main Points):
- शीतोष्ण चक्रवात का निर्माण वायुमंडलीय मोर्चों (Fronts) पर होता है — जहाँ गर्म और ठंडी हवाएँ टकराती हैं।
- इनका आकार विशाल होता है, जो हजारों किलोमीटर क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
- इनकी गति उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में धीमी होती है।
- यह पश्चिम से पूर्व दिशा में गतिमान रहते हैं।
- इनमें वर्षा, हिमपात, और तीव्र हवाएँ होती हैं, जो तापमान में अचानक परिवर्तन लाती हैं।
- इनका जीवनकाल सामान्यतः 3 से 10 दिन तक होता है।
- भारत में ये मुख्यतः शीत ऋतु (Winter Season) में सक्रिय होते हैं।
- भारत में इन्हें पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) कहा जाता है।
- ये भूमध्यसागर से उत्पन्न होकर ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुँचते हैं।
- उत्तर-पश्चिमी भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर प्रभावित होते हैं।
- इनसे गेहूं, जौ जैसी रबी फसलों को लाभदायक वर्षा मिलती है।
- परंतु कभी-कभी ये अत्यधिक वर्षा या ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान भी पहुँचाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion) –
शीतोष्ण चक्रवात भारत के जलवायु तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। ये जहाँ एक ओर रबी कृषि के लिए उपयोगी वर्षा लाते हैं, वहीं असमय वर्षा और ओलावृष्टि से कृषि को नुकसान भी पहुँचा सकते हैं।
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