स्वयं सहायता समूह की संरचना और उनके कार्यों पर एक विश्लेषणात्मक टिप्पणी कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) ग्रामीण विकास की एक प्रभावी अवधारणा है, जो महिलाओं एवं कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बनी है। यह समूह सामूहिक बचत, ऋण और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसकी संरचना विकेन्द्रित, सहभागी एवं लोकतांत्रिक ढंग से निर्मित होती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रत्येक SHG में सामान्यतः 10 से 20 सदस्य होते हैं।
  • सदस्य समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से होते हैं।
  • समूह का नेतृत्व अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • नियमित बैठकें, बचत संग्रह और लघु ऋण वितरण इसकी प्रमुख क्रियाएँ हैं।
  • यह बैंक लिंकेज कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय संस्थानों से जुड़ा होता है।
  • निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
  • यह ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता, शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के अवसर देता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ाया है इनके माध्यम से सामाजिक समानता, आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

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