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Describe the habitat condition, flora and fauna: the three ecozones of Uttar Pradesh. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश के तीन पारिस्थितिक क्षेत्रों: आवास स्थिति, वनस्पति और जीव-जन्तुओं का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश भौगोलिक रूप से विविध राज्य है, जहाँ की पारिस्थितिकी (Ecology) जलवायु, स्थलाकृति और मिट्टी के आधार पर भिन्न-भिन्न रूपों में पाई जाती है। इसे तीन प्रमुख पारिस्थितिक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है — तराई क्षेत्र, गंगा–यमुना दोआब, और विंध्य क्षेत्र — जिनकी अपनी विशिष्ट आवास स्थिति, वनस्पति और जीव-जंतु हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • तराई क्षेत्र:
  • आवास स्थिति: नेपाल सीमा से लगा आर्द्र और दलदली क्षेत्र, प्रचुर वर्षा और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी।
  • वनस्पति: साल, सागौन, शीशम, बांस और गन्ने की खेती प्रमुख।
  • जीव-जंतु: बाघ, हाथी, बारहसिंगा, घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन यहाँ पाई जाती हैं।
  • गंगा–यमुना दोआब:
  • आवास स्थिति: समतल मैदान, मध्यम वर्षा, सिंचाई सुविधाओं से संपन्न।
  • वनस्पति: कृषि प्रधान क्षेत्र – गेहूँ, गन्ना, चना और सरसों की प्रमुख फसलें।
  • जीव-जंतु: लोमड़ी, सियार, नीलगाय, खरगोश और अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • विंध्य क्षेत्र:
  • आवास स्थिति: पथरीला, ऊँचा-नीचा और शुष्क भूभाग (मिर्जापुर, सोनभद्र)।
  • वनस्पति: झाड़ियों, सागौन, बबूल व तेंदू वृक्षों की अधिकता।
  • जीव-जंतु: तेंदुआ, चीतल, भालू, सर्प और कई पक्षी प्रजातियाँ।

निष्कर्ष (Conclusion): ये तीनों पारिस्थितिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के मूल आधार हैं, जो राज्य की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरणीय स्थिरता को बनाए रखते हैं।

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Divide the geographical regions of Uttar Pradesh and explain their geographical, economic and cultural significance. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश को भौगोलिक प्रदेशों में विभक्त कीजिए और इनके भौगोलिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व को समझाइये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विविध राज्य है। इसकी स्थलाकृति, जलवायु और मिट्टी की भिन्नता के आधार पर इसे चार प्रमुख भौगोलिक प्रदेशों में बाँटा गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • तराई एवं भावर प्रदेश:
  • स्थान: नेपाल सीमा के समानांतर फैला क्षेत्र।
  • भौगोलिक महत्त्व: जलोढ़ मिट्टी, घने वन और नमी युक्त जलवायु।
  • आर्थिक महत्त्व: धान, गन्ना उत्पादन और पशुपालन के लिए उपयुक्त।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: थारू व स्थानीय जनजातीय संस्कृति प्रमुख।
  • गंगा–यमुना दोआब:
  • भौगोलिक महत्त्व: समतल मैदान और उपजाऊ मिट्टी।
  • आर्थिक महत्त्व: गन्ना, गेहूँ उत्पादन तथा कानपुर, मेरठ जैसे औद्योगिक नगर।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: प्रयागराज धार्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध।
  • अवध–बुंदेलखंड पठार:
  • भौगोलिक महत्त्व: मिश्रित भू-आकृतियाँ और मध्यम उपजाऊ मिट्टी।
  • आर्थिक महत्त्व: कृषि, हस्तशिल्प व खनन।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: अवध की नवाबी संस्कृति और बुंदेलखंड की लोक परंपराएँ।
  • विंध्य प्रदेश:
  • भौगोलिक महत्त्व: पहाड़ी व वनाच्छादित क्षेत्र (सोनभद्र, मिर्जापुर)।
  • आर्थिक महत्त्व: कोयला, चूना पत्थर जैसे खनिजों से समृद्ध।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: मंदिर, लोकनृत्य और जनजातीय जीवन।

निष्कर्ष (Conclusion): ये चारों प्रदेश उत्तर प्रदेश की भौगोलिक विविधता, आर्थिक आधार और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं।

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Mention the technological advancement adopted by the Uttar Pradesh Government to improve weather forecasting. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-6

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मौसम के पूर्वानुमान में सुधार के लिये उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनायी गयी तकनीकी प्रगति का उल्लेख कीजिये।

Ans: परिचय:

 उत्तर प्रदेश सरकार ने मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting) को अधिक सटीक और समयबद्ध बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी और डेटा आधारित प्रणाली को अपनाया है। इसका उद्देश्य किसानों, आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण में मदद पहुँचाना है।

मुख्य बिंदु:

  • ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और रेन गेज नेटवर्क राज्य के अधिकांश जिलों में स्थापित किए गए हैं।
  • डॉपलर रडार प्रणाली से वर्षा, तूफान और आँधी की सटीक निगरानी की जाती है।
  • रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट डेटा के माध्यम से मौसम परिवर्तन की वास्तविक समय जानकारी मिलती है।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) द्वारा मौसम अलर्ट प्रणाली विकसित की गई है।
  • कृषि मौसम सेवा केंद्रों के माध्यम से किसानों को SMS और मोबाइल ऐप से मौसम सलाह दी जाती है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल मौसम विश्लेषण को अधिक विश्वसनीय बना रहे हैं।
  • भारत मौसम विभाग (IMD) के साथ समन्वय से राज्य स्तरीय पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ी है।

निष्कर्ष: इन तकनीकी प्रगतियों से उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और आपदा तैयारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे कृषि और जनजीवन दोनों सुरक्षित हुए हैं।

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Describe the geographical distribution and characteristics of main types of natural vegetation found in Uttar Pradesh. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में पायी जाने वाली प्रमुख प्राकृतिक वनस्पतियों के भौगोलिक वितरण एवं विशेषताओं का वर्णन करें।

Ans: परिचय:

 उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक वनस्पतियाँ राज्य के जलवायु, वर्षा और स्थलाकृति पर निर्भर करती हैं। यहाँ की वनस्पतियाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों से लेकर काँटेदार झाड़ियों तक विविध प्रकार की हैं, जो राज्य के पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देती हैं।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य का लगभग 6.5% क्षेत्र वनाच्छादित है।
  • तराई और पूर्वी यूपी में घने नमीदार साल, सागौन, शीशम जैसे वृक्ष पाए जाते हैं।
  • मध्य प्रदेश सीमा से लगे बुंदेलखंड क्षेत्र में काँटेदार झाड़ियाँ व बबूल प्रमुख हैं।
  • गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में कृषि प्रधान भूमि के कारण प्राकृतिक वन कम हैं।
  • सोनभद्र और मिर्जापुर के पहाड़ी क्षेत्रों में सूखे पर्णपाती वन मिलते हैं।
  • तराई क्षेत्र के दलदली वन में बांस, सरकंडा, और ताड़ प्रमुख हैं।
  • वनस्पतियाँ जैव विविधता, मृदा संरक्षण और जलवायु संतुलन में सहायक हैं।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश की वनस्पतियाँ राज्य की भौगोलिक विविधता का प्रतिबिंब हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित होता है।

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Identify the Ramsar sites of Uttar Pradesh and describe their features. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS

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उत्तर प्रदेश के रामसर स्थलों को चिह्नित कीजिये एवं उनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिये।

Ans:  परिचय:

उत्तर प्रदेश में कई आर्द्रभूमि स्थल (Wetlands) हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व के कारण रामसर स्थल (Ramsar Sites) घोषित किया गया है। ये स्थल जैव विविधता, जल संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के आवास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य में कुल 10 रामसर स्थल हैं जैसे— नवाबगंज, समासपुर, संडी, पार्वती अरण्य, बखिरा, सुरहा ताल, सैंथरी, सम्प्रस, हक्कार और संजय झील।
  • अधिकांश स्थल गंगा और घाघरा नदी तंत्र से जुड़े हैं।
  • यहाँ सारस, पेलिकन, साइबेरियन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं।
  • ये स्थल भू-जल पुनर्भरण और जलवायु संतुलन में सहायक हैं।
  • स्थानीय मछली पालन और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
  • कुछ स्थल इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।
  • प्रदूषण और अतिक्रमण इनके संरक्षण की मुख्य चुनौती हैं।

निष्कर्ष: रामसर स्थल उत्तर प्रदेश की पर्यावरणीय धरोहर हैं, जिनके संरक्षण से सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिलेगी।

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