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What is the role of self help groups in rural development? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय:

स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं और गरीब वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम हैं। ये छोटे समूह आत्मनिर्भरता, सहयोग और वित्तीय समावेशन की भावना को बढ़ावा देते हैं। ग्रामीण विकास की नीतियों में इनकी भूमिका अब अत्यंत केंद्रीय हो गई है।

मुख्य बिंदु:

  • SHGs के माध्यम से गरीब महिलाएँ सामूहिक बचत और ऋण सुविधा प्राप्त करती हैं।
  • ये स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देते हैं।
  • ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक सशक्तिकरण बढ़ता है।
  • बैंकिंग प्रणाली से जुड़कर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत SHGs को संस्थागत समर्थन मिला है।
  • सामुदायिक निर्णयों में भागीदारी से स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है।

निष्कर्ष:

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी है। ये न केवल गरीबी घटाते हैं, बल्कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाते हैं।

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Review the contribution of the public distribution system in poverty alleviation. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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गरीबी उन्मूलन हेतु सार्वजनिक वितरण प्रणाली के योगदान की समीक्षा कीजिए।

Ans: परिचय:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत में गरीबों को सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की एक प्रमुख योजना है। यह खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय दोनों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य भूखमरी को समाप्त करना और जीवन स्तर में सुधार लाना है।

मुख्य बिंदु:

  • PDS के माध्यम से गेहूँ, चावल, चीनी व केरोसिन जैसी आवश्यक वस्तुएँ रियायती दरों पर दी जाती हैं।
  • यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत कानूनी अधिकार के रूप में लागू है।
  • गरीबों की क्रय शक्ति बढ़ाकर आर्थिक असमानता को घटाती है।
  • ग्रामीण व शहरी गरीबों को न्यूनतम जीवन आवश्यकताएँ सुनिश्चित करती है।
  • Targeted PDS (TPDS) द्वारा कमजोर वर्गों को विशेष प्राथमिकता दी गई।
  • मध्याह्न भोजन योजना और अन्त्योदय अन्न योजना जैसी योजनाएँ PDS से जुड़ी हैं।
  • वितरण प्रणाली में ई-राशन कार्ड और डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी है।

निष्कर्ष:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर गरीबी उन्मूलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि इसे और पारदर्शी व कुशल बनाया जाए, तो यह सामाजिक न्याय का सशक्त उपकरण बन सकती है।

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Write the role of NITI Aayog in the development of India. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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भारत के विकास में नीति आयोग की भूमिका लिखिए।

Ans: परिचय:

नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई। इसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। यह देश के समग्र और संतुलित विकास के लिए नीति निर्माण की दिशा तय करता है।

मुख्य बिंदु:

  • नीति आयोग थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है, जो सरकार को नीतिगत सलाह देता है।
  • यह राज्यों की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनाने में सहयोग करता है।
  • सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करता है।
  • दीर्घकालिक विकास हेतु सतत विकास लक्ष्य (SDGs) को अपनाया गया है।
  • आयोग नीति निर्माण में डेटा विश्लेषण और नवाचार को प्राथमिकता देता है।
  • आयुष्मान भारत, अटल इनोवेशन मिशन जैसी योजनाओं की निगरानी करता है।
  • आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन आधारित विकास को दिशा देता है।

निष्कर्ष:

नीति आयोग ने योजना आधारित अर्थव्यवस्था को नीति-आधारित विकास मॉडल में परिवर्तित किया। यह भारत को नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की ओर अग्रसर कर रहा है।

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Assess the role of States and Central Government in developing irrigation infrastructure in India. How has Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (P.M.K.S.Y.) helped in improving irrigation access across the country? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत में सिंचाई के बुनियादी ढाँचे के विकास में राज्यों और केन्द्र सरकार की भूमिका का आकलन करें । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पी. एम. के. एस. वाई.) देश भर में सिंचाई की पहुँच को बेहतर बनाने में कैसे मदद की है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत मुख्यतः कृषि प्रधान देश है, जहाँ सिंचाई (Irrigation) कृषि उत्पादन की रीढ़ मानी जाती है। सिंचाई के बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के विकास में केन्द्र और राज्य सरकार दोनों की भूमिकाएँ परस्पर पूरक हैं। इन दोनों के समन्वय से ही जल संसाधनों का न्यायपूर्ण एवं कुशल उपयोग संभव है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • जल संसाधन एक राज्य विषय (State Subject) है, परन्तु बड़े और अन्तरराज्यीय परियोजनाओं के लिए केन्द्र की भूमिका निर्णायक होती है।
  • केन्द्र सरकार जल नीति, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।
  • राज्य सरकारें सिंचाई परियोजनाओं का क्रियान्वयन, रखरखाव और जल वितरण करती हैं।
  • केन्द्रीय जल आयोग (CWC) और जल शक्ति मंत्रालय नीतिगत दिशा और समन्वय सुनिश्चित करते हैं।
  • बड़ी बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जैसे – भाखड़ा-नांगल, सरदार सरोवर, और टिहरी बाँध – केन्द्र-राज्य साझेदारी के उदाहरण हैं।
  • लघु सिंचाई योजनाएँ (Minor Irrigation Projects) जैसे ट्यूबवेल, तालाब, चेक डैम आदि राज्यों के अधीन हैं।
  • वित्त आयोगों द्वारा राज्यों को जल संसाधन विकास हेतु अनुदान दिया जाता है।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2015 में शुरू की गई, जिसका उद्देश्य “हर खेत को पानी” पहुँचाना है।
  • यह योजना चार घटकों पर आधारित है – परंपरागत जल स्रोतों का पुनरुद्धार, सूक्ष्म सिंचाई (Drip/Sprinkler) को बढ़ावा, जल संरक्षण और खेत-स्तरीय सिंचाई विस्तार।
  • योजना से जल उपयोग दक्षता में सुधार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादकता वृद्धि, और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
  • PMKSY के अंतर्गत “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान ने पानी की बचत के साथ फसल उत्पादन को प्रोत्साहन दिया।
  • केन्द्र–राज्य साझा वित्तपोषण (60:40) ने योजना को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहुँच दिलाई।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि भारत में सिंचाई अवसंरचना के विकास में केन्द्र और राज्य दोनों की भूमिकाएँ समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ने इस सहयोग को संस्थागत रूप देकर जल प्रबंधन और कृषि विकास में नई ऊर्जा प्रदान की है।

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Budgets are half used if they serve only as planning device”. Critically examine this statement. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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“बजट का आधा उपयोग हो पाता है यदि उन्हें केवल नियोजन के उपकरण के रूप में ही प्रयोग किया जाये |” इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये । “

Ans: भूमिका (Introduction) –

बजट किसी भी सरकार का वार्षिक वित्तीय वक्तव्य है, जो देश की आय और व्यय का अनुमान प्रस्तुत करता है। इसे सामान्यतः नियोजन (Planning) का एक उपकरण माना जाता है, परंतु यदि इसे केवल नियोजन तक सीमित कर दिया जाए, तो इसके व्यापक उद्देश्यों की प्राप्ति अधूरी रह जाती है। यह कथन इसी सीमित दृष्टिकोण की आलोचना प्रस्तुत करता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बजट का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी है।
  • नियोजन के स्तर पर बजट मात्र अनुमान प्रस्तुत करता है; वास्तविक सफलता उसके कार्यान्वयन में निहित होती है।
  • यदि बजट को केवल योजनाबद्ध व्यय तक सीमित कर दिया जाए, तो संसाधनों का दुरुपयोग और अपव्यय बढ़ सकता है।
  • सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन जैसे उद्देश्यों की प्राप्ति तभी संभव है जब बजट परिणामोन्मुख (Outcome-oriented) हो।
  • कई बार योजनाओं के लिए निधि आवंटित होती है, परंतु निगरानी तंत्र की कमी से खर्च अधूरा रह जाता है।
  • भारत में कई मंत्रालय अपने आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं कर पाते, जिससे योजनाओं का प्रभाव घट जाता है।
  • नीति आयोग ने “परिणाम आधारित बजटिंग” (Outcome Budgeting) की संकल्पना इसी समस्या के समाधान हेतु दी है।
  • जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना बजट अपने लक्ष्य से भटक सकता है।
  • प्रभावी ऑडिट, समयबद्ध मूल्यांकन और वित्तीय अनुशासन इसकी उपयोगिता बढ़ाते हैं।
  • बजट को नियोजन के साथ-साथ नीति निर्माण, नियंत्रण और जनकल्याण का माध्यम बनाना आवश्यक है।
  • केवल नियोजन पर केंद्रित बजट “आर्थिक दृष्टि” से अधूरा और “विकास दृष्टि” से कमजोर बन जाता है।
  • इसलिए बजट को एक गतिशील उपकरण के रूप में प्रयोग करना चाहिए, जो लक्ष्य निर्धारण से लेकर परिणाम मूल्यांकन तक सक्रिय भूमिका निभाए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः यह सत्य है कि यदि बजट को केवल नियोजन का उपकरण माना जाए, तो उसकी उपयोगिता आधी रह जाती है। वास्तविक अर्थों में बजट तभी प्रभावी है, जब वह विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को समान रूप से सुनिश्चित करे।

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Does inclusive growth ensure social justice? Discuss. What steps have been taken by the Government of India for bringing inclusive growth with social justice? Elucidate your answer. [ Marks-12 ] UPPCS Mains 2024 GS-3

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क्या समावेशी विकास, सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करता है ? विवेचना कीजिये । भारत सरकार द्वारा सामाजिक न्याय के साथ समावेशी विकास लाने हेतु क्या कदम उठाये गये हैं ? अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

समावेशी विकास (Inclusive Development) का अर्थ है ऐसा आर्थिक विकास जिसमें समाज के सभी वर्ग—गरीब, वंचित, महिलाएँ, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक—समान रूप से सहभागी हों। इसका उद्देश्य केवल GDP वृद्धि नहीं बल्कि समान अवसरों के माध्यम से सामाजिक न्याय (Social Justice) सुनिश्चित करना है। भारत में यह नीति सामाजिक समानता, अवसर की समानता और क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • समावेशी विकास सामाजिक न्याय का व्यावहारिक रूप है, जो समाज में असमानताओं को घटाता है।
  • यह विकास के लाभों को सभी वर्गों तक पहुँचाने पर बल देता है।
  • गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार सृजन इसकी प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास में समान पहुँच सामाजिक न्याय की नींव बनती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों से क्षेत्रीय असमानता कम होती है।
  • महिला सशक्तिकरण योजनाएँ (जैसे – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्ट्रीट वेंडर योजना) लैंगिक न्याय सुनिश्चित करती हैं।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण व उद्यमिता योजनाएँ अवसर समानता को बढ़ाती हैं।
  • अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाएँ (जैसे – नई मंज़िल, नई रोशनी) समावेशी नीति का हिस्सा हैं।
  • मनरेगा (MGNREGA) ग्रामीण रोजगार व सामाजिक सुरक्षा का उदाहरण है।
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना व आधार-DBT प्रणाली आर्थिक समावेशन को सुदृढ़ करती है।
  • शिक्षा का अधिकार व स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाती हैं।
  • नीति आयोग द्वारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की नीति समावेशी विकास की दिशा को पुष्ट करती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि समावेशी विकास, सामाजिक न्याय की प्राप्ति का प्रभावी साधन है। भारत सरकार की नीतियाँ यदि प्रभावी रूप से लागू हों, तो आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समानता भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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India is experiencing the phase of population-dividend’. In this context, discuss the measures adopted by the Government to tackle appropriately the problem of unemployment in the country. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत जनसंख्या-लाभांश की अवस्था से गुजर रहा है’। इस परिप्रेक्ष्य में, देश में बेरोजगारी की समस्या से समोपयुक्त तरीके से निपटने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत वर्तमान में जनसंख्या-लाभांश (Demographic Dividend) की अवस्था में है, जहाँ कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या अधिक है। यदि इस विशाल मानव संसाधन का सही उपयोग न हो, तो यह लाभांश बेरोजगारी की चुनौती में बदल सकता है। इसलिए सरकार ने रोजगार सृजन हेतु अनेक नीतिगत उपाय अपनाए हैं।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) – सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा।
  • मेक इन इंडिया – विनिर्माण क्षेत्र में निवेश व रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • स्किल इंडिया मिशन – युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगारयोग्य बनाना।
  • स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना – नवाचार व उद्यमिता को प्रोत्साहन।
  • मनरेगा (MGNREGA) – ग्रामीण स्तर पर रोजगार की गारंटी और आय-सुरक्षा।
  • डिजिटल इंडिया – आईटी एवं ऑनलाइन सेवाओं में नए रोजगार अवसरों का सृजन।
  • राष्ट्रीय रोजगार नीति – औपचारिक रोजगार बढ़ाने हेतु दीर्घकालिक रणनीति।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकारी योजनाओं ने युवाओं को कौशल, वित्त और अवसर प्रदान कर रोजगार परिदृश्य को सशक्त किया है। यदि शिक्षा, उद्योग और नीति के बीच समन्वय बना रहे, तो भारत अपने जनसंख्या-लाभांश को वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदल सकता है।

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How does the New Economic Policy change the structure of employment in India ? Evaluate. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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नई आर्थिक नीति ने किस प्रकार भारत में रोजगार के ढाँचे को परिवर्तित किया है ? मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

1991 में लागू की गई नई आर्थिक नीति (New Economic Policy – NEP) के तीन मुख्य घटक थे — उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization)। इस नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को खुले बाजार से जोड़ा और रोजगार संरचना में व्यापक परिवर्तन लाए।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • सेवा क्षेत्र का विस्तार – आईटी, बैंकिंग, टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में रोजगार तेजी से बढ़ा।
  • असंगठित क्षेत्र में वृद्धि – लचीले श्रम बाज़ार के कारण अस्थायी व अनुबंधित नौकरियों में वृद्धि हुई।
  • औद्योगिक रोजगार में गिरावट – स्वचालन और प्रतिस्पर्धा से पारंपरिक उद्योगों में नौकरियाँ घटीं।
  • महिला रोजगार में परिवर्तन – सेवा और लघु उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी।
  • कौशल आधारित रोजगार – उच्च शिक्षा व तकनीकी दक्षता की माँग बढ़ी।
  • ग्रामीण-शहरी असमानता – ग्रामीण रोजगार अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा।
  • स्वरोजगार व स्टार्टअप संस्कृति – उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला।

निष्कर्ष (Conclusion): नई आर्थिक नीति ने भारत के रोजगार ढाँचे को पारंपरिक कृषि आधारित से सेवा व कौशल आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित किया। यद्यपि इससे अवसर बढ़े, परंतु असमानता और अस्थायी रोजगार जैसी चुनौतियाँ भी उभरीं।

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How far the act of ‘Right to Information’ is effective in deciding the transparency in governance? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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शासन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘सूचना के अधिकार’ का अधिनियम कहाँ तक प्रभावी है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) लोकतांत्रिक शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। यह नागरिकों को शासन की गतिविधियों में भागीदारी और निगरानी का अवसर प्रदान करता है। इससे सरकार के कार्यों में खुलापन और जिम्मेदारी बढ़ी है।

 मुख्य बिंदु (Main Points):

  • यह अधिनियम नागरिकों को सरकारी सूचनाएँ प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार देता है।
  • इससे भ्रष्टाचार, पक्षपात और प्रशासनिक गोपनीयता में कमी आई है।
  • सरकारी निर्णय प्रक्रिया जनता के लिए अधिक पारदर्शी हुई है।
  • मीडिया और नागरिक समाज को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिली है।
  • सूचना आयोगों की स्थापना ने शिकायत निवारण की प्रक्रिया को सशक्त बनाया।
  • कुछ क्षेत्रों में सूचना न देने या विलंब जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हैं।
  • डिजिटल माध्यमों ने अधिनियम के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया है।

निष्कर्ष (Conclusion): सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शी शासन की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। हालाँकि इसके पूर्ण प्रभाव हेतु प्रशासनिक इच्छाशक्ति और नागरिक जागरूकता आवश्यक है।

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What role do private-public partnership play in improving employability in Uttar Pradesh? How can this be strengthened to provide more job opportunities to the youth? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में रोजगार क्षमता बढ़ाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की क्या भूमिका है? युवाओं को अधिक रोजगार के अवसर देने के लिये इसे कैसे सशक्त किया जा सकता है?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है जहाँ युवाओं की संख्या बड़ी है। ऐसे में रोजगार सृजन राज्य की प्राथमिक आवश्यकता है। इस दिशा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public–Private Partnership: PPP) मॉडल राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: PPP मॉडल से सड़कों, औद्योगिक गलियारों, हवाईअड्डों और लॉजिस्टिक्स पार्कों का निर्माण हुआ, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित हुए।
  • शिक्षा एवं कौशल विकास: निजी क्षेत्र के सहयोग से कौशल विश्वविद्यालयों और ITI संस्थानों की स्थापना हुई।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में PPP: निजी अस्पतालों के साथ करार से चिकित्सा सेवाएँ विस्तारित हुईं, जिससे मेडिकल स्टाफ को रोजगार मिला।
  • औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) जैसी पहलों से MSME क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ा।
  • डिजिटल और स्टार्टअप इकोसिस्टम: PPP मॉडल के तहत आईटी पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
  • पर्यटन विकास: PPP के माध्यम से धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार।
  • कृषि मूल्य श्रृंखला: निजी निवेश से कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयाँ और एग्री-बिजनेस को बल मिला।

सशक्तिकरण हेतु सुझाव (Suggestions):

PPP परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।

स्किल इंडिया जैसी योजनाओं को निजी उद्योगों से सीधे जोड़ा जाए।

नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को सरकारी वित्तीय सहायता दी जाए।

निष्कर्ष (Conclusion): सार्वजनिक-निजी भागीदारी रोजगार सृजन का सशक्त उपकरण है। यदि इसे कौशल विकास और उद्योग विस्तार से जोड़ा जाए, तो उत्तर प्रदेश युवाओं के लिए अवसरों का केन्द्र बन सकता है।

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