What is the role of self help groups in rural development? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2
ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की क्या भूमिका है ?
Ans: परिचय:
स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं और गरीब वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम हैं। ये छोटे समूह आत्मनिर्भरता, सहयोग और वित्तीय समावेशन की भावना को बढ़ावा देते हैं। ग्रामीण विकास की नीतियों में इनकी भूमिका अब अत्यंत केंद्रीय हो गई है।
मुख्य बिंदु:
- SHGs के माध्यम से गरीब महिलाएँ सामूहिक बचत और ऋण सुविधा प्राप्त करती हैं।
- ये स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देते हैं।
- ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक सशक्तिकरण बढ़ता है।
- बैंकिंग प्रणाली से जुड़कर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलता है।
- स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत SHGs को संस्थागत समर्थन मिला है।
- सामुदायिक निर्णयों में भागीदारी से स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है।
निष्कर्ष:
स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी है। ये न केवल गरीबी घटाते हैं, बल्कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाते हैं।
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