Governance, Schemes and Welfare

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Analyse the importance of minerals in industrial development of Bundelkhand region of Uttar Pradesh.[Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के औद्योगिक विकास में खनिजों के महत्व का विश्लेषण करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र (झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर आदि) खनिज संपदाओं से समृद्ध है। यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ पाए जाने वाले खनिज अनेक उद्योगों की आधारशिला हैं। खनिज संसाधनों ने इस क्षेत्र में रोजगार, निवेश और आधारभूत संरचना के विकास को गति दी है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • ग्रेनाइट, बालू पत्थर और डोलोमाइट बुन्देलखण्ड के प्रमुख खनिज हैं, जिनका उपयोग निर्माण और सजावटी उद्योगों में होता है।
  • महोबा का ग्रेनाइट अपनी गुणवत्ता और चमक के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रसिद्ध है।
  • लाइमस्टोन (चूना पत्थर) से सीमेंट उद्योग को कच्चा माल प्राप्त होता है, जिससे क्षेत्र में सीमेंट उद्योग विकसित हुआ है।
  • फॉस्फोराइट और क्वार्ट्जाइट जैसे खनिजों से रासायनिक और ग्लास उद्योगों को बल मिला है।
  • बांदा और चित्रकूट में पाए जाने वाले बालू पत्थर (Sandstone) से भवन निर्माण और मूर्तिकला उद्योग को प्रोत्साहन मिला।
  • खनिज आधारित लघु उद्योगों (Stone cutting, polishing, tiles manufacturing) का विकास तेजी से हुआ है।
  • खनन गतिविधियों से स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
  • सड़क और परिवहन अवसंरचना में सुधार हुआ है ताकि खनिजों का परिवहन सुचारू रूप से हो सके।
  • खनिज निर्यात से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह और औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिला।
  • खनिज नीति और पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था ने निजी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया।
  • खनन से पर्यावरणीय चुनौतियाँ जैसे भू-क्षरण और जल स्रोतों पर दबाव भी उत्पन्न हुए हैं, जिनके लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
  • भविष्य की संभावना: खनिज-आधारित औद्योगिक क्लस्टर और प्रोसेसिंग यूनिट्स से बुन्देलखण्ड को औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

बुन्देलखण्ड के खनिज न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के प्रमुख प्रेरक तत्व हैं। संतुलित खनन और पर्यावरणीय संरक्षण के साथ यह क्षेत्र राज्य के सतत औद्योगिक विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

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Critically analyse the current initiatives and future prospects for bio-energy development in Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश में जैव-ऊर्जा विकास के लिए वर्तमान पहलों और भविष्य की संभावनाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

जैव-ऊर्जा (Bio-Energy) एक नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत है, जो कृषि अपशिष्ट, गोबर और जैविक पदार्थों से प्राप्त होती है। उत्तर प्रदेश, जो कृषि प्रधान राज्य है, जैव-ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में उभर रहा है। राज्य सरकार ने इस क्षेत्र को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास से जोड़ने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • उत्तर प्रदेश जैव-ऊर्जा नीति 2022 लागू की गई, जिसका उद्देश्य जैव-गैस, बायो-सीएनजी और एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
  • कृषि अपशिष्ट एवं गोबर आधारित संयंत्रों की स्थापना हेतु निवेशकों को भूमि, कर रियायतें और पूंजी अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
  • एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है — गन्ना मोलासेस और मक्का आधारित इकाइयों को प्रोत्साहन।
  • बायो-सीएनजी संयंत्रों की स्थापना लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और गाजियाबाद जैसे नगरों में की जा रही है।
  • कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित किया जा रहा है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा निवेश नीति के तहत विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऑनलाइन सिंगल-विंडो सिस्टम लागू।
  • स्वच्छ भारत मिशन और गोबर-धन योजना के तहत ग्राम स्तर पर छोटे बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
  • किसानों को जैव-ऊर्जा फसलों जैसे गन्ना, मक्का और जट्रोफा की खेती के लिए प्रोत्साहन।
  • राज्य ऊर्जा विकास एजेंसी (UPNEDA) जैव-ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।
  • शहरों के ठोस अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन हेतु “वेस्ट टू एनर्जी” परियोजनाओं को बढ़ावा।
  • भविष्य की रणनीति में 2030 तक 1000 मेगावाट जैव-ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।
  • चुनौतियाँ – तकनीकी लागत अधिक, अपशिष्ट संग्रहण की समस्या और निवेशकों के लिए व्यवहारिक कठिनाइयाँ अभी बनी हुई हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

जैव-ऊर्जा विकास से उत्तर प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता के लिए तकनीकी नवाचार, वित्तीय समर्थन और ठोस नीति क्रियान्वयन आवश्यक हैं।

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What are the key initiatives and strategies undertaken by the Government of Uttar Pradesh to promote social-forestry in the State? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

राज्य में सामाजिक-वानिकी को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहल और रणनीतियाँ क्या हैं?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सामाजिक-वानिकी (Social Forestry) का उद्देश्य वनों के बाहर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और ग्रामीण समुदायों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में सामाजिक-वानिकी को जन आंदोलन का रूप देने के लिए कई नवाचारी पहलें की हैं। इन पहलों का लक्ष्य हरित आवरण (Green Cover) बढ़ाना, जलवायु संतुलन बनाए रखना और ग्रामीण आय में वृद्धि करना है।

मुख्य बिंदु:

  • वन महोत्सव कार्यक्रम के तहत हर वर्ष करोड़ों पौधों का सामूहिक रोपण अभियान चलाया जाता है।
  • ‘एक पेड़ – मातृभूमि के नाम’ अभियान से आम जनता को वृक्षारोपण से जोड़ने की पहल।
  • नदी, तालाब और नहर किनारों पर सामाजिक-वानिकी योजना के अंतर्गत पौधारोपण को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री हरित भारत मिशन व राष्ट्रीय हरित आवरण योजना से समन्वय स्थापित किया गया।
  • पंचायती भूमि, स्कूल और ग्राम समाज की भूमि पर पौधरोपण को संस्थागत रूप से बढ़ावा।
  • ‘मिशन वृक्षारोपण 2023’ के तहत 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया।
  • कृषि वानिकी (Agro-Forestry) को प्रोत्साहित करने हेतु किसानों को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण।
  • औषधीय एवं फलदार पौधों के रोपण से पर्यावरण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया गया।
  • कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत निजी क्षेत्र को वृक्षारोपण से जोड़ा गया।
  • नर्सरी विकास कार्यक्रमों के माध्यम से पौधों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
  • डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से लगाए गए पौधों के सर्वेक्षण और निगरानी की व्यवस्था।
  • ‘हर घर पौधा’ अभियान के जरिये नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से हरियाली अभियान से जोड़ने की रणनीति।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की सामाजिक-वानिकी पहलें पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास दोनों को साथ लेकर चल रही हैं। इन रणनीतियों से राज्य में हरित आवरण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ किया जा रहा है।

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What recent initiatives has the Government of Uttar Pradesh undertaken to attract investment in the State? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए हाल ही में क्या पहल की हैं?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को निवेश-अनुकूल गंतव्य (Investment-friendly destination) बनाने के लिए हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। सरकार का उद्देश्य औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि के माध्यम से राज्य को ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ के लक्ष्य तक पहुँचाना है। इन पहलों ने उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थान दिलाया है।

मुख्य बिंदु:

  • ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का आयोजन, जिसमें ₹35 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
  • इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) एजेंसी की स्थापना, जो निवेशकों को “सिंगल विंडो क्लियरेंस” सुविधा प्रदान करती है।
  • नई औद्योगिक नीति 2022 के अंतर्गत कर रियायतें, भूमि बैंक और बुनियादी ढाँचे का विकास सुनिश्चित किया गया।
  • डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के माध्यम से विनिर्माण और रक्षा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन।
  • लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग नीति 2022 के तहत परिवहन एवं भंडारण ढाँचे को सुदृढ़ किया गया।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति से मोबाइल और सेमीकंडक्टर उद्योगों में निवेश आकर्षित हुआ।
  • टेक्सटाइल और एमएसएमई नीति के तहत उद्यमियों को आसान ऋण और सब्सिडी सुविधा दी गई।
  • ओडीओपी (One District One Product) योजना से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँच मिली।
  • गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य मेगा परियोजनाओं से औद्योगिक कॉरिडोरों तक कनेक्टिविटी बढ़ी।
  • विदेशी निवेश (FDI) प्रोत्साहन नीति के तहत जापान, सिंगापुर, कोरिया आदि देशों के साथ समझौते हुए।
  • स्टार्टअप नीति 2022 के माध्यम से नवाचार और युवा उद्यमिता को प्रोत्साहित किया गया।
  • ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (EoDB) में सुधार हेतु ऑनलाइन अनुमोदन और पारदर्शी नियम लागू किए गए।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश सरकार की ये पहलें राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर अग्रणी बना रही हैं। इन प्रयासों से न केवल औद्योगिक विकास बल्कि व्यापक रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित हो रहा है।

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What are the major guidelines of Uttar Pradesh Government with reference to Plastic Waste Management? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-6

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख दिशानिर्देश क्या हैं?

  1. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख दिशानिर्देश क्या हैं ?                                                              8

Ans: भूमिका (Introduction):

प्लास्टिक अपशिष्ट (Plastic Waste) आज पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। इसे नियंत्रित करने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं। इनका उद्देश्य प्लास्टिक उपयोग में कमी, पुनर्चक्रण को प्रोत्साहन और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।

मुख्य बिंदु (7 Important Points):

  • सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (Single-use Plastic) के निर्माण, वितरण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
  • स्थानीय निकायों को अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रहण और निपटान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR – Extended Producer Responsibility) के तहत निर्माता अपने उत्पादों के अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उत्तरदायी हैं।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रह केंद्र (Collection Centres) और रिसाइक्लिंग यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा दिया गया है।
  • सड़क निर्माण में रीसायकल्ड प्लास्टिक के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • जनजागरूकता अभियान के माध्यम से नागरिकों को प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
  • उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के इन दिशानिर्देशों ने उत्तर प्रदेश को स्वच्छ और टिकाऊ विकास की दिशा में अग्रसर किया है। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य को जल्द ही सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सके।

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What are the main features of the Uttar Pradesh Millets Revival Programme? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

Ans: भूमिका (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलेट्स (श्री अन्न) पुनरुद्धार कार्यक्रम शुरू किया है ताकि पारंपरिक अनाजों को पुनः लोकप्रिय बनाया जा सके। इसका उद्देश्य पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम “श्री अन्न अभियान” के रूप में राज्य में व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु (7 Important Points):

  • कार्यक्रम के तहत ज्वार, बाजरा, कोदो, सांवा, कुटकी, चेना जैसे मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  • बुंदेलखंड, विंध्यांचल और पूर्वांचल क्षेत्रों को मिलेट उत्पादन के प्रमुख ज़ोन के रूप में विकसित किया गया है।
  • किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता दी जा रही है।
  • मिलेट्स को मिड-डे मील (MDM) और आंगनवाड़ी पोषण कार्यक्रमों में शामिल किया गया है।
  • उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन के लिए एफपीओ (Farmer Producer Organizations) की भूमिका बढ़ाई गई है।
  • राज्य में मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट्स और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की जा रही है।
  • इस कार्यक्रम से स्वस्थ आहार संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मज़बूती मिली है।

निष्कर्ष (Conclusion):

मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम ने उत्तर प्रदेश में पोषण और कृषि स्थिरता दोनों को बढ़ावा दिया है। यह पहल किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण — तीनों के लिए लाभकारी परिवर्तन का प्रतीक बनी है।

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What are the major benefits of the Poorvanchal Expressway Project? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-6

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना के प्रमुख लाभ क्या हैं?

Ans:  भूमिका (Introduction):

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना है। यह लगभग 341 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे लखनऊ से गाजीपुर तक निर्मित किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक विकास को तेज़ी देना है।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • एक्सप्रेसवे ने लखनऊ, सुल्तानपुर, अमेठी, आज़मगढ़ और गाजीपुर जैसे जिलों को सीधे जोड़ा है।
  • इससे यातायात समय में कमी और परिवहन लागत में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
  • परियोजना ने क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए हैं।
  • एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक पार्क और टाउनशिप विकसित की जा रही हैं।
  • यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल को राष्ट्रीय राजमार्गों और दिल्ली-वाराणसी मार्ग से जोड़ता है।
  • परियोजना से कृषि उत्पादों के विपणन और निर्यात को भी बढ़ावा मिला है।
  • आपात स्थिति में भारतीय वायुसेना द्वारा उपयोग के लिए इस पर एयर स्ट्रिप (Runway) भी बनाई गई है।

निष्कर्ष (Conclusion):

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने उत्तर प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों में विकास की नई राहें खोली हैं। यह परियोजना प्रदेश को औद्योगिक, कृषि और पर्यटन दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है।

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What are the major schemes for Empowerment and Welfare of Divyaangjan in Uttar Pradesh? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनके कल्याण के लिए प्रमुख योजनाएं क्या हैं?

Ans: भूमिका (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन के लिए अनेक योजनाएँ चला रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के अवसर प्रदान करना है। सरकार का लक्ष्य “समान अवसर, समान अधिकार और समान भागीदारी” सुनिश्चित करना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • दिव्यांग पेंशन योजना – पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र – कौशल विकास, रोजगार प्रशिक्षण और परामर्श सेवाएँ दी जाती हैं।
  • सुगम्य भारत अभियान के तहत सरकारी भवनों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को सुलभ (Accessible) बनाया जा रहा है।
  • सहायक उपकरण वितरण योजना – श्रवण यंत्र, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग आदि निःशुल्क वितरित किए जाते हैं।
  • शिक्षा प्रोत्साहन योजना – दिव्यांग विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और निःशुल्क शिक्षा सुविधाएँ दी जाती हैं।
  • रोजगार प्रोत्साहन योजना – सरकारी सेवाओं और निजी क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण और प्रशिक्षण की व्यवस्था है।
  • मिशन दिव्य शक्ति – समाज में दिव्यांगजनों की मुख्यधारा में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु नवीन पहल है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इन योजनाओं ने उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक सशक्तिकरण को बल दिया है।राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है कि कोई भी नागरिक अपनी दिव्यांगता के कारण वंचित न रहे।

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What is the Skill Development Scheme under One District One Product Programme of the Government of Uttar Pradesh? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास योजना क्या है?

Ans: भूमिका (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार का ‘एक जिला एक उत्पाद (One District One Product – ODOP)’ कार्यक्रम प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास योजना का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों की दक्षता बढ़ाना है। यह पहल रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता और उत्पाद गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • कौशल विकास योजना के तहत स्थानीय युवाओं और कारीगरों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाता है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) और पॉलिटेक्निक संस्थानों के सहयोग से आयोजित किए जाते हैं।
  • प्रतिभागियों को डिज़ाइन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की विशेष जानकारी दी जाती है।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (NSDM) और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) के साथ समन्वय किया गया है।
  • प्रशिक्षण के बाद वित्तीय सहायता और बैंक लोन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
  • इससे उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात क्षमता में वृद्धि हुई है।
  • यह योजना स्थानीय परंपरा को संरक्षित करते हुए आधुनिक उद्योगों से सामंजस्य स्थापित करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

ODOP कार्यक्रम की कौशल विकास योजना ने उत्तर प्रदेश के कारीगरों को स्थानीय से वैश्विक मंच तक पहुँचाने में मदद की है। इससे राज्य में रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।

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Throw light on the concept of smart village in India and describe the main features of smart village. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

भारत में स्मार्ट ग्राम की अवधारणा पर प्रकाश डालिए तथा स्मार्ट ग्राम की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारत में स्मार्ट सिटी (Smart City) की अवधारणा आधुनिक तकनीक, सुशासन और सतत विकास पर आधारित है। इसका उद्देश्य शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक, स्वच्छ, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। इसी सोच का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्मार्ट ग्राम (Smart Village) के रूप में किया गया है, ताकि विकास का लाभ गाँवों तक पहुँचे।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • स्मार्ट सिटी की अवधारणा:
  • आरम्भ: 2015 में भारत सरकार ने Smart Cities Mission की शुरुआत की।
  • उद्देश्य: आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
  • ई-गवर्नेंस: डिजिटल तकनीक से पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन।
  • स्मार्ट ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट: सेंसर आधारित ट्रैफिक प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन का डिजिटलीकरण।
  • सतत ऊर्जा उपयोग: सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और हरित भवनों का प्रोत्साहन।
  • कचरा प्रबंधन और स्वच्छता: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था।
  • स्मार्ट ग्राम की प्रमुख विशेषताएँ:
  • डिजिटल कनेक्टिविटी: इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं से जुड़ा सशक्त ग्रामीण नेटवर्क।
  • ई-शिक्षा और ई-स्वास्थ्य: ऑनलाइन शिक्षा और टेलीमेडिसिन सेवाओं की सुविधा।
  • सौर ऊर्जा और हरित तकनीक: पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों का उपयोग।
  • स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता: सुरक्षित जल और शौचालय की सार्वभौमिक उपलब्धता।
  • सामुदायिक सहभागिता: ग्राम स्तर पर निर्णय-निर्माण में जनता की सक्रिय भागीदारी।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: कृषि में तकनीकी सुधार, लघु उद्योगों और डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्मार्ट सिटी और स्मार्ट ग्राम की अवधारणा भारत को समावेशी और तकनीकी रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में कदम है। जब शहरों और गाँवों दोनों में समान रूप से आधुनिक सुविधाएँ विकसित होंगी, तभी समग्र विकास और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य पूरा होगा।

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