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Analyse the problems related to Non-Governmental Organisations (NGOs) in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में गैर-सरकारी संगठनों से संबंधित समस्याओं का विश्लेषण कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction)

 ग़ैर-सरकारी संगठन (NGOs) उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परंतु इनके संचालन में कई व्यावहारिक और नीतिगत चुनौतियाँ सामने आती हैं, जो इनके प्रभाव को सीमित करती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से जनता का विश्वास कमजोर होता है।
  • कई एनजीओ केवल धन प्राप्ति के उद्देश्य से संचालित होते हैं।
  • सरकारी पंजीकरण और विनियमन प्रक्रिया जटिल और धीमी है।
  • वित्तीय संसाधनों की कमी और अनियमित फंडिंग से कार्य रुक जाते हैं।
  • राजनीतिक और नौकरशाही हस्तक्षेप इनकी स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी कार्यकुशलता घटाती है।
  • समान कार्य करने वाले संगठनों में समन्वय की कमी से दोहराव और अपव्यय होता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – यदि पारदर्शिता, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग में सुधार किया जाए, तो एनजीओ राज्य के विकास में सशक्त भागीदार बन सकते हैं। प्रभावी निगरानी और समन्वय से इनकी कार्यक्षमता और सामाजिक योगदान बढ़ाया जा सकता है।

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Critically explain the efforts of the State Government towards strengthening the health infrastructure in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

 उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढाँचा लंबे समय से असमान वितरण और संसाधनों की कमी से जूझता रहा है। राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। फिर भी, इन प्रयासों की प्रभावशीलता मिश्रित परिणाम दिखाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • मुख्यमंत्री आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा दी गई।
  • ई–संजय और टेलीमेडिसिन जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहलें ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ा रही हैं।
  • जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध कर विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार किया गया।
  • मिशन शक्ति और जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से मातृ–शिशु स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • कोविड–19 के दौरान ऑक्सीजन संयंत्र और ICU बेड जैसी संरचनाएँ विकसित की गईं।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी अभी भी प्रमुख चुनौती है।
  • स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी के बावजूद व्यवस्थापन और निगरानी की कमी बनी हुई है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के संकेत मिलते हैं, परन्तु गुणवत्ता, मानव संसाधन और ग्रामीण पहुँच में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। सतत निवेश और पारदर्शी प्रबंधन ही स्वास्थ्य ढाँचे को सशक्त बना सकते हैं।

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