Governance, Schemes and Welfare

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Explain the contribution of woman’s organisation in the development of Indian rural society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

भारतीय ग्रामीण समाज के विकास में महिला संगठनों के योगदान का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारतीय ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका पारंपरिक रूप से सीमित रही, परंतु महिला संगठनों (Women Organizations) ने इस स्थिति में परिवर्तन लाने का कार्य किया। इन संगठनों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्य बिंदु:

  • स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups – SHGs): ग्रामीण महिलाओं को लघु ऋण और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान किए।
  • राष्ट्रीय महिला कोष (Rashtriya Mahila Kosh): महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर आजीविका बढ़ाने में सहयोग किया।
  • सेल्फ एम्प्लॉयड वूमेन्स एसोसिएशन (SEWA): असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को संगठित कर आर्थिक सशक्तिकरण किया।
  • महिला मंडल और एनजीओ: स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
  • सरकारी योजनाएँ: महिला समाख्या, डी.डब्ल्यू.सी.आर.ए. जैसी योजनाओं ने सहभागिता को बढ़ावा दिया।
  • पंचायती राज में भागीदारी: 33% आरक्षण से ग्रामीण शासन में महिलाओं की भूमिका सशक्त हुई।
  • सामाजिक परिवर्तन: महिला संगठनों ने बाल विवाह, दहेज और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाए।

उपसंहार:

महिला संगठनों ने ग्रामीण समाज में नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार किया। इनके प्रयासों से ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण सामाजिक विकास का आधार बन गया है।

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Discuss the impacts of Globalisation on Indian Society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

भारतीय समाज पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

वैश्वीकरण (Globalization) का अर्थ है — विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण (Liberalization) के बाद भारत में वैश्वीकरण ने तीव्र गति से प्रभाव डाला। इसने भारतीय समाज के अनेक आयामों को परिवर्तित किया।

मुख्य प्रभाव:

  • आर्थिक प्रभाव: रोजगार के नए अवसर बढ़े, परंतु असमानता भी बढ़ी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: पश्चिमी जीवनशैली, पहनावा और उपभोक्तावाद का प्रसार हुआ।
  • शैक्षिक प्रभाव: तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार हुआ।
  • संचार क्रांति: इंटरनेट और मोबाइल ने सामाजिक जुड़ाव और जानकारी का प्रसार बढ़ाया।
  • महिलाओं की स्थिति: शिक्षा और रोजगार में अवसर बढ़े, परंतु सांस्कृतिक द्वंद्व भी उभरा।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: औद्योगिकीकरण और उपभोग ने पर्यावरणीय संकट बढ़ाया।
  • परिवार संरचना: संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों का चलन बढ़ा।

उपसंहार:

वैश्वीकरण ने भारतीय समाज को आधुनिक और विश्व से जुड़ा बनाया, परंतु इसके साथ सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं। अतः आवश्यक है कि भारत अपने मूल मूल्यों को बनाए रखते हुए वैश्वीकरण का संतुलित उपयोग करे।

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What challenges is the Government facing in the implementing of welfare schemes for the most vulnerable sections? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सरकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है ?

Ans: परिचय (Introduction):

भारत में सरकार द्वारा अति संवेदनशील वर्गों (Vulnerable Sections) — जैसे निर्धन, अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग व वृद्धजन — के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को साकार करना है। किन्तु इनके प्रभावी क्रियान्वयन में सरकार को अनेक संरचनात्मक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • लाभार्थियों की सटीक पहचान (Identification of beneficiaries) में कठिनाई बनी रहती है।
  • योजनाओं का क्रियान्वयन कई विभागों में बिखरा होने से समन्वय की कमी होती है।
  • भ्रष्टाचार, दलाली व लीकेज (Leakage) से वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ नहीं पहुँचता।
  • आधार, बैंक खाता व डिजिटल साक्षरता की कमी से कई लोग योजनाओं से वंचित रहते हैं।
  • ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में अवसंरचना (Infrastructure) की कमी वितरण को बाधित करती है।
  • लाभार्थियों में योजना की जानकारी व जागरूकता का अभाव है।
  • योजनाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप पारदर्शिता को प्रभावित करता है।
  • निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली (Monitoring & Evaluation) पर्याप्त प्रभावी नहीं है।
  • डेटा प्रबंधन और वास्तविक समय पर ट्रैकिंग की सीमाएँ हैं।
  • सामाजिक भेदभाव और जातीय पूर्वाग्रह योजनाओं के निष्पक्ष क्रियान्वयन में बाधक बनते हैं।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय का अभाव संसाधनों के अपव्यय को बढ़ाता है।
  • बजटीय सीमाएँ और विलंबित फंड रिलीज़ भी बड़ी चुनौती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकार को योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सामाजिक भागीदारी को सशक्त करना होगा। केवल यही उपाय अति संवेदनशील वर्गों को सच्चे अर्थों में विकास की मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं।

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Examine the role of civil society in Indian administrative development. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

भारतीय प्रशासनिक विकास में नागरिक समाज की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

Ans: परिचय:

नागरिक समाज (Civil Society) सरकार और जनता के बीच सेतु का कार्य करता है। इसमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs), मीडिया, सामाजिक समूह और जागरूक नागरिक शामिल होते हैं। यह प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने में सहायक है।

मुख्य बिंदु (7 बुलेट्स):

  • नागरिक समाज नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाता है।
  • जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से सामाजिक सुधार को प्रोत्साहित करता है।
  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध निगरानी रखकर प्रशासन में पारदर्शिता लाता है।
  • सूचना का अधिकार (RTI) जैसे कानूनों के प्रभावी उपयोग से जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
  • गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता जैसे क्षेत्रों में सरकारी प्रयासों को सहयोग देता है।
  • प्रशासन और जनता के बीच संवाद एवं सहभागिता को मजबूत करता है।
  • आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में साझेदार की भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष:

नागरिक समाज ने भारतीय प्रशासन को अधिक उत्तरदायी और लोकतांत्रिक बनाया है। इसकी सक्रिय भागीदारी सुशासन और जनकल्याण की दिशा में एक मजबूत आधार प्रस्तुत करती है।

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What is the role of self help groups in rural development? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय:

स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं और गरीब वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम हैं। ये छोटे समूह आत्मनिर्भरता, सहयोग और वित्तीय समावेशन की भावना को बढ़ावा देते हैं। ग्रामीण विकास की नीतियों में इनकी भूमिका अब अत्यंत केंद्रीय हो गई है।

मुख्य बिंदु:

  • SHGs के माध्यम से गरीब महिलाएँ सामूहिक बचत और ऋण सुविधा प्राप्त करती हैं।
  • ये स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देते हैं।
  • ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक सशक्तिकरण बढ़ता है।
  • बैंकिंग प्रणाली से जुड़कर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत SHGs को संस्थागत समर्थन मिला है।
  • सामुदायिक निर्णयों में भागीदारी से स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है।

निष्कर्ष:

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी है। ये न केवल गरीबी घटाते हैं, बल्कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाते हैं।

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Review the contribution of the public distribution system in poverty alleviation. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

गरीबी उन्मूलन हेतु सार्वजनिक वितरण प्रणाली के योगदान की समीक्षा कीजिए।

Ans: परिचय:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत में गरीबों को सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की एक प्रमुख योजना है। यह खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय दोनों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य भूखमरी को समाप्त करना और जीवन स्तर में सुधार लाना है।

मुख्य बिंदु:

  • PDS के माध्यम से गेहूँ, चावल, चीनी व केरोसिन जैसी आवश्यक वस्तुएँ रियायती दरों पर दी जाती हैं।
  • यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत कानूनी अधिकार के रूप में लागू है।
  • गरीबों की क्रय शक्ति बढ़ाकर आर्थिक असमानता को घटाती है।
  • ग्रामीण व शहरी गरीबों को न्यूनतम जीवन आवश्यकताएँ सुनिश्चित करती है।
  • Targeted PDS (TPDS) द्वारा कमजोर वर्गों को विशेष प्राथमिकता दी गई।
  • मध्याह्न भोजन योजना और अन्त्योदय अन्न योजना जैसी योजनाएँ PDS से जुड़ी हैं।
  • वितरण प्रणाली में ई-राशन कार्ड और डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी है।

निष्कर्ष:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर गरीबी उन्मूलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि इसे और पारदर्शी व कुशल बनाया जाए, तो यह सामाजिक न्याय का सशक्त उपकरण बन सकती है।

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Write the role of NITI Aayog in the development of India. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

भारत के विकास में नीति आयोग की भूमिका लिखिए।

Ans: परिचय:

नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई। इसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। यह देश के समग्र और संतुलित विकास के लिए नीति निर्माण की दिशा तय करता है।

मुख्य बिंदु:

  • नीति आयोग थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है, जो सरकार को नीतिगत सलाह देता है।
  • यह राज्यों की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनाने में सहयोग करता है।
  • सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करता है।
  • दीर्घकालिक विकास हेतु सतत विकास लक्ष्य (SDGs) को अपनाया गया है।
  • आयोग नीति निर्माण में डेटा विश्लेषण और नवाचार को प्राथमिकता देता है।
  • आयुष्मान भारत, अटल इनोवेशन मिशन जैसी योजनाओं की निगरानी करता है।
  • आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन आधारित विकास को दिशा देता है।

निष्कर्ष:

नीति आयोग ने योजना आधारित अर्थव्यवस्था को नीति-आधारित विकास मॉडल में परिवर्तित किया। यह भारत को नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की ओर अग्रसर कर रहा है।

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Assess the role of States and Central Government in developing irrigation infrastructure in India. How has Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (P.M.K.S.Y.) helped in improving irrigation access across the country? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

भारत में सिंचाई के बुनियादी ढाँचे के विकास में राज्यों और केन्द्र सरकार की भूमिका का आकलन करें । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पी. एम. के. एस. वाई.) देश भर में सिंचाई की पहुँच को बेहतर बनाने में कैसे मदद की है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत मुख्यतः कृषि प्रधान देश है, जहाँ सिंचाई (Irrigation) कृषि उत्पादन की रीढ़ मानी जाती है। सिंचाई के बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के विकास में केन्द्र और राज्य सरकार दोनों की भूमिकाएँ परस्पर पूरक हैं। इन दोनों के समन्वय से ही जल संसाधनों का न्यायपूर्ण एवं कुशल उपयोग संभव है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • जल संसाधन एक राज्य विषय (State Subject) है, परन्तु बड़े और अन्तरराज्यीय परियोजनाओं के लिए केन्द्र की भूमिका निर्णायक होती है।
  • केन्द्र सरकार जल नीति, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।
  • राज्य सरकारें सिंचाई परियोजनाओं का क्रियान्वयन, रखरखाव और जल वितरण करती हैं।
  • केन्द्रीय जल आयोग (CWC) और जल शक्ति मंत्रालय नीतिगत दिशा और समन्वय सुनिश्चित करते हैं।
  • बड़ी बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जैसे – भाखड़ा-नांगल, सरदार सरोवर, और टिहरी बाँध – केन्द्र-राज्य साझेदारी के उदाहरण हैं।
  • लघु सिंचाई योजनाएँ (Minor Irrigation Projects) जैसे ट्यूबवेल, तालाब, चेक डैम आदि राज्यों के अधीन हैं।
  • वित्त आयोगों द्वारा राज्यों को जल संसाधन विकास हेतु अनुदान दिया जाता है।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2015 में शुरू की गई, जिसका उद्देश्य “हर खेत को पानी” पहुँचाना है।
  • यह योजना चार घटकों पर आधारित है – परंपरागत जल स्रोतों का पुनरुद्धार, सूक्ष्म सिंचाई (Drip/Sprinkler) को बढ़ावा, जल संरक्षण और खेत-स्तरीय सिंचाई विस्तार।
  • योजना से जल उपयोग दक्षता में सुधार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादकता वृद्धि, और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
  • PMKSY के अंतर्गत “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान ने पानी की बचत के साथ फसल उत्पादन को प्रोत्साहन दिया।
  • केन्द्र–राज्य साझा वित्तपोषण (60:40) ने योजना को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहुँच दिलाई।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि भारत में सिंचाई अवसंरचना के विकास में केन्द्र और राज्य दोनों की भूमिकाएँ समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ने इस सहयोग को संस्थागत रूप देकर जल प्रबंधन और कृषि विकास में नई ऊर्जा प्रदान की है।

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Budgets are half used if they serve only as planning device”. Critically examine this statement. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

“बजट का आधा उपयोग हो पाता है यदि उन्हें केवल नियोजन के उपकरण के रूप में ही प्रयोग किया जाये |” इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये । “

Ans: भूमिका (Introduction) –

बजट किसी भी सरकार का वार्षिक वित्तीय वक्तव्य है, जो देश की आय और व्यय का अनुमान प्रस्तुत करता है। इसे सामान्यतः नियोजन (Planning) का एक उपकरण माना जाता है, परंतु यदि इसे केवल नियोजन तक सीमित कर दिया जाए, तो इसके व्यापक उद्देश्यों की प्राप्ति अधूरी रह जाती है। यह कथन इसी सीमित दृष्टिकोण की आलोचना प्रस्तुत करता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बजट का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी है।
  • नियोजन के स्तर पर बजट मात्र अनुमान प्रस्तुत करता है; वास्तविक सफलता उसके कार्यान्वयन में निहित होती है।
  • यदि बजट को केवल योजनाबद्ध व्यय तक सीमित कर दिया जाए, तो संसाधनों का दुरुपयोग और अपव्यय बढ़ सकता है।
  • सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन जैसे उद्देश्यों की प्राप्ति तभी संभव है जब बजट परिणामोन्मुख (Outcome-oriented) हो।
  • कई बार योजनाओं के लिए निधि आवंटित होती है, परंतु निगरानी तंत्र की कमी से खर्च अधूरा रह जाता है।
  • भारत में कई मंत्रालय अपने आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं कर पाते, जिससे योजनाओं का प्रभाव घट जाता है।
  • नीति आयोग ने “परिणाम आधारित बजटिंग” (Outcome Budgeting) की संकल्पना इसी समस्या के समाधान हेतु दी है।
  • जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना बजट अपने लक्ष्य से भटक सकता है।
  • प्रभावी ऑडिट, समयबद्ध मूल्यांकन और वित्तीय अनुशासन इसकी उपयोगिता बढ़ाते हैं।
  • बजट को नियोजन के साथ-साथ नीति निर्माण, नियंत्रण और जनकल्याण का माध्यम बनाना आवश्यक है।
  • केवल नियोजन पर केंद्रित बजट “आर्थिक दृष्टि” से अधूरा और “विकास दृष्टि” से कमजोर बन जाता है।
  • इसलिए बजट को एक गतिशील उपकरण के रूप में प्रयोग करना चाहिए, जो लक्ष्य निर्धारण से लेकर परिणाम मूल्यांकन तक सक्रिय भूमिका निभाए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः यह सत्य है कि यदि बजट को केवल नियोजन का उपकरण माना जाए, तो उसकी उपयोगिता आधी रह जाती है। वास्तविक अर्थों में बजट तभी प्रभावी है, जब वह विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को समान रूप से सुनिश्चित करे।

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Does inclusive growth ensure social justice? Discuss. What steps have been taken by the Government of India for bringing inclusive growth with social justice? Elucidate your answer. [ Marks-12 ] UPPCS Mains 2024 GS-3

क्या समावेशी विकास, सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करता है ? विवेचना कीजिये । भारत सरकार द्वारा सामाजिक न्याय के साथ समावेशी विकास लाने हेतु क्या कदम उठाये गये हैं ? अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

समावेशी विकास (Inclusive Development) का अर्थ है ऐसा आर्थिक विकास जिसमें समाज के सभी वर्ग—गरीब, वंचित, महिलाएँ, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक—समान रूप से सहभागी हों। इसका उद्देश्य केवल GDP वृद्धि नहीं बल्कि समान अवसरों के माध्यम से सामाजिक न्याय (Social Justice) सुनिश्चित करना है। भारत में यह नीति सामाजिक समानता, अवसर की समानता और क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • समावेशी विकास सामाजिक न्याय का व्यावहारिक रूप है, जो समाज में असमानताओं को घटाता है।
  • यह विकास के लाभों को सभी वर्गों तक पहुँचाने पर बल देता है।
  • गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार सृजन इसकी प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास में समान पहुँच सामाजिक न्याय की नींव बनती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों से क्षेत्रीय असमानता कम होती है।
  • महिला सशक्तिकरण योजनाएँ (जैसे – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्ट्रीट वेंडर योजना) लैंगिक न्याय सुनिश्चित करती हैं।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण व उद्यमिता योजनाएँ अवसर समानता को बढ़ाती हैं।
  • अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाएँ (जैसे – नई मंज़िल, नई रोशनी) समावेशी नीति का हिस्सा हैं।
  • मनरेगा (MGNREGA) ग्रामीण रोजगार व सामाजिक सुरक्षा का उदाहरण है।
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना व आधार-DBT प्रणाली आर्थिक समावेशन को सुदृढ़ करती है।
  • शिक्षा का अधिकार व स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाती हैं।
  • नीति आयोग द्वारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की नीति समावेशी विकास की दिशा को पुष्ट करती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि समावेशी विकास, सामाजिक न्याय की प्राप्ति का प्रभावी साधन है। भारत सरकार की नीतियाँ यदि प्रभावी रूप से लागू हों, तो आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समानता भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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