What are the implications of the revised appointment process of Election Commission for ensuring its independence? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2
चुनाव आयोग की स्वतन्त्रता सुनिश्चित करने के लिए उसकी संशोधित नियुक्ति प्रक्रिया के निहितार्थ क्या हैं ?
Ans: परिचय (Introduction):
भारत में चुनाव आयोग (Election Commission of India) लोकतंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता का प्रमुख आधार है। इसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत आवश्यक है। हाल ही में आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन किए गए हैं, जिनके गहरे निहितार्थ लोकतांत्रिक संतुलन पर पड़े हैं।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- पूर्व में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती थी।
- सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 में स्वतंत्र चयन समिति का सुझाव दिया था।
- इसके अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल होने थे।
- सरकार ने संशोधन कर मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को सदस्य बनाया।
- यह संशोधन कार्यपालिका (Executive) के प्रभाव को बढ़ाता है।
- इससे आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता पर प्रश्न उठे हैं।
- विपक्ष और नागरिक संगठनों ने इसे “संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिकरण” की दिशा में कदम बताया।
- सरकार का तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के अनुरूप है।
- आयोग की स्वतंत्रता उसकी विश्वसनीयता और चुनावों की निष्पक्षता के लिए अनिवार्य है।
- न्यायपालिका की उपस्थिति चयन प्रक्रिया को संतुलित और पारदर्शी बनाती थी।
- संशोधित प्रक्रिया से शक्तियों का केंद्रीकरण बढ़ने का खतरा है।
- दीर्घकाल में यह लोकतंत्र के संस्थागत ढाँचे को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
संशोधित नियुक्ति प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। लोकतंत्र की सुदृढ़ता के लिए आवश्यक है कि आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष, संतुलित और पारदर्शी बनी रहे।
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