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Describe the geographical distribution and characteristics of main types of natural vegetation found in Uttar Pradesh. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में पायी जाने वाली प्रमुख प्राकृतिक वनस्पतियों के भौगोलिक वितरण एवं विशेषताओं का वर्णन करें।

Ans: परिचय:

 उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक वनस्पतियाँ राज्य के जलवायु, वर्षा और स्थलाकृति पर निर्भर करती हैं। यहाँ की वनस्पतियाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों से लेकर काँटेदार झाड़ियों तक विविध प्रकार की हैं, जो राज्य के पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देती हैं।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य का लगभग 6.5% क्षेत्र वनाच्छादित है।
  • तराई और पूर्वी यूपी में घने नमीदार साल, सागौन, शीशम जैसे वृक्ष पाए जाते हैं।
  • मध्य प्रदेश सीमा से लगे बुंदेलखंड क्षेत्र में काँटेदार झाड़ियाँ व बबूल प्रमुख हैं।
  • गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में कृषि प्रधान भूमि के कारण प्राकृतिक वन कम हैं।
  • सोनभद्र और मिर्जापुर के पहाड़ी क्षेत्रों में सूखे पर्णपाती वन मिलते हैं।
  • तराई क्षेत्र के दलदली वन में बांस, सरकंडा, और ताड़ प्रमुख हैं।
  • वनस्पतियाँ जैव विविधता, मृदा संरक्षण और जलवायु संतुलन में सहायक हैं।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश की वनस्पतियाँ राज्य की भौगोलिक विविधता का प्रतिबिंब हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित होता है।

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Mention the technological advancement adopted by the Uttar Pradesh Government to improve weather forecasting. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-6

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मौसम के पूर्वानुमान में सुधार के लिये उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनायी गयी तकनीकी प्रगति का उल्लेख कीजिये।

Ans: परिचय:

 उत्तर प्रदेश सरकार ने मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting) को अधिक सटीक और समयबद्ध बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी और डेटा आधारित प्रणाली को अपनाया है। इसका उद्देश्य किसानों, आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण में मदद पहुँचाना है।

मुख्य बिंदु:

  • ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और रेन गेज नेटवर्क राज्य के अधिकांश जिलों में स्थापित किए गए हैं।
  • डॉपलर रडार प्रणाली से वर्षा, तूफान और आँधी की सटीक निगरानी की जाती है।
  • रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट डेटा के माध्यम से मौसम परिवर्तन की वास्तविक समय जानकारी मिलती है।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) द्वारा मौसम अलर्ट प्रणाली विकसित की गई है।
  • कृषि मौसम सेवा केंद्रों के माध्यम से किसानों को SMS और मोबाइल ऐप से मौसम सलाह दी जाती है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल मौसम विश्लेषण को अधिक विश्वसनीय बना रहे हैं।
  • भारत मौसम विभाग (IMD) के साथ समन्वय से राज्य स्तरीय पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ी है।

निष्कर्ष: इन तकनीकी प्रगतियों से उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और आपदा तैयारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे कृषि और जनजीवन दोनों सुरक्षित हुए हैं।

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What are the research and development achievements in biotechnology in Uttar Pradesh? How will it help to uplift the poor section of society? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास की क्या उपलब्धियाँ हैं? इससे समाज के गरीब वर्ग के उत्थान में किस प्रकार मदद मिलेगी?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) का क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार ने कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई अनुसंधान संस्थान और नीतिगत पहल की हैं। यह विज्ञान राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज के गरीब वर्गों के जीवन स्तर सुधार में भी सहायक बन रहा है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • उत्तर प्रदेश की बायोटेक नीति 2022 ने अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया।
  • लखनऊ बायोटेक पार्क और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के प्रमुख केंद्र हैं।
  • सीएसआईआर–आईआईएमटी (लखनऊ) में औषधीय पौधों और जैविक दवाओं पर कार्य हो रहा है।
  • कृषि क्षेत्र में टिश्यू कल्चर तकनीक से उच्च उत्पादक किस्में विकसित की गईं।
  • सूखा-रोधी और रोग-प्रतिरोधी बीजों का विकास किया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ी।
  • डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में जीनोमिक सुधार से उत्पादन में वृद्धि हुई।
  • पर्यावरण संरक्षण हेतु अपशिष्ट जल उपचार में सूक्ष्मजीव आधारित तकनीक अपनाई जा रही है।
  • बायोफर्टिलाइज़र और बायोपेस्टिसाइड से खेती की लागत कम हुई।
  • जैव चिकित्सा अनुसंधान से सस्ती वैक्सीन और औषधियाँ विकसित की जा रही हैं।
  • ग्रामीण युवाओं के लिए बायोटेक स्टार्टअप और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए।

गरीब वर्ग के उत्थान में योगदान: इन नवाचारों से किसानों की उत्पादकता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिससे गरीब वर्ग की आय व जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion): जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम सिद्ध हो रहा है।

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What are the major scientific challenges for Uttar Pradesh in becoming a trillion dollar economy? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश का ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनने के लिये मुख्य वैज्ञानिक चुनौतियाँ क्या हैं?

Ans: परिचय: उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंतु इस दिशा में राज्य को कई वैज्ञानिक, तकनीकी और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • अनुसंधान एवं नवाचार में निवेश की कमी से तकनीकी प्रगति सीमित है।
  • कृषि और उद्योगों में आधुनिक तकनीक का कम उपयोग उत्पादकता घटाता है।
  • कौशल प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जनशक्ति की अपर्याप्तता नवाचार को बाधित करती है।
  • स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण में वैज्ञानिक समाधान की कमी है।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर व लैब सुविधाएँ अनुसंधान संस्थानों में पर्याप्त नहीं हैं।
  • AI, बायोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता का अभाव है।
  • सरकारी-निजी क्षेत्र के समन्वय की कमी से नवाचारों का व्यावसायीकरण धीमा है।

निष्कर्ष: इन चुनौतियों को दूर कर उत्तर प्रदेश विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को अपनाकर ही ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुँच सकता है।

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What are the challenges to promote viticulture in Uttar Pradesh and how it can support economic development of Uttar Pradesh? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती को बढ़ावा देने में क्या चुनौतियाँ हैं और यह उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक हो सकती है?

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती (Grape Cultivation) अब धीरे-धीरे विकसित हो रही है, विशेषकर पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में। यह खेती राज्य में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आय वृद्धि की बड़ी संभावना रखती है, परंतु कई चुनौतियाँ भी सामने हैं।

मुख्य बिंदु:

  • अनुकूल जलवायु और मिट्टी का अभाव कई हिस्सों में उत्पादन सीमित करता है।
  • उच्च प्रारंभिक लागत और तकनीकी ज्ञान की कमी से किसान हिचकते हैं।
  • सिंचाई की असमान उपलब्धता अंगूर उत्पादन को प्रभावित करती है।
  • कीट और रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज और विपणन ढाँचे की कमी से नुकसान बढ़ता है।
  • सफल अंगूर खेती से फल प्रसंस्करण उद्योग (वाइन, जूस आदि) को बढ़ावा मिल सकता है।
  • यह रोजगार, निर्यात और ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन देकर आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है।

निष्कर्ष: यदि उचित नीतिगत सहयोग और तकनीकी प्रशिक्षण मिले, तो अंगूर की खेती उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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What are the main challenges facing the production, distribution and marketing of agricultural products in Uttar Pradesh? How can they be addressed by utilising science and technology developments while ensuring sustainable and inclusive growth? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं? सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास का उपयोग करके उन्हें कैसे संबोधित किया जा सकता है?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। राज्य में गेहूँ, चावल, गन्ना, आलू, दालें और तिलहन जैसे प्रमुख फसलें उत्पादित होती हैं। किन्तु कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन में अनेक संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य चुनौतियाँ (Main Challenges):

  • भूमि विखंडन: छोटे व बिखरे खेतों के कारण उत्पादकता कम है।
  • सिंचाई असमानता: पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक सिंचाई जबकि पूर्वी में अभाव।
  • भंडारण और कोल्ड चेन की कमी: फलों व सब्जियों का भारी नुकसान।
  • कृषि विपणन में बिचौलियों की भूमिका: किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
  • कृषि आधारित उद्योगों की कमी: मूल्य संवर्द्धन सीमित है।
  • आधुनिक तकनीकों की जानकारी का अभाव: पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता।
  • मौसमीय अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समाधान (Science & Tech-based Solutions):
  • स्मार्ट कृषि तकनीकें जैसे IoT, सेंसर और ड्रोन से फसल प्रबंधन सुधारा जा सकता है।
  • ई-नाम (e-NAM) और डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म से किसानों को सीधा बाजार मिल सकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और लॉजिस्टिक नेटवर्क को बढ़ाकर हानि घटाई जा सकती है।
  • कृषि जैव प्रौद्योगिकी से उच्च उत्पादक व रोग-रोधी किस्में विकसित की जा सकती हैं।
  • कृषि-स्टार्टअप्स और मिलियम फार्मर्स स्कूल से प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से उत्तर प्रदेश की कृषि अधिक उत्पादक, टिकाऊ और समावेशी बन सकती है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों सशक्त होंगी।

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What are the policies and programmes of the Government of Uttar Pradesh to promote MSMEs? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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एम एस एम ई को बढ़ावा देने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियाँ तथा कार्यक्रम क्या हैं?

Ans:    परिचय:

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियाँ अपनाई हैं। इनका उद्देश्य रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योगों का विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • MSME नीति 2022 से निवेश को आकर्षित कर उद्यम स्थापना को सरल बनाया गया।
  • एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना से पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिली।
  • समर्थ योजना के तहत युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोज़गार को बढ़ावा।
  • क्लस्टर विकास कार्यक्रम से MSME इकाइयों को सामूहिक तकनीकी सहायता।
  • आत्मनिर्भर रोजगार योजना से लघु उद्यमों को ऋण व पूंजी सहायता।
  • सिंगल विंडो पोर्टल से पंजीकरण और स्वीकृति की प्रक्रिया सरल हुई।
  • औद्योगिक गलियारे MSME निवेश को नई दिशा दे रहे हैं।

निष्कर्ष: इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश में उद्यमिता और रोजगार दोनों में वृद्धि हुई है। MSME अब राज्य की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बन चुका है।

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Critically analyse the extent to which infrastructural development in Uttar Pradesh has contributed to economic diversification and regional equity. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढाँचे के विकास ने आर्थिक विविधीकरण और क्षेत्रीय समानता में किस हद तक योगदान दिया है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये।

Ans:  परिचय:

उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में सड़क, परिवहन, ऊर्जा और औद्योगिक गलियारे जैसे बुनियादी ढाँचे के तेज विकास ने राज्य की आर्थिक दिशा बदली है। इससे निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। परंतु इसका लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं पहुँचा है।

मुख्य बिंदु:

  • पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी में विकास असमान रहा है।
  • एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने औद्योगिक क्षेत्रों को नई गति दी है।
  • विद्युत आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स सुधार से उद्योगों की उत्पादकता बढ़ी।
  • शहरी बुनियादी ढाँचा सशक्त हुआ, पर ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ापन है।
  • औद्योगिक गलियारे ने MSME और बड़े उद्योगों को जोड़ने का अवसर दिया।
  • डिजिटल और शिक्षा अवसंरचना ने सेवा क्षेत्र को गति दी।
  • फिर भी क्षेत्रीय असमानता और रोजगार असंतुलन अभी भी चुनौती बने हुए हैं।

निष्कर्ष: बुनियादी ढाँचे के विकास से यूपी में आर्थिक विविधीकरण बढ़ा है, पर समान क्षेत्रीय विकास के लिए संतुलित नीति की अब भी आवश्यकता है।

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How “Million Farmers School Program” and “National Mission on Natural Farming Scheme” can become key elements in promoting the commercialization of agriculture in Uttar Pradesh? Give your suggestions. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में कृषि के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने में “मिलियन फार्मर्स स्कूल प्रोग्राम” और “नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग स्कीम” कैसे प्रमुख घटक बन सकते हैं? अपने सुझाव दीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश में कृषि को पारंपरिक स्वरूप से आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय में बदलने हेतु अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें मिलियम फार्मर्स स्कूल प्रोग्राम और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) प्रमुख घटक बनकर उभरे हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मिलियम फार्मर्स स्कूल प्रोग्राम (MFS):
  • ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों को वैज्ञानिक कृषि प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • फसल विविधीकरण, मिट्टी परीक्षण और आधुनिक तकनीक पर जोर देता है।
  • समूह आधारित खेती और बाजार उन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहन देता है।
  • किसानों को लागत घटाने और लाभ बढ़ाने के उपाय सिखाता है।
  • नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF):
  • रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर प्राकृतिक तरीकों से खेती को बढ़ावा देता है।
  • जैविक खाद, गोबर और जीवामृत के उपयोग से लागत कम व मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
  • पर्यावरण संरक्षण व प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग से किसानों की आय बढ़ती है।
  • सुझाव (Suggestions):
  • इन योजनाओं से जुड़ा प्रशिक्षण डिजिटल माध्यम से अधिक किसानों तक पहुँचाया जाए।
  • प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और बाज़ार सुविधा को सुदृढ़ किया जाए।

निष्कर्ष (Conclusion): दोनों योजनाएँ कृषि को टिकाऊ, लाभकारी और व्यावसायिक बनाने में सहायक हैं, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

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What are the policies of the Government of Uttar Pradesh to promote innovations in science and technology? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-6

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार की क्या नीतियाँ हैं ?

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology) में नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतियाँ और कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य राज्य को नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना और युवाओं को स्टार्टअप व अनुसंधान के लिए प्रेरित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2020 के तहत नवाचार आधारित उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी सहायता।
  • आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2021 से टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों का विकास।
  • राज्य नवाचार कोष (Innovation Fund) की स्थापना शोध और प्रोटोटाइप विकास के लिए।
  • इन्क्यूबेशन सेंटर और टेक्नोलॉजी पार्क विश्वविद्यालयों में स्थापित किए जा रहे हैं।
  • डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस परियोजनाओं से नवाचार को बढ़ावा।
  • AI, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहन।
  • नवाचार पुरस्कार योजनाओं से युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जा रहा है।

निष्कर्ष: इन नीतियों से उत्तर प्रदेश में नवाचार और तकनीकी उद्यमिता को नई दिशा मिली है। यह राज्य को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रहा है।

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