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What are the key objectives of the Uttar Pradesh Data Centre Policy-2021? Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं? विवेचना कीजिए ।

Ans:  प्रस्तावना (Introductio):

उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति–2021 राज्य की डिजिटल अवसंरचना को सशक्त बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस नीति का उद्देश्य राज्य को “भारत का डाटा सेंटर हब” बनाना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देना है। यह नीति निवेश, रोजगार और ई-शासन के विकास को प्रोत्साहित करती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) डिजिटल अवसंरचना का विकास: राज्य में अत्याधुनिक डाटा सेंटर पार्कों की स्थापना को बढ़ावा देना।

(2) निवेश आकर्षण: निजी क्षेत्र और विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहन देकर आईटी क्षेत्र में निवेश बढ़ाना।

(3) रोजगार सृजन: डाटा सेंटर और इससे संबंधित सेवाओं में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न करना।

(4) ई-गवर्नेंस को प्रोत्साहन: सरकारी डेटा के सुरक्षित भंडारण और प्रसंस्करण हेतु स्थानीय डाटा सुविधाएँ स्थापित करना।

(5) नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग: डाटा सेंटर संचालन में हरित ऊर्जा और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना।

(6) सुरक्षा और डेटा गोपनीयता: डेटा सुरक्षा के लिए उन्नत मानकों को लागू करना।

(7) निवेश प्रोत्साहन पैकेज: भूमि, बिजली, करों और बुनियादी ढाँचे में विशेष रियायतें प्रदान करना।

निष्कर्ष (Conclusion ): उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति–2021 राज्य को डिजिटल क्रांति का अग्रदूत बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।यह नीति तकनीकी आत्मनिर्भरता, निवेश वृद्धि और रोजगार सृजन के नए अवसर प्रदान करती है।

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Discuss the role of Uttar Pradesh during the Non-cooperation Movement. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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असहयोग आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश की भूमिका की विवेचना कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक चरण था, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। उत्तर प्रदेश ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे जनआंदोलन का रूप प्रदान किया। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों, किसानों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

मुख्य बिंदु (Important Points)

(1) राजनीतिक केंद्र: वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ और गोरखपुर आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे

(2) नेताओं की भूमिका: पं. मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. सम्पूर्णानंद और पुरुषोत्तमदास टंडन ने नेतृत्व किया।

(3) शिक्षा का बहिष्कार: विद्यार्थियों ने सरकारी विद्यालयों और कॉलेजों का बहिष्कार कर राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाएँ स्थापित कीं।

(4) विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार: राज्यभर में विदेशी वस्त्र जलाने और खादी के प्रयोग का व्यापक प्रचार हुआ।

(5) किसान आंदोलन: अवध क्षेत्र में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसानों ने नीलामी, लगान और बेगार के विरोध में आंदोलन किया।

(6) चौरी-चौरा घटना (1922): गोरखपुर की इस घटना ने आंदोलन की दिशा को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।

(7) महिला भागीदारी: प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी की महिलाओं ने सभाओं, जुलूसों और बहिष्कार आंदोलनों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

निष्कर्ष (Conclusion):

असहयोग आंदोलन में उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संघर्ष को जनजागरण का रूप देने में अग्रणी भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने राज्य में राष्ट्रवाद की भावना को गहराई से स्थापित किया।

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Identify the sites related to Harappan Civilization in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में हड़प्पा सभ्यता से संबंधित पुरास्थलों की पहचान कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश में हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) के अनेक पुरास्थल पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र के प्राचीन सांस्कृतिक विकास के प्रमाण हैं। ये स्थल दर्शाते हैं कि गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र भी सिंधु सभ्यता के प्रभाव क्षेत्र में था। यहाँ मिली वस्तुएँ उस युग की कृषि, व्यापार और शहरी संस्कृति का संकेत देती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) आलमगीरपुर (मेरठ): इसे हड़प्पा सभ्यता की पूर्वी सीमा माना जाता है; यहाँ से मिट्टी के बर्तन, मोती और ताम्र उपकरण मिले हैं।

(2) हास्तिनापुर (मेरठ): यहाँ उत्खनन से हड़प्पाई संस्कृति के उत्तरवर्ती अवशेष मिले हैं।

(3) सिनौली (बागपत): हाल के उत्खनन में यहाँ से ताम्र रथ, हथियार और मानव कंकाल प्राप्त हुए हैं, जो उन्नत सभ्यता के संकेत हैं।

(4) भिर्साड़ी (बिजनौर): यहाँ से मिट्टी के पात्र और ताम्र अवशेष मिले हैं, जो हड़प्पाई प्रभाव दर्शाते हैं।

(5) मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्र: इन क्षेत्रों में चित्रित शैलाश्रय और पत्थर के औजार प्राचीन मानव संस्कृति की निरंतरता को दर्शाते हैं।

(6) कास्गंज और सहारनपुर: यहाँ से भी हड़प्पा कालीन शैली के बर्तन और औजार मिले हैं।

(7) ये सभी स्थल दर्शाते हैं कि हड़प्पा संस्कृति का प्रसार केवल सिंधु घाटी तक सीमित नहीं था, बल्कि गंगा-यमुना दोआब तक फैला था।

निष्कर्ष (Conclusion): उत्तर प्रदेश के ये पुरास्थल हड़प्पा सभ्यता के व्यापक भूगोल और उसकी सांस्कृतिक पहुंच को प्रमाणित करते हैं।ये स्थल भारतीय पुरातत्व और सभ्यता के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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Discuss the architectural features of the monuments of Agra. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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आगरा के स्मारकों की वास्तुकला की विशेषताओं की विवेचना कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

आगरा भारत की ऐतिहासिक और स्थापत्य धरोहर का प्रमुख केंद्र है, जहाँ मुगल काल की कला और स्थापत्य का उत्कर्ष देखने को मिलता है। यहाँ निर्मित स्मारक न केवल सौंदर्य के प्रतीक हैं बल्कि उस युग की सांस्कृतिक समृद्धि के भी साक्षी हैं। ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे स्मारक विश्व वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरण हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग: आगरा के स्मारकों में मुख्यतः सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का संयोजन देखा जाता है।

(2) इस्लामी और भारतीय शैली का संगम: इन स्मारकों में फारसी, तुर्की और भारतीय स्थापत्य शैलियों का उत्कृष्ट मिश्रण है।

(3) गुंबद, मेहराब और मीनारें: ताजमहल और फतेहपुर सीकरी में विशाल गुंबद और सुंदर मेहराबें इसकी शान बढ़ाती हैं।

(4) नक्काशी और जड़ाई कला: संगमरमर पर की गई जड़ाई, बेल-बूटे और कलात्मक आकृतियाँ अत्यंत बारीकी से निर्मित हैं।

(5) सममितीय योजना: ताजमहल जैसी इमारतों में पूर्ण सममिति और ज्यामितीय संतुलन का अद्भुत प्रयोग किया गया है।

(6) उद्यान योजना: चारबाग शैली के बगीचे इन स्मारकों की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

(7) फतेहपुर सीकरी की स्थापत्य विविधता: इसमें दीवाने-खास, बुलंद दरवाज़ा और जामा मस्जिद जैसे अनेक स्थापत्य चमत्कार शामिल हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

आगरा के स्मारक भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्टता और मुगल सौंदर्यबोध के प्रतीक हैं। इनकी संरचनाएँ आज भी भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं।

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Explain the security challenges in the border areas of Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों की व्याख्या कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश की सीमाएँ बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और नेपाल से मिलती हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और सामाजिक विविधता राज्य की सुरक्षा के लिए विशेष चुनौती प्रस्तुत करती है। सीमा प्रबंधन की कमजोरियाँ अक्सर अवैध गतिविधियों और अपराधों को बढ़ावा देती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) अंतर्राष्ट्रीय सीमा सुरक्षा: नेपाल से लगी खुली सीमा तस्करी, घुसपैठ और जालसाजी जैसी गतिविधियों के लिए संवेदनशील है।

(2) अवैध तस्करी: सीमावर्ती जिलों में मादक पदार्थ, हथियार, पशु व मानव तस्करी की घटनाएँ चिंता का विषय हैं।

(3) आतंकवाद और उग्रवाद: सीमाई क्षेत्रों का उपयोग असामाजिक तत्वों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

(4) सीमाई अपराध: अपहरण, तस्करी और अवैध व्यापार राज्य की कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

(5) सामाजिक-आर्थिक असंतुलन: सीमावर्ती क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी सुरक्षा को कमजोर करती है।

(6) प्रशासनिक समन्वय की कमी: विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता घटती है।

(7) समाधान प्रयास: सीमा चौकियों का सुदृढ़ीकरण, तकनीकी निगरानी और सामुदायिक सहयोग से स्थिति सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

समेकित नीति, आधुनिक तकनीक और स्थानीय भागीदारी से इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

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Highlight the greater possibilities of tourism in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में पर्यटन की वृहत्तर संभावनाओं पर प्रकाश डालिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश भारत का सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध राज्य है। यहाँ के विविध पर्यटन स्थलों में आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और वैश्विक पहचान को सशक्त बनाने की क्षमता रखता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) धार्मिक पर्यटन: काशी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन और प्रयागराज जैसे तीर्थस्थल करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

(2) ऐतिहासिक पर्यटन: आगरा का ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, झाँसी किला जैसे स्थलों से समृद्ध ऐतिहासिक विरासत झलकती है।

(3) सांस्कृतिक पर्यटन: वाराणसी के घाट, लोकनृत्य, संगीत और कुंभ जैसे आयोजन विश्व प्रसिद्ध हैं।

(4) पारिस्थितिक पर्यटन: दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और चंद्रप्रभा अभयारण्य प्राकृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं।

(5) आध्यात्मिक सर्किट विकास: रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट जैसी परियोजनाएँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।

(6) आर्थिक योगदान: पर्यटन से राज्य के राजस्व और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

(7) चुनौतियाँ: आधारभूत संरचना, स्वच्छता और सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

पर्यटन उत्तर प्रदेश की आर्थिक उन्नति और सांस्कृतिक प्रसार का प्रभावी माध्यम है। सुव्यवस्थित प्रबंधन और प्रचार के माध्यम से राज्य विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बन सकता है।

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Describe the major stages in the formulation of Gram Panchayat Development Plan (GPDP) in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत विकास योजना (जी.पी.डी.पी.) के निर्माण के प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) ग्रामीण विकास का एक सहभागी एवं विकेन्द्रीकृत मॉडल है। यह योजना संविधान के 73वें संशोधन और पंचायती राज व्यवस्था की भावना पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राम स्तर पर लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की योजना बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) स्थिति विश्लेषण (Situation Analysis): ग्राम की सामाजिक, आर्थिक और भौतिक स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है।

(2) ग्राम सभा का आयोजन: ग्रामवासियों की भागीदारी से प्राथमिक आवश्यकताओं और समस्याओं की पहचान की जाती है।

(3) संसाधनों का आकलन: स्थानीय, राज्य और केंद्र स्तर पर उपलब्ध वित्तीय व भौतिक संसाधनों का निर्धारण किया जाता है।

(4) प्राथमिकता निर्धारण: ग्रामसभा द्वारा समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर क्रमबद्ध किया जाता है।

(5) योजना निर्माण: प्रत्येक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, कृषि आदि) के लिए ठोस योजनाएँ बनाई जाती हैं।

(6) अनुमोदन और समन्वय: ग्राम पंचायत द्वारा तैयार योजना को ब्लॉक व जिला स्तर पर अनुमोदित किया जाता है।

(7) कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन: स्वीकृत योजना के अनुसार कार्य संपन्न किए जाते हैं और समय-समय पर निगरानी की जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion ):

जी.पी.डी.पी. ग्रामीण विकास को स्थानीय जरूरतों से जोड़कर सहभागी शासन को सशक्त बनाती है। यह योजना “गाँव की योजना, गाँव के लोग” की अवधारणा को साकार करती है।

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Discuss the nature of regional parties in Uttar Pradesh. Throw light on their importance in the politics of state. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय दलों की प्रकृति की विवेचना कीजिए । राज्य की राजनीति में उनके महत्व पर प्रकाश डालिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। इन दलों ने राज्य की सामाजिक, आर्थिक और जातीय विविधताओं को राजनीतिक स्वर प्रदान किया है। इनकी उपस्थिति ने राज्य में सत्ता संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को गहराई दी है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • क्षेत्रीय दल राज्य-विशिष्ट मुद्दों, जैसे—जाति, क्षेत्रीय असमानता और सामाजिक न्याय पर केंद्रित रहते हैं।
  • समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, अपना दल आदि प्रमुख क्षेत्रीय दल हैं।
  • इन दलों ने राष्ट्रीय दलों के एकाधिकार को चुनौती दी है।
  • सामाजिक न्याय, दलित सशक्तिकरण और पिछड़ों की भागीदारी को इन्होंने प्रमुखता दी।
  • गठबंधन राजनीति की परंपरा को बल प्रदान किया, जिससे बहुदलीय लोकतंत्र मजबूत हुआ।
  • इन दलों ने स्थानीय मुद्दों को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का कार्य किया।
  • हालांकि, इनकी नीतियाँ कभी-कभी जातीय या वोट बैंक आधारित राजनीति तक सीमित रह जाती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

क्षेत्रीय दल उत्तर प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक विविधता और सामाजिक प्रतिनिधित्व के प्रतीक हैं। फिर भी, इनके दीर्घकालिक प्रभाव के लिए विकासोन्मुख और समावेशी राजनीति आवश्यक है।

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Critically examine the process of appointment of the Advocate General and his functions in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता के नियुक्ति की प्रक्रिया तथा उसके कार्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता (Advocate General) राज्य सरकार का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है, जो राज्य की विधिक नीतियों और निर्णयों में परामर्श प्रदान करता है। इस पद की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत की गई है। यह पद राज्य शासन की विधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने में सहायक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।
  • नियुक्त व्यक्ति उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है।
  • वह राज्य सरकार को विधिक मामलों में परामर्श देता और न्यायालय में उसका प्रतिनिधित्व करता है।
  • कार्यकाल संविधान में निर्धारित नहीं है; वह राज्यपाल की इच्छा पर पदस्थ रहता है।
  • उसे वेतन व सुविधाएँ राज्य सरकार तय करती है।
  • वह विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है परंतु मतदान नहीं कर सकता।
  • आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो उसकी स्वतंत्रता सीमित है, क्योंकि उसका पद कार्यपालिका पर निर्भर है।

निष्कर्ष (Conclusion):

महाधिवक्ता राज्य की विधिक व्यवस्था का आधारस्तंभ है, जो शासन को संवैधानिक मर्यादाओं में रखता है।

फिर भी, उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए संवैधानिक सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।

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What are the major objectives and target group in Innovation Promotion Programmes of the Council of Science and Technology in Uttar Pradesh? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

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उत्तर प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य एवं लक्ष्य समूह क्या हैं ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (Council of Science and Technology, Uttar Pradesh – CSTUP) राज्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है। यह परिषद विभिन्न नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी उद्यमिता और शोध भावना को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य विज्ञान को समाजोपयोगी बनाकर राज्य के सतत विकास में योगदान देना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मुख्य उद्देश्य: राज्य में नवाचार की संस्कृति स्थापित करना और विज्ञान को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना।
  • नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रम (Innovation Promotion Programme) के तहत युवाओं को नए विचार विकसित करने हेतु प्रेरित किया जाता है।
  • स्कूल और कॉलेज स्तर पर वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतियोगिताएँ और मेले आयोजित किए जाते हैं।
  • युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (Young Scientist Scheme) के तहत शोध आधारित नवाचारों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहन मिलता है।
  • महिला नवाचारकर्ता और शोधार्थी को विशेष प्राथमिकता देकर समान अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • ग्रामीण नवाचार मिशन के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के लिए सस्ती तकनीकी समाधान खोजे जाते हैं।
  • प्रदर्शनी, कार्यशालाएँ और विज्ञान मेले आयोजित कर छात्रों में प्रयोगात्मक कौशल बढ़ाया जाता है।
  • संस्थान-उद्योग साझेदारी से अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग की दिशा में ले जाया जाता है।
  • नवाचार निधि (Innovation Fund) के माध्यम से उपयोगी शोध परियोजनाओं को अनुदान दिया जाता है।
  • मुख्य लक्ष्य समूह: छात्र, युवा वैज्ञानिक, शोधार्थी, नवाचारकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और ग्रामीण तकनीकी उद्यमी।
  • अंतिम लक्ष्य: विज्ञान एवं तकनीक को विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का साधन बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

CSTUP के नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रम विज्ञान और तकनीक को समाज के निकट लाने का प्रभावी प्रयास हैं। इनसे राज्य में शोध, उद्यमिता और नवाचार की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

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