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What are the benefits of commercialization of agriculture in Uttar Pradesh? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में कृषि के व्यवसायीकरण के क्या लाभ हैं?

Ans:  परिचय:

 उत्तर प्रदेश में कृषि व्यावसायीकरण (Commercialization of Agriculture) का अर्थ है खेती को केवल जीविका का साधन न मानकर लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना। इससे किसानों की आय बढ़ी है और कृषि क्षेत्र में तकनीकी व आर्थिक प्रगति हुई है।

मुख्य बिंदु:

  • कृषि उत्पादन में विविधता, जैसे – फल, सब्जी, दुग्ध और फूलों की खेती का विस्तार।
  • कृषि आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ी।
  • रोजगार के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़े।
  • आधुनिक तकनीक और सिंचाई साधनों का उपयोग बढ़ा।
  • निर्यातोन्मुख कृषि उत्पादों से विदेशी मुद्रा अर्जन हुआ।
  • किसानों की आय में वृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता आई।
  • कृषि विपणन, भंडारण व प्रसंस्करण का विकास हुआ।

निष्कर्ष: कृषि व्यावसायीकरण से उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता और किसानों की समृद्धि दोनों में वृद्धि हुई है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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Describe the geographical distribution and characteristics of main types of natural vegetation found in Uttar Pradesh. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में पायी जाने वाली प्रमुख प्राकृतिक वनस्पतियों के भौगोलिक वितरण एवं विशेषताओं का वर्णन करें।

Ans: परिचय:

 उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक वनस्पतियाँ राज्य के जलवायु, वर्षा और स्थलाकृति पर निर्भर करती हैं। यहाँ की वनस्पतियाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों से लेकर काँटेदार झाड़ियों तक विविध प्रकार की हैं, जो राज्य के पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देती हैं।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य का लगभग 6.5% क्षेत्र वनाच्छादित है।
  • तराई और पूर्वी यूपी में घने नमीदार साल, सागौन, शीशम जैसे वृक्ष पाए जाते हैं।
  • मध्य प्रदेश सीमा से लगे बुंदेलखंड क्षेत्र में काँटेदार झाड़ियाँ व बबूल प्रमुख हैं।
  • गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में कृषि प्रधान भूमि के कारण प्राकृतिक वन कम हैं।
  • सोनभद्र और मिर्जापुर के पहाड़ी क्षेत्रों में सूखे पर्णपाती वन मिलते हैं।
  • तराई क्षेत्र के दलदली वन में बांस, सरकंडा, और ताड़ प्रमुख हैं।
  • वनस्पतियाँ जैव विविधता, मृदा संरक्षण और जलवायु संतुलन में सहायक हैं।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश की वनस्पतियाँ राज्य की भौगोलिक विविधता का प्रतिबिंब हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित होता है।

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Identify the Ramsar sites of Uttar Pradesh and describe their features. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS

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उत्तर प्रदेश के रामसर स्थलों को चिह्नित कीजिये एवं उनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिये।

Ans:  परिचय:

उत्तर प्रदेश में कई आर्द्रभूमि स्थल (Wetlands) हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व के कारण रामसर स्थल (Ramsar Sites) घोषित किया गया है। ये स्थल जैव विविधता, जल संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के आवास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य में कुल 10 रामसर स्थल हैं जैसे— नवाबगंज, समासपुर, संडी, पार्वती अरण्य, बखिरा, सुरहा ताल, सैंथरी, सम्प्रस, हक्कार और संजय झील।
  • अधिकांश स्थल गंगा और घाघरा नदी तंत्र से जुड़े हैं।
  • यहाँ सारस, पेलिकन, साइबेरियन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं।
  • ये स्थल भू-जल पुनर्भरण और जलवायु संतुलन में सहायक हैं।
  • स्थानीय मछली पालन और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
  • कुछ स्थल इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।
  • प्रदूषण और अतिक्रमण इनके संरक्षण की मुख्य चुनौती हैं।

निष्कर्ष: रामसर स्थल उत्तर प्रदेश की पर्यावरणीय धरोहर हैं, जिनके संरक्षण से सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिलेगी।

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Critically analyse the extent to which infrastructural development in Uttar Pradesh has contributed to economic diversification and regional equity. [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढाँचे के विकास ने आर्थिक विविधीकरण और क्षेत्रीय समानता में किस हद तक योगदान दिया है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये।

Ans:  परिचय:

उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में सड़क, परिवहन, ऊर्जा और औद्योगिक गलियारे जैसे बुनियादी ढाँचे के तेज विकास ने राज्य की आर्थिक दिशा बदली है। इससे निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। परंतु इसका लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं पहुँचा है।

मुख्य बिंदु:

  • पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी में विकास असमान रहा है।
  • एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने औद्योगिक क्षेत्रों को नई गति दी है।
  • विद्युत आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स सुधार से उद्योगों की उत्पादकता बढ़ी।
  • शहरी बुनियादी ढाँचा सशक्त हुआ, पर ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ापन है।
  • औद्योगिक गलियारे ने MSME और बड़े उद्योगों को जोड़ने का अवसर दिया।
  • डिजिटल और शिक्षा अवसंरचना ने सेवा क्षेत्र को गति दी।
  • फिर भी क्षेत्रीय असमानता और रोजगार असंतुलन अभी भी चुनौती बने हुए हैं।

निष्कर्ष: बुनियादी ढाँचे के विकास से यूपी में आर्थिक विविधीकरण बढ़ा है, पर समान क्षेत्रीय विकास के लिए संतुलित नीति की अब भी आवश्यकता है।

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What are the policies and programmes of the Government of Uttar Pradesh to promote MSMEs? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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एम एस एम ई को बढ़ावा देने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियाँ तथा कार्यक्रम क्या हैं?

Ans:    परिचय:

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियाँ अपनाई हैं। इनका उद्देश्य रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योगों का विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • MSME नीति 2022 से निवेश को आकर्षित कर उद्यम स्थापना को सरल बनाया गया।
  • एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना से पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिली।
  • समर्थ योजना के तहत युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोज़गार को बढ़ावा।
  • क्लस्टर विकास कार्यक्रम से MSME इकाइयों को सामूहिक तकनीकी सहायता।
  • आत्मनिर्भर रोजगार योजना से लघु उद्यमों को ऋण व पूंजी सहायता।
  • सिंगल विंडो पोर्टल से पंजीकरण और स्वीकृति की प्रक्रिया सरल हुई।
  • औद्योगिक गलियारे MSME निवेश को नई दिशा दे रहे हैं।

निष्कर्ष: इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश में उद्यमिता और रोजगार दोनों में वृद्धि हुई है। MSME अब राज्य की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बन चुका है।

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Write a note on ‘Failure and future of public schooling education’ in Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में ‘सार्वजनिक स्कूली शिक्षा की विफलता एवं भविष्य’ पर टिप्पणी लिखिए ।

Ans:   परिचय (Introduction):

सार्वजनिक स्कूली शिक्षा (Public School Education) किसी भी राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव होती है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली व्यापक नेटवर्क के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है। गुणवत्ताहीन शिक्षण, संसाधनों की कमी और जवाबदेही के अभाव ने इसकी प्रभावशीलता को कमजोर किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में 1.5 लाख से अधिक सरकारी विद्यालय हैं, परंतु छात्र उपस्थिति में लगातार गिरावट देखी गई है।

• शिक्षकों की अनुपस्थिति और गैर-शैक्षिक कार्यों में व्यस्तता शिक्षण गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

• आधारभूत सुविधाओं — बिजली, पानी, शौचालय, फर्नीचर — की कमी प्रमुख समस्या है।

• सीखने के स्तर (Learning Outcomes) में गिरावट ASER Report द्वारा बार-बार उजागर की गई है।

• अभिभावकों का झुकाव निजी विद्यालयों की ओर बढ़ा है।

• सरकारी विद्यालयों में English-medium और Digital Learning की कमी प्रतिस्पर्धा घटाती है।

• बजट आवंटन तो पर्याप्त है, पर उसका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।

• छात्र-शिक्षक अनुपात कई क्षेत्रों में निर्धारित मानक से अधिक है।

• Mission Prerna और Operation Kayakalp जैसी योजनाएँ सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।

• शिक्षकों का प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली अभी भी पारंपरिक है।

• ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राओं की निरंतरता (Retention) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

• शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी हस्तक्षेप से सुधार की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली चुनौतियों से जूझ रही है, पर सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं। यदि गुणवत्ता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार पर ध्यान दिया जाए, तो इसका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

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Examine the challenges of food security in Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है — प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन सुलभ कराना। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जनसंख्या-बहुल राज्य में यह एक बड़ी नीतिगत चुनौती बनी हुई है। कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद यहाँ खाद्य वितरण, पोषण और भंडारण से जुड़ी कई समस्याएँ विद्यमान हैं।

मुख्य बिंदु:

• राज्य की बड़ी जनसंख्या (25 करोड़+) पर पर्याप्त खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है।

• ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी के कारण पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सीमित रहती है।

• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में अनियमितता और भ्रष्टाचार प्रमुख समस्या है।

• खाद्यान्न भंडारण क्षमता की कमी से बड़ी मात्रा में अनाज नष्ट हो जाता है।

• कुपोषण (Malnutrition) की दर विशेषकर महिलाओं और बच्चों में अभी भी अधिक है।

• जलवायु परिवर्तन और सूखे की घटनाएँ कृषि उत्पादन को प्रभावित करती हैं।

• लघु और सीमांत किसानों की आय कम होने से उत्पादन क्षमता घटती है।

• सिंचाई सुविधाओं और कृषि तकनीक में असमानता से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होता है।

• खाद्यान्न के वितरण में डिजिटल कार्ड और बायोमेट्रिक प्रणाली का कार्यान्वयन अभी पूर्ण नहीं हुआ है।

• शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि और पलायन से खाद्य मांग असंतुलित होती है।

• पोषण योजनाएँ (जैसे आंगनवाड़ी, मिड-डे मील) कई बार गुणवत्ताहीन भोजन से ग्रसित हैं।

• कोविड-19 काल में खाद्य आपूर्ति शृंखला की कमजोरियाँ स्पष्ट रूप से सामने आईं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि सुधार, पारदर्शी वितरण प्रणाली और पोषण कार्यक्रमों की दक्षता आवश्यक है। यदि यह नीतिगत रूप से सुदृढ़ किया जाए, तो राज्य में “भोजन सबके लिए” का लक्ष्य साकार हो सकता है।

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Organised crime and terrorism are grave challenges to national security. What arrangements have been made in Uttar Pradesh to counter this? Explain. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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संगठित अपराध एवं आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं । इनका प्रतिकार करने के लिए उत्तर प्रदेश में क्या प्रबंधन किया गया है ? स्पष्ट कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

संगठित अपराध (Organized Crime) और आतंकवाद (Terrorism) आज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश, अपनी भौगोलिक स्थिति और घनी आबादी के कारण, इन अपराधों से विशेष रूप से प्रभावित रहा है। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी सुरक्षा एवं कानूनी प्रबंधन विकसित किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज़ (UP Gangsters Act) के तहत अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाती है।

• राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण हेतु किया जाता है।

• आतंकवाद-निरोधी बल (Anti-Terror Squad – ATS) को विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से सशक्त किया गया है।

• साइबर अपराधों से निपटने हेतु Cyber Crime Police Stations सभी जोनों में स्थापित किए गए हैं।

• खुफिया विभाग (Intelligence Department) को आधुनिक सर्विलांस उपकरणों से लैस किया गया है।

• डायल 112 और आई-खोज पोर्टल जैसी पहलें त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करती हैं।

• सीमा और संवेदनशील जिलों में पुलिस चौकियाँ और चेकपोस्ट बढ़ाई गई हैं।

• अपराधियों की संपत्ति जब्ती और अवैध गिरोहों पर आर्थिक प्रहार की नीति अपनाई गई है।

• अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों से समन्वय बढ़ाया गया है।

• सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सतर्कता अभियान में जोड़ा गया है।

• पुलिस बल में आधुनिक हथियार, ड्रोन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का प्रयोग बढ़ाया गया है।

• न्यायिक तंत्र में विशेष न्यायालयों की स्थापना से मामलों के शीघ्र निपटान पर बल दिया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश सरकार ने संगठित अपराध और आतंकवाद से निपटने के लिए सशक्त कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक ढाँचा विकसित किया है। इन उपायों से राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और जनविश्वास दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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Discuss the role of Uttar Pradesh Public Service Commission and explain the challenges before it for independent and impartial selection of public servants. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भूमिका और लोक सेवकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चयन के लिए उसके समक्ष चुनौतियों पर चर्चा कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC – Uttar Pradesh Public Service Commission) राज्य सरकार की एक संवैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य राज्य सेवाओं के लिए योग्य, निष्पक्ष और सक्षम अभ्यर्थियों का चयन करना है। आयोग राज्य प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य बिंदु:

• UPPSC की स्थापना 1 अप्रैल 1937 को की गई थी।

• इसका उद्देश्य योग्यता आधारित (Merit-based) चयन प्रक्रिया के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करना है।

• आयोग राज्य सिविल सेवा, पुलिस, शिक्षा, और अन्य विभागों की परीक्षाएँ आयोजित करता है।

• यह परीक्षाओं की योजना, प्रश्नपत्र निर्माण, मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया का संचालन करता है।

• पारदर्शिता और निष्पक्षता आयोग की कार्यप्रणाली के प्रमुख सिद्धांत हैं।

• आयोग के सुझावों के आधार पर सरकार भर्ती नीतियों में सुधार करती है।

• चुनौतियों में परीक्षा परिणामों में देरी और पारदर्शिता पर उठते सवाल शामिल हैं।

• पेपर लीक जैसी घटनाएँ आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

• राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप इसकी स्वतंत्रता के लिए चुनौती हैं।

• आधुनिक तकनीक और ई-गवर्नेंस के अभाव में प्रक्रियाएँ कभी-कभी धीमी रहती हैं।

• अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के कारण निष्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

• डिजिटल परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी मूल्यांकन से आयोग की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित हो रही है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासन की रीढ़ है, जो योग्य अधिकारियों के चयन में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसे पूर्ण स्वतंत्रता और तकनीकी सुदृढ़ता दी जाए, तो यह और अधिक निष्पक्ष व प्रभावी बन सकता है।

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“Panchayati Raj System has long success stories in Uttar Pradesh.” Corroborate with suitable examples. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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“उत्तर प्रदेश में पंचायती राज प्रणाली की सफलता की लंबी कहानियाँ हैं ।” उपयुक्त उदाहरणों से इसकी पुष्टि कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

पंचायती राज प्रणाली (Panchayati Raj System) भारत के ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बनी है। इससे ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और जनसहभागिता को नई दिशा मिली है।

मुख्य बिंदु:

• 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई।

• ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों स्तरों पर जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं।

• राज्य में लगभग 58,000 ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं।

• पंचायतों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क निर्माण जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।

• स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

• कई पंचायतों ने डिजिटल शासन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं — जैसे “ई-गवर्नेंस ग्राम” मॉडल।

• महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण ने स्थानीय नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन लाया।

• शाहजहाँपुर, बहराइच और बाराबंकी जिलों की पंचायतों ने सामुदायिक स्वास्थ्य व जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

• ग्राम निधि और जनसहयोग से पंचायतें आत्मनिर्भर बन रही हैं।

• पंचायत चुनावों ने ग्रामीण नागरिकों में राजनीतिक चेतना को प्रबल किया।

• सामाजिक न्याय और हाशिए के वर्गों की भागीदारी में वृद्धि हुई है।

• पंचायतें स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान करने में सफल रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की पंचायती राज प्रणाली ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है। यह जनसहभागिता, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।

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