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Discuss the impacts of Globalisation on Indian Society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय समाज पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

वैश्वीकरण (Globalization) का अर्थ है — विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण (Liberalization) के बाद भारत में वैश्वीकरण ने तीव्र गति से प्रभाव डाला। इसने भारतीय समाज के अनेक आयामों को परिवर्तित किया।

मुख्य प्रभाव:

  • आर्थिक प्रभाव: रोजगार के नए अवसर बढ़े, परंतु असमानता भी बढ़ी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: पश्चिमी जीवनशैली, पहनावा और उपभोक्तावाद का प्रसार हुआ।
  • शैक्षिक प्रभाव: तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार हुआ।
  • संचार क्रांति: इंटरनेट और मोबाइल ने सामाजिक जुड़ाव और जानकारी का प्रसार बढ़ाया।
  • महिलाओं की स्थिति: शिक्षा और रोजगार में अवसर बढ़े, परंतु सांस्कृतिक द्वंद्व भी उभरा।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: औद्योगिकीकरण और उपभोग ने पर्यावरणीय संकट बढ़ाया।
  • परिवार संरचना: संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों का चलन बढ़ा।

उपसंहार:

वैश्वीकरण ने भारतीय समाज को आधुनिक और विश्व से जुड़ा बनाया, परंतु इसके साथ सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं। अतः आवश्यक है कि भारत अपने मूल मूल्यों को बनाए रखते हुए वैश्वीकरण का संतुलित उपयोग करे।

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Introduce the major welfare schemes in the Uttar Pradesh State Budget 2025-26. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश राज्य के बजट 2025-26 में प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं का परिचय दीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

 उत्तर प्रदेश सरकार का बजट 2025–26 “समग्र विकास और सबका कल्याण” के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें समाज के कमजोर वर्गों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह बजट राज्य को आत्मनिर्भर और समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना कल्याण योजना – किसानों व भूमिधरों को आकस्मिक मृत्यु या अपंगता पर आर्थिक सहायता।
  • मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना – बालिकाओं की शिक्षा और संरक्षण हेतु वित्तीय सहायता।
  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना – गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता।
  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना – युवाओं को उद्यमिता व स्वरोजगार हेतु ऋण सुविधा।
  • मुख्यमंत्री युवा हब योजना – नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने हेतु सहायता।
  • मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना – महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और कौशल विकास पर केंद्रित।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण/शहरी) – गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराने हेतु।
  • मुख्यमंत्री फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना – छात्रों और युवाओं को डिजिटल सशक्तिकरण हेतु।
  • मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना – गरीबों को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
  • मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन – ग्रामीण घरों तक नल से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा योजना – नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन।
  • मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना – निर्धन परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा सुविधा।

निष्कर्ष (Conclusion): बजट 2025–26 की कल्याणकारी योजनाएँ समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने का प्रयास हैं। ये योजनाएँ प्रदेश के समावेशी विकास और सामाजिक न्याय को सशक्त बनाती हैं।

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How far the views of Swami Vivekananda’s are successful in developing the core ideals and values of morality in human behaviours? Discuss. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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मानव व्यवहार में नैतिकता के मूल आदर्शों एवं मूल्यों को विकसित करने में स्वामी विवेकानंद के विचार कहाँ तक सफल रहे हैं? विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

स्वामी विवेकानंद के विचार मानव जीवन में नैतिकता, आत्मबल और सेवा भावना के प्रतीक हैं। उन्होंने व्यक्ति के आंतरिक विकास को समाज के उत्थान से जोड़ा। उनकी शिक्षाएँ आज भी नैतिक मूल्यों के निर्माण की प्रेरणा देती हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • विवेकानंद ने “नैतिकता का आधार आत्मा की शुद्धता” को बताया।
  • उन्होंने सेवा को सर्वोच्च धर्म माना — “ईश्वर की सेवा मनुष्य की सेवा है।”
  • आत्मविश्वास, सत्य और निष्ठा को नैतिक जीवन की जड़ माना।
  • युवाओं को चरित्र निर्माण और अनुशासन का संदेश दिया।
  • उन्होंने धर्म को व्यवहारिक बनाया, कर्मयोग का संदेश दिया।
  • समाज में सहिष्णुता, समानता और करुणा की भावना को बल दिया।
  • उनके विचारों से मानवता, आत्मसंयम और सकारात्मक सोच का प्रसार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion): स्वामी विवेकानंद के विचारों ने मानव व्यवहार में नैतिक चेतना को जागृत किया। उनके आदर्श आज भी नैतिक समाज निर्माण के लिए प्रकाशस्तंभ बने हुए हैं।

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Discuss the composition and jurisdiction of the State High Court of Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश के राज्य उच्च न्यायालय के गठन व क्षेत्राधिकार की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। इसका गठन ब्रिटिश काल में हुआ था, और आज यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा तथा न्याय प्रदान करने का प्रमुख केंद्र है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थापना 17 मार्च 1866 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुई।
  • प्रारंभ में यह नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस हाईकोर्ट कहलाता था।
  • संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 के तहत राज्य उच्च न्यायालय की संरचना और कार्य तय किए गए हैं।
  • इसका मुख्य पीठ प्रयागराज में तथा खण्डपीठ (Bench) लखनऊ में स्थित है।
  • इसका क्षेत्राधिकार पूरे उत्तर प्रदेश राज्य तक विस्तृत है।
  • न्यायालय को मूल, अपीलीय और लेखापरीक्षा (writ jurisdiction) प्राप्त है।
  • यह राज्य सरकार और उसके अधिकारियों के विरुद्ध न्यायिक पुनरावलोकन करने में सक्षम है।

निष्कर्ष (Conclusion) – उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य में न्याय, विधि और संविधान की रक्षा का प्रमुख स्तंभ है। इसका व्यापक क्षेत्राधिकार नागरिक अधिकारों और न्यायिक पारदर्शिता को सुदृढ़ बनाता है।

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The French Revolution was a great result of enlightenment period.” – Comment. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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“फ्रांस की क्रान्ति प्रबोधनकाल का सुपरिणाम थी ।” – टिप्पणी कीजिए । “

Ans: भूमिका (Introduction):

फ्रांस की क्रांति (1789) यूरोप के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी। यह केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि विचारों की क्रांति भी थी। इस क्रांति की जड़ें प्रबोधनकाल (Age of Enlightenment) के उन विचारों में थीं जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व का संदेश दिया।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • प्रबोधनकाल (Enlightenment) ने मानव बुद्धि, तर्क और विज्ञान को महत्व देने की प्रेरणा दी।
  • दार्शनिकों जैसे रूसो (Rousseau), वोल्टेयर (Voltaire) और मोंतेस्क्यू (Montesquieu) ने निरंकुश राजतंत्र की आलोचना की।
  • रूसो के “Social Contract” सिद्धांत ने जनसत्ता (sovereignty of people) की अवधारणा को जन्म दिया।
  • मोंतेस्क्यू ने शासन में शक्ति-विभाजन (separation of powers) का विचार दिया, जो बाद में लोकतंत्र की नींव बना।
  • वोल्टेयर ने धार्मिक असहिष्णुता और चर्च के प्रभुत्व का विरोध किया।
  • तर्क और विवेक को प्रबोधनकाल ने पारंपरिक मान्यताओं पर श्रेष्ठ ठहराया।
  • फ्रांस की जनता में समानता और न्याय की भावना प्रबोधन विचारों से जागी।
  • इन विचारों ने राजा लुई 16वें की निरंकुश सत्ता को चुनौती देने का साहस दिया।
  • मुद्रण और प्रकाशन के विकास से प्रबोधन के विचार जन-जन तक पहुँचे।
  • क्रांति के घोषणापत्र “मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा” में प्रबोधन विचार झलकते हैं।
  • क्रांति के बाद धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की स्थापना प्रबोधन की उपलब्धि थी।
  • इस प्रकार, प्रबोधनकाल की वैचारिक चेतना ही क्रांति का बौद्धिक आधार बनी।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः फ्रांस की क्रांति केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं, बल्कि विचारों का विस्फोट थी। यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि फ्रांस की क्रांति प्रबोधनकाल का प्रत्यक्ष सुपरिणाम थी, जिसने आधुनिक लोकतांत्रिक युग की नींव रखी।

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What is the role of self help groups in rural development? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय:

स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं और गरीब वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम हैं। ये छोटे समूह आत्मनिर्भरता, सहयोग और वित्तीय समावेशन की भावना को बढ़ावा देते हैं। ग्रामीण विकास की नीतियों में इनकी भूमिका अब अत्यंत केंद्रीय हो गई है।

मुख्य बिंदु:

  • SHGs के माध्यम से गरीब महिलाएँ सामूहिक बचत और ऋण सुविधा प्राप्त करती हैं।
  • ये स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देते हैं।
  • ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक सशक्तिकरण बढ़ता है।
  • बैंकिंग प्रणाली से जुड़कर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत SHGs को संस्थागत समर्थन मिला है।
  • सामुदायिक निर्णयों में भागीदारी से स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है।

निष्कर्ष:

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी है। ये न केवल गरीबी घटाते हैं, बल्कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाते हैं।

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What are ‘Social Networking Sites’ and how does their uncontrolled use increase the possibilities of cyber attacks? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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‘सामाजिक संजाल स्थल’ क्या होते हैं ? और इनका अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं में किस प्रकार वृद्धि करता है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

‘सामाजिक संजाल स्थल’ (Social Networking Sites) वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हैं जहाँ उपयोगकर्ता आपसी संवाद, विचार, सूचना और सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। जैसे – फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X), यूट्यूब, लिंक्डइन आदि। ये आज सामाजिक सहभागिता और सूचना प्रसार का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सामाजिक संजाल स्थल लोगों को जोड़ने, अभिव्यक्ति और सूचना साझा करने का अवसर देते हैं।
  • ये व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति और जन-जागरूकता के प्रभावी साधन बन चुके हैं।
  • परंतु इनका अनियंत्रित और असावधान उपयोग साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
  • उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, लोकेशन और बैंक विवरण साझा करते हैं, जिन्हें साइबर अपराधी दुरुपयोग कर सकते हैं।
  • फिशिंग (Phishing) और मैलवेयर (Malware) जैसे हमले अक्सर सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से फैलते हैं।
  • नकली प्रोफाइल और फेक न्यूज़ से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि डेटा चोरी और पहचान की जालसाजी भी बढ़ती है।
  • सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) तकनीक द्वारा हैकर्स लोगों को भावनात्मक रूप से भ्रमित कर पासवर्ड या निजी जानकारी प्राप्त करते हैं।
  • अनियंत्रित उपयोग से डेटा लीकेज, गोपनीयता भंग और राष्ट्रीय सुरक्षा तक को खतरा हो सकता है।
  • साइबर हमले अक्सर सोशल मीडिया पर साझा लापरवाह जानकारी के कारण संभव होते हैं।
  • भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 तथा CERT-In जैसी संस्थाएँ साइबर सुरक्षा की निगरानी करती हैं।
  • सरकार “डिजिटल साक्षरता अभियान” के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
  • उपयोगकर्ताओं को मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और सावधानीपूर्ण साझा करने की आदत अपनानी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, सामाजिक संजाल स्थल जहाँ संवाद का सशक्त माध्यम हैं, वहीं अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। इनका सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक उपयोग ही डिजिटल युग में सुरक्षा और विश्वास का आधार बन सकता है।

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Biodiversity conservation of forest and water bodies in India is essential to maintain ecological balance. Elucidate in detail. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारत में वनों एवं जल स्रोतों के जैविक विविधता का संरक्षण पारिस्थितिक सन्तुलन बनाये रखने के लिए आवश्यक है । विस्तार से स्पष्ट कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारत अपनी भौगोलिक स्थिति और जलवायु विविधता के कारण विश्व के जैव विविधता (Biodiversity) हॉटस्पॉट्स में से एक है। यहाँ के वन और जल स्रोत अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का घर हैं। इनका संरक्षण न केवल प्रकृति के लिए, बल्कि पारिस्थितिक सन्तुलन (Ecological Balance) बनाये रखने के लिए भी अत्यावश्यक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • वनों की जैविक विविधता का महत्व:
  • ऑक्सीन उत्पादन और कार्बन अवशोषण: वन वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ाते औरकार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करते हैं।
  • मृदा संरक्षण: वृक्षों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोककर भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।
  • जल चक्र का संतुलन: वन वर्षा को आकर्षित करते और भूजल स्तर को बनाए रखते हैं।
  • वन्यजीवों का आवास: जैविक विविधता से युक्त वन अनेक जीव प्रजातियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखते हैं।
  • औषधीय पौधों का स्रोत: अनेक औषधियाँ वनों से प्राप्त वनस्पतियों पर आधारित होती हैं।
  • जलवायु नियंत्रण: वन तापमान और नमी को नियंत्रित कर जलवायु को संतुलित रखते हैं।
  • जल स्रोतों की जैव विविधता का महत्व:
  • जलचर जीवन का संरक्षण: नदियाँ, झीलें और समुद्र अनेक मछलियों, शैवालों और सूक्ष्म जीवों का घर हैं।
  • प्राकृतिक शुद्धिकरण प्रणाली: जल स्रोत प्रदूषकों को फ़िल्टर कर जल की गुणवत्ता बनाए रखते हैं।
  • खाद्य सुरक्षा: मत्स्य पालन से पोषण और आजीविका दोनों को बल मिलता है।
  • पर्यावरणीय स्थिरता: जल निकाय सूखे और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं।
  • पारिस्थितिक अन्तर्सम्बन्ध: वन और जल स्रोत मिलकर सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं।
  • मानव जीवन पर प्रभाव: जैविक विविधता का ह्रास मानव स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु पर प्रतिकूल असर डालता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – अनिवार्य है। यदि हम इन प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करें, तो सतत विकास और मानव अस्तित्व दोनों सुरक्षित रहेंगे।

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Outline the major challenges faced by the coast guard of India and explain the efforts taken to deal with them. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारतीय तट रक्षक बल के सम्मुख प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित कीजिये तथा उनसे निपटने के लिये किये गये प्रयासों की व्याख्या कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) की स्थापना 1978 में समुद्री सीमाओं की रक्षा, तस्करी रोकने और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई थी। यह बल देश की तटीय सुरक्षा का प्रमुख अंग है।

मुख्य चुनौतियाँ (Major Challenges):

  • 7,500 किमी लंबी तटरेखा की निरंतर निगरानी कठिन।
  • समुद्री आतंकवाद और घुसपैठ की बढ़ती घटनाएँ।
  • अवैध मछली पकड़ना और समुद्री तस्करी।
  • तेल रिसाव व प्रदूषण नियंत्रण में तकनीकी सीमाएँ।
  • अपर्याप्त जहाज, रडार व मानव संसाधन।
  • विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की चुनौती।
  • निपटने के प्रयास (Efforts to Address):
  • तटीय निगरानी नेटवर्क (CSN) व IMAC से रीयल-टाइम सूचना साझाकरण।
  • आधुनिक गश्ती जहाज, ड्रोन और एयर स्क्वाड्रन की तैनाती।
  • सागर रक्षा योजना के तहत तटीय चौकियों का विस्तार।
  • नौसेना व राज्य पुलिस के साथ संयुक्त अभ्यास (Joint Exercises)।
  • तटीय समुदायों को सुरक्षा सहयोग हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारतीय तट रक्षक बल आधुनिक तकनीक और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ बना रहा है, जिससे भारत की समुद्री संप्रभुता और तटीय स्थिरता सुनिश्चित होती है।

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What is India’s progress on hunger and poverty after 2014? Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

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2014 के पश्चात भूख और गरीबी पर भारत की प्रगति क्या है ? व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

2014 के बाद भारत सरकार ने भूख (Hunger) और गरीबी (Poverty) को कम करने के लिए कई व्यापक नीतियाँ और योजनाएँ शुरू कीं। इनका उद्देश्य था—“सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर आधारित समावेशी विकास सुनिश्चित करना। हालाँकि कुछ प्रगति हुई है, फिर भी भूख और कुपोषण जैसी समस्याएँ आज भी चुनौती बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • 2014 के बाद गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत लगातार घटा है।
  • नीति आयोग के अनुसार, 2013-14 से 2022 तक लगभग 24 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर आए।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) ने भोजन का अधिकार सुनिश्चित किया।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, और जल जीवन मिशन ने जीवन स्तर में सुधार किया।
  • मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण रोजगार के माध्यम से आय में वृद्धि की।
  • जन-धन योजना ने वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ाया, जिससे गरीब तबकों की पहुँच बैंकिंग तक हुई।
  • आयुष्मान भारत योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाया।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई और लीकेज घटाया।
  • कोविड-19 के दौरान सरकार की राहत योजनाओं ने गरीब वर्गों को आंशिक सहारा दिया।
  • फिर भी, ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024 में भारत की रैंक अभी भी चिंताजनक है (100 से नीचे)।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, बेरोजगारी और मूल्यवृद्धि जैसी समस्याएँ अब भी गरीबी को बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

2014 के बाद भारत ने गरीबी घटाने और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। फिर भी, स्थायी विकास के लिए रोजगार सृजन, पोषण सुधार और सामाजिक सुरक्षा को और सशक्त बनाना आवश्यक है।                  

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