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Distinguish between the Consolidated Fund and the Contingency Fund of the State of Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश राज्य की संचित निधि एवं आकस्मिक निधि के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

 उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेदों के अनुसार संचालित होती है। इसमें संचित निधि (Consolidated Fund) और आकस्मिक निधि (Contingency Fund) दो प्रमुख राज्य निधियाँ हैं। दोनों का उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • संचित निधि राज्य की मुख्य निधि है, जिसमें सभी राजस्व, ऋण और प्राप्तियाँ जमा होती हैं।
  • इस निधि से सरकारी व्यय केवल विधानसभा की स्वीकृति से किया जा सकता है।
  • यह निधि राज्य की सामान्य बजटीय आवश्यकताओं के लिए उपयोग होती है।
  • आकस्मिक निधि आपातकालीन या तत्काल व्यय की स्थिति में प्रयोग की जाती है।
  • इसे राज्यपाल के अधीन रखा जाता है, जो तत्काल भुगतान की अनुमति दे सकते हैं।
  • बाद में यह राशि विधानसभा द्वारा अनुमोदित की जाती है।
  • संचित निधि स्थायी प्रकृति की होती है, जबकि आकस्मिक निधि अस्थायी पुनर्भरणीय निधि है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, संचित निधि राज्य की नियमित वित्तीय गतिविधियों की आधारशिला है, जबकि आकस्मिक निधि आपात स्थितियों में त्वरित राहत प्रदान करने का साधन है। दोनों मिलकर राज्य की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।

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Critically explain the efforts of the State Government towards strengthening the health infrastructure in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

 उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढाँचा लंबे समय से असमान वितरण और संसाधनों की कमी से जूझता रहा है। राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। फिर भी, इन प्रयासों की प्रभावशीलता मिश्रित परिणाम दिखाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • मुख्यमंत्री आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा दी गई।
  • ई–संजय और टेलीमेडिसिन जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहलें ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ा रही हैं।
  • जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध कर विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार किया गया।
  • मिशन शक्ति और जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से मातृ–शिशु स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • कोविड–19 के दौरान ऑक्सीजन संयंत्र और ICU बेड जैसी संरचनाएँ विकसित की गईं।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी अभी भी प्रमुख चुनौती है।
  • स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी के बावजूद व्यवस्थापन और निगरानी की कमी बनी हुई है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के संकेत मिलते हैं, परन्तु गुणवत्ता, मानव संसाधन और ग्रामीण पहुँच में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। सतत निवेश और पारदर्शी प्रबंधन ही स्वास्थ्य ढाँचे को सशक्त बना सकते हैं।

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What was the policy of the British Government towards the Talukdars of Awadh after the revolution of 1857? Marks-8 UPPCS Mains 2024 GS-5

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सन् 1857 की क्रांति के पश्चात् ब्रिटिश सरकार की अवध के तालुकादारों के प्रति क्या नीति थी ?      

Ans: परिचय (Introduction) –

सन् 1857 की क्रांति में अवध के तालुकादारों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था, जिससे ब्रिटिश शासन को भारी चुनौती मिली। क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने अपने प्रशासनिक नियंत्रण को मज़बूत करने हेतु नई नीतियाँ अपनाईं। इन नीतियों का उद्देश्य तालुकादारों को शांत करना और उन्हें शासन का सहयोगी बनाना था।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • ब्रिटिशों ने आरंभिक दंडात्मक नीति छोड़कर समझौता नीति अपनाई।
  • कई तालुकादारों की जमींदारियाँ पुनः बहाल की गईं।
  • उन्हें राजस्व वसूली का अधिकार दिया गया ताकि वे शासन के प्रति निष्ठावान रहें।
  • भूमि सुधारों के माध्यम से किसानों पर नियंत्रण बनाए रखा गया।
  • तालुकादारों को स्थानीय प्रशासन में प्रमुख भूमिका दी गई।
  • अंग्रेजों ने उन्हें राजनीतिक रूप से आश्रित वर्ग बना दिया।
  • इस नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रिटिश प्रभुत्व सुदृढ़ हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion) –

 क्रांति के बाद की नीति ने तालुकादारों को ब्रिटिश शासन का सहयोगी बना दिया। इससे अंग्रेजों ने अवध में स्थिरता तो पाई, पर किसानों का शोषण बढ़ता गया।

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Write about the major republics located in Uttar Pradesh and their political system in the 6th century B.C. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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छठी शताब्दी ई.पू. में उत्तर प्रदेश में अवस्थित प्रमुख गणराज्यों एवं उनकी राजनीतिक व्यवस्था के बारे में लिखिए।

Ans:  परिचय (Introduction) –

 छठी शताब्दी ई.पू. भारत में राजनीतिक परिवर्तन का काल था, जब अनेक जनजातीय राज्यों का गठन हुआ। उत्तर प्रदेश इस समय कई गणराज्यों का केंद्र था, जहाँ जनता की भागीदारी आधारित शासन व्यवस्था विकसित हुई। ये गणराज्य राजतंत्र से भिन्न लोकतांत्रिक स्वरूप के प्रतीक थे।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • उत्तर प्रदेश में प्रमुख गणराज्य थे – वृज्जि, मल्ल, शाक्य, कोलिय, और कुरु।
  • वृज्जि संघ का केंद्र वैशाली था, जिसे सबसे संगठित गणराज्य माना जाता है।
  • प्रत्येक गणराज्य में सभा और समिति जैसी संस्थाएँ निर्णय लेने का कार्य करती थीं।
  • राजा या गणाध्यक्ष को जनता या कुल प्रमुखों द्वारा चुना जाता था।
  • शासन में लोकमत और सामूहिक निर्णय का महत्व था।
  • नीतियों का निर्धारण संसदनुमा परिषदों में होता था।
  • ये गणराज्य बाद में बौद्ध और जैन धर्म के प्रसार के केंद्र बने।

निष्कर्ष (Conclusion) –

 छठी शताब्दी ई.पू. के ये गणराज्य भारत में प्रारंभिक लोकतंत्र के उदाहरण थे। उत्तर प्रदेश इस राजनीतिक चेतना का प्रमुख केंद्र रहा, जिसने भारतीय शासन परंपरा को नई दिशा दी।

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Describe the cultural significance of ‘Prayagraj’ in ancient India.(8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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प्राचीन भारत में ‘प्रयागराज’ के सांस्कृतिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।

Ans:  परिचय (Introduction)

प्रयागराज, जिसे प्राचीन काल में ‘प्रयाग’ कहा जाता था, भारतीय सभ्यता का एक अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र नगर है। यह गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है। वैदिक काल से ही यह धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है, अर्थात सभी तीर्थों का राजा।
  • यहाँ गंगा–यमुना–सरस्वती संगम होने से इसका धार्मिक महत्व अत्यधिक है
  • ऋग्वेद और पुराणों में प्रयाग का उल्लेख मिलता है।
  • प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है।
  • अशोक स्तंभ तथा अकबर का किला यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरें हैं।
  • गुप्तकाल में यह ज्ञान और विद्या का प्रमुख केंद्र था।
  • अनेक संतों, कवियों और राजाओं ने यहाँ आध्यात्मिक साधना की।

निष्कर्ष (Conclusion) – प्रयागराज न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक जीवंत धरोहर भी है। इसका महत्व आज भी उतना ही गहरा है जितना प्राचीन काल में था।

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