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‘Unemployment is the only cause for the prevalent poverty in India’ – Comment. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-1

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‘बेरोजगारी भारत में व्याप्त निर्धनता का एक मात्र कारण है’ । टिप्पणी कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत में निर्धनता (Poverty) एक जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्या है। बेरोजगारी (Unemployment) इसका प्रमुख कारण है, परंतु यह एकमात्र कारण नहीं है। गरीबी कई संरचनात्मक और नीतिगत कारकों का परिणाम है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बेरोजगारी से आय के स्रोत सीमित हो जाते हैं, जिससे निर्धनता बढ़ती है।
  • जनसंख्या वृद्धि से रोजगार के अवसरों पर दबाव बढ़ता है।
  • शिक्षा और कौशल की कमी से लोग गुणवत्तापूर्ण रोजगार नहीं पा पाते।
  • कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और औद्योगिक विकास की कमी निर्धनता बढ़ाते हैं।
  • असमान आय वितरण और सामाजिक विषमता भी गरीबी का कारण हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे और निवेश की कमी से आर्थिक अवसर घटते हैं।
  • भ्रष्टाचार और नीतियों के कमजोर क्रियान्वयन से गरीब वर्ग लाभ से वंचित रहता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

यद्यपि बेरोजगारी निर्धनता का प्रमुख कारण है, पर यह अकेला नहीं है। समग्र विकास के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक समानता पर समान बल देना आवश्यक है।

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What kind of hindrances do regionalism create in the development of India ? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-1

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क्षेत्रवाद भारत के विकास में किस प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न करता है ?

Ans: परिचय (Introduction):

क्षेत्रवाद (Regionalism) का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र के हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखना। यह भारतीय लोकतंत्र में विविधता के साथ जुड़ा एक सामाजिक-राजनीतिक भाव है। परंतु जब यह अति रूप लेता है तो राष्ट्र की एकता और विकास में बाधा बनता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • क्षेत्रीय असमानता और संसाधनों के असमान वितरण से क्षेत्रवाद बढ़ता है।
  • इससे राष्ट्रीय एकता और अखंडता को खतरा उत्पन्न होता है।
  • विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में राजनीतिक टकराव पैदा होता है।
  • राज्यों के बीच जल, सीमा और रोजगार संबंधी विवाद बढ़ते हैं।
  • प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और असमान आर्थिक विकास होता है।
  • जातीय एवं भाषाई तनाव समाज में अस्थिरता लाते हैं।
  • राष्ट्रीय नीतियों के विरुद्ध क्षेत्रीय स्वार्थ हावी हो जाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion): क्षेत्रवाद भारत की प्रगति के मार्ग में सामाजिक और राजनीतिक विभाजन उत्पन्न करता है। संतुलित विकास और राष्ट्रीय एकता ही इसका स्थायी समाधान है।

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Discuss the role of Sardar Patel in the unification of India after independence. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-1

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स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारत के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका की विवेचना कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत की स्वतंत्रता के बाद देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती रियासतों के एकीकरण की थी। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और कुशल नेतृत्व से इस चुनौती का समाधान किया। उन्हें “भारत का लौह पुरुष” कहा जाता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • स्वतंत्रता के समय भारत में लगभग 562 देशी रियासतें थीं।
  • सरदार पटेल ने गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में रियासतों के विलय का दायित्व संभाला।
  • वी. पी. मेनन की सहायता से “संघ में विलय की रियासती नीति” बनाई।
  • अधिकांश रियासतों को शांतिपूर्ण समझौते से भारत में शामिल किया।
  • जूनागढ़ और हैदराबाद का विलय कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों से किया गया।
  • कश्मीर के विलय में भी उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई।
  • उनके प्रयासों से भारत एक मजबूत, एकीकृत राष्ट्र बना।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरदार पटेल ने अपने अद्वितीय नेतृत्व से बिखरे भारत को एकता के सूत्र में बांधा। उनका योगदान भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता का आधार स्तंभ है।

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Write a note on the contribution of Sir Syed Ahmad Khan in modern education. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-1

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आधुनिक शिक्षा में सर सैयद अहमद खान के योगदान पर एक टिप्पणी लिखिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

सर सैयद अहमद ख़ान 19वीं शताब्दी के प्रमुख समाज सुधारक और शिक्षाविद थे। उन्होंने मुस्लिम समाज में आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया। उनका उद्देश्य भारतीय मुसलमानों को अंग्रेज़ी शिक्षा से जोड़कर प्रगति के मार्ग पर लाना था।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • 1859 में “साइंटिफिक सोसाइटी” की स्थापना की, जिसने पश्चिमी ज्ञान का प्रसार किया।
  • 1875 में अलीगढ़ में “मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज” की स्थापना की, जो आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना।
  • आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के पक्षधर थे।
  • उन्होंने धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ तर्क और अनुभव पर बल दिया।
  • मुस्लिम समाज में शिक्षा की जागरूकता फैलाने का अभियान चलाया।
  • अंग्रेजी शासन के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
  • उनके विचारों ने “अलीगढ़ आंदोलन” को जन्म दिया।

निष्कर्ष (Conclusion):

सर सैयद अहमद ख़ान ने भारतीय मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई। उनका योगदान भारतीय समाज में नवजागरण का प्रतीक बन गया।

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Give an account of the Vedic literature. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-1

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वैदिक साहित्य का परिचय दीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

वैदिक साहित्य भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम और आधारभूत विरासत है। यह धार्मिक, दार्शनिक और सामाजिक विचारों का स्रोत माना जाता है। वैदिक काल (1500–600 ई.पू.) में रचित यह साहित्य संस्कृत भाषा में उपलब्ध है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • वैदिक साहित्य चार वेदों – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद – में विभाजित है।
  • प्रत्येक वेद के चार भाग हैं – संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद।
  • ऋग्वेद सबसे प्राचीन है और इसमें 1028 सूक्त हैं।
  • यजुर्वेद में यज्ञ के कर्मकांड का वर्णन मिलता है।
  • सामवेद संगीत और स्तोत्रों से संबंधित है।
  • अथर्ववेद में चिकित्सा, जादू-टोना और लोकजीवन की झलक मिलती है।
  • उपनिषद दार्शनिक चिंतन और आत्मा-ब्रह्म के ज्ञान पर केंद्रित हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

वैदिक साहित्य भारतीय ज्ञान परंपरा की नींव है। इसने भारतीय धर्म, दर्शन और समाज की दिशा निर्धारित की।

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Indo-Pak relations are illusion at present’. Discuss the inherent problems that bitters India-Pak relations repeatedly. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘वर्तमान में भारत-पाक सम्बन्ध एक छलावा है।’ उन अन्तर्निहित समस्याओं को स्पष्ट कीजिए जो भारत-पाक सम्बन्धों में बार-बार कटुता उत्पन्न करती है। ‘

Ans: परिचय:

भारत और पाकिस्तान के संबंध 1947 के विभाजन के बाद से ही तनाव और अविश्वास से घिरे रहे हैं। यद्यपि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता और समझौते कई बार हुए, परंतु वास्तविक संबंध स्थिर नहीं हो सके। “भारत-पाक संबंध एक छलावा हैं” — यह कथन उन गहरी समस्याओं की ओर संकेत करता है जो बार-बार कटुता उत्पन्न करती हैं।

मुख्य बिंदु:

1. कश्मीर विवाद: जम्मू-कश्मीर पर संप्रभुता का विवाद दोनों देशों के बीच स्थायी तनाव का मुख्य कारण है।

2. सीमा पार आतंकवाद: पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियाँ, विशेषकर पुलवामा (2019) और उरी (2016) जैसी घटनाएँ, विश्वास को कमजोर करती हैं।

3. राजनीतिक अस्थिरता: पाकिस्तान में बार-बार सैन्य शासन और कमजोर लोकतंत्र से नीति में निरंतरता नहीं रहती।

4. जल विवाद: सिंधु जल संधि के बावजूद जल-वितरण पर असंतोष और आरोप-प्रत्यारोप बने रहते हैं।

5. व्यापारिक अवरोध: द्विपक्षीय व्यापार को राजनीतिक कारणों से कई बार निलंबित किया गया है।

6. घुसपैठ और सीमा संघर्ष: नियंत्रण रेखा (LoC) पर बार-बार होने वाली गोलाबारी तनाव को बढ़ाती है।

7. पाकिस्तान की भारत-विरोधी नीतियाँ: शिक्षा, मीडिया और राजनीति में भारत-विरोधी भावनाएँ भड़काई जाती हैं।

8. आतंकवादी संगठनों को समर्थन: लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन पाकिस्तान से संचालित होते हैं।

9. कूटनीतिक संवाद का अभाव: वार्ता प्रक्रिया बार-बार आतंकवादी घटनाओं के कारण बाधित होती है।

10. अफगानिस्तान और चीन के साथ रणनीतिक समीकरण: पाकिस्तान का झुकाव चीन की ओर भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है।

11. परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा: दोनों देशों के बीच परमाणु संतुलन क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा करता है।

12. जनभावनाएँ और मीडिया भूमिका: दोनों देशों के मीडिया में राष्ट्रवादी बयानबाज़ी से आपसी अविश्वास बढ़ता है।

निष्कर्ष:

भारत-पाक संबंधों में शांति के प्रयास अक्सर सतही साबित हुए हैं क्योंकि मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। स्थायी संबंध तभी संभव हैं जब पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन बंद करे और परस्पर विश्वास बहाली के ठोस कदम उठाए जाएँ।

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How the Indian diaspora has emerged as an asset in the protection of national interest in America ? Analyse it. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

भारतीय प्रवासी किस प्रकार अमेरिका में राष्ट्रीय हितों के संवर्द्धन में परिसम्पत्ति के रूप में उभरे है ? विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय:

भारतीय प्रवासी (Indian Diaspora) अमेरिका में आज एक प्रभावशाली समुदाय के रूप में उभरा है। उनकी आर्थिक, शैक्षिक और तकनीकी उपलब्धियों ने न केवल अमेरिका में उनकी पहचान मजबूत की है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय हितों को भी सशक्त बनाया है। यह समुदाय भारत-अमेरिका संबंधों का एक महत्वपूर्ण सेतु बन चुका है।

मुख्य बिंदु:

1. आर्थिक योगदान: भारतीय प्रवासी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाते हैं और भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा प्रेषण (Remittances) भेजते हैं।

2. तकनीकी नेतृत्व: अमेरिकी Silicon Valley में बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ और उद्यमी हैं, जिन्होंने भारत की तकनीकी छवि को मज़बूत किया है।

3. नीति-निर्माण में प्रभाव: भारतीय-अमेरिकी नागरिक जैसे कमला हैरिस, विवेक मूर्ति आदि अमेरिकी राजनीति में प्रमुख पदों पर हैं, जो भारत-अनुकूल दृष्टिकोण रखते हैं।

4. द्विपक्षीय संबंधों में सेतु: भारतीय प्रवासी दोनों देशों के बीच आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहराई प्रदान करते हैं।

5. निवेश को प्रोत्साहन: प्रवासी समुदाय भारत में स्टार्टअप्स, आईटी और शिक्षा क्षेत्र में निवेश कर ‘मेक इन इंडिया’ को बल दे रहा है।

6. सांस्कृतिक कूटनीति: भारतीय त्यौहारों, योग और आयुर्वेद के प्रचार से प्रवासियों ने भारत की Soft Power को बढ़ाया है।

7. शिक्षा और अनुसंधान में योगदान: भारतीय मूल के वैज्ञानिक और शिक्षाविद वैश्विक नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

8. आपदा और संकट के समय सहयोग: कोविड-19 जैसी परिस्थितियों में प्रवासी भारतीयों ने भारत को आर्थिक और सामग्री सहायता दी।

9. जनमत निर्माण: भारतीय प्रवासी अमेरिकी मीडिया और थिंक टैंक्स में भारत की सकारात्मक छवि को प्रस्तुत करते हैं।

10. व्यापारिक साझेदारी: अमेरिकी कंपनियों में शीर्ष पदों पर भारतीयों की उपस्थिति भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को मजबूती देती है।

11. राजनीतिक लॉबिंग: US-India Political Action Committee (USINPAC) जैसे संगठन भारत समर्थक नीतियों के पक्ष में कार्य करते हैं।

12. राष्ट्रीय छवि निर्माण: सफल प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियाँ भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष:

अमेरिका में भारतीय प्रवासी भारत की आर्थिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति के वाहक बन गए हैं। उनकी उपलब्धियाँ और योगदान भारत के राष्ट्रीय हितों के संवर्द्धन में एक अमूल्य परिसंपत्ति सिद्ध हुए हैं।

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‘India is ready for the World leadership’. Analyse this Comment. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘भारत विश्व नेतृत्व के लिए तत्पर है।’ इस कथन की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय:

21वीं सदी में भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उसकी आर्थिक प्रगति, तकनीकी क्षमता, लोकतांत्रिक परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों ने उसे विश्व मंच पर सम्मानजनक स्थान दिलाया है। “भारत विश्व नेतृत्व के लिए तत्पर है” — यह कथन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

मुख्य बिंदु:

1. आर्थिक शक्ति: भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण भागीदार है।

2. जनसांख्यिकीय लाभ: युवा आबादी और मानव संसाधन भारत को नवाचार और उत्पादन का केंद्र बना रहे हैं।

3. लोकतांत्रिक मूल्य: भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जो मानवाधिकार और समावेशी शासन का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

4. वैज्ञानिक प्रगति: इसरो (ISRO) की उपलब्धियाँ, जैसे चंद्रयान-3 और गगनयान मिशन, भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

5. डिजिटल क्रांति: Digital India और UPI जैसे कार्यक्रम भारत को वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहे हैं।

6. वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज: भारत विकासशील देशों की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुखर रूप से उठाता है।

7. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भूमिका: G-20, BRICS, QUAD और BIMSTEC में भारत की सक्रिय भागीदारी उसकी वैश्विक दृष्टि को प्रदर्शित करती है।

8. जलवायु नेतृत्व: International Solar Alliance जैसी पहलें भारत को पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी बनाती हैं।

9. विदेश नीति में संतुलन: भारत ने अमेरिका, रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखा है।

10. रक्षा एवं अंतरिक्ष शक्ति: स्वदेशी हथियार निर्माण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता से भारत की रणनीतिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।

11. सांस्कृतिक कूटनीति: योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति ने भारत की Soft Power को विश्व स्तर पर फैलाया है।

12. चुनौतियाँ: गरीबी, असमानता, और पड़ोसी देशों से सुरक्षा संबंधी तनाव भारत की नेतृत्व क्षमता को सीमित कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और नैतिक रूप से विश्व नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है। यदि आंतरिक चुनौतियों का समाधान और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित रखा जाए, तो भारत वैश्विक नेतृत्व का केंद्र बन सकता है।

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What is Citizen’s Charter ? What is its role in Welfare of Citizens ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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नागरिक अधिकार पत्र क्या है ? नागरिकों के कल्याण में इसकी क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय :

नागरिक अधिकार पत्र (Citizens’ Charter) एक ऐसा दस्तावेज है जो सरकारी विभागों द्वारा जनता को दी जाने वाली सेवाओं के मानक, समयसीमा और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है। इसकी शुरुआत यूके में 1991 में हुई थी, और भारत में इसे सुशासन (Good Governance) के एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में अपनाया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों को पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल प्रशासन प्रदान करना है।

मुख्य बिंदु:

1. परिभाषा: नागरिक अधिकार पत्र वह घोषणा है जिसमें किसी विभाग की सेवाओं, समय-सीमा और शिकायत निवारण प्रक्रिया का विवरण होता है।

2. उद्देश्य: सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।

3. नागरिक-केंद्रित प्रशासन: यह शासन को नागरिकों की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

4. पारदर्शिता: नागरिकों को यह जानने का अधिकार देता है कि उन्हें कौन सी सेवा कब और कैसे मिलेगी।

5. जवाबदेही: यदि सेवाएँ समय पर न मिलें तो संबंधित अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

6. शिकायत निवारण तंत्र: प्रत्येक विभाग में शिकायत दर्ज करने और समाधान की प्रक्रिया निर्धारित होती है।

7. सेवा मानक निर्धारण: प्रत्येक सेवा की समयसीमा और गुणवत्ता का स्तर तय किया जाता है।

8. नागरिक सहभागिता: नागरिकों की प्रतिक्रिया लेकर नीतियों और सेवाओं में सुधार किया जा सकता है।

9. भ्रष्टाचार में कमी: प्रक्रियाओं की स्पष्टता से रिश्वतखोरी और अनावश्यक देरी घटती है।

10. सुशासन को प्रोत्साहन: यह पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता को बढ़ावा देता है।

11. उदाहरण: लोक सेवा गारंटी अधिनियम (जैसे – उत्तर प्रदेश जनहित गारंटी अधिनियम, 2011) नागरिक अधिकार पत्र का प्रभावी रूप है।

12. सीमाएँ: नागरिकों में जागरूकता की कमी, जवाबदेही तंत्र की कमजोरी और अधिकारियों की उदासीनता इसकी सफलता में बाधक हैं।

निष्कर्ष:

नागरिक अधिकार पत्र शासन को अधिक जनोन्मुखी और उत्तरदायी बनाता है। यदि इसे प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और नागरिक भागीदारी के साथ लागू किया जाए, तो यह सुशासन का सशक्त उपकरण सिद्ध हो सकता है।

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Discuss the various aspects relating to the management of Health Services in the State of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबन्धन से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं की व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य अवसंरचना, मानव संसाधन और डिजिटल प्रबंधन के क्षेत्र में अनेक सुधार किए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सभी नागरिकों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है।

मुख्य बिंदु:

1. प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला स्तर पर स्वास्थ्य ढाँचा: राज्य में Primary Health Centres (PHC), Community Health Centres (CHC) और District Hospitals के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाती हैं।

2. स्वास्थ्य अवसंरचना विस्तार: नई मेडिकल कॉलेजों, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और मातृ-शिशु कल्याण केंद्रों की स्थापना की जा रही है।

3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने, टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार हेतु प्रमुख कार्यक्रम है।

4. आयुष्मान भारत योजना: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवच प्रदान किया गया है।

5. ई-संजीवनी पोर्टल: टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श की सुविधा।

6. दवा उपलब्धता: जन औषधि केंद्रों और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत सस्ती दवाओं की आपूर्ति।

7. कोविड-19 प्रबंधन: परीक्षण, टीकाकरण और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण के माध्यम से संकट प्रबंधन की मिसाल पेश की।

8. महिला एवं बाल स्वास्थ्य: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहन।

9. स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण: डॉक्टरों, नर्सों और ANM कर्मचारियों के लिए निरंतर कौशल विकास कार्यक्रम।

10. निजी क्षेत्र की भागीदारी: PPP मॉडल (Public-Private Partnership) के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।

11. निगरानी एवं मूल्यांकन: जिला स्तर पर स्वास्थ्य संकेतकों की मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

12. चुनौतियाँ: ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी, अवसंरचना का अभाव और वित्तीय संसाधनों की सीमाएँ अभी भी बनी हुई हैं।

निष्कर्ष:

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं, परंतु चुनौतियाँ अब भी विद्यमान हैं। समग्र सफलता के लिए चिकित्सा अवसंरचना, मानव संसाधन और तकनीकी नवाचार में निरंतर निवेश आवश्यक है।

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