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What challenges is the Government facing in the implementing of welfare schemes for the most vulnerable sections? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

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अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सरकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है ?

Ans: परिचय (Introduction):

भारत में सरकार द्वारा अति संवेदनशील वर्गों (Vulnerable Sections) — जैसे निर्धन, अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग व वृद्धजन — के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को साकार करना है। किन्तु इनके प्रभावी क्रियान्वयन में सरकार को अनेक संरचनात्मक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • लाभार्थियों की सटीक पहचान (Identification of beneficiaries) में कठिनाई बनी रहती है।
  • योजनाओं का क्रियान्वयन कई विभागों में बिखरा होने से समन्वय की कमी होती है।
  • भ्रष्टाचार, दलाली व लीकेज (Leakage) से वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ नहीं पहुँचता।
  • आधार, बैंक खाता व डिजिटल साक्षरता की कमी से कई लोग योजनाओं से वंचित रहते हैं।
  • ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में अवसंरचना (Infrastructure) की कमी वितरण को बाधित करती है।
  • लाभार्थियों में योजना की जानकारी व जागरूकता का अभाव है।
  • योजनाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप पारदर्शिता को प्रभावित करता है।
  • निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली (Monitoring & Evaluation) पर्याप्त प्रभावी नहीं है।
  • डेटा प्रबंधन और वास्तविक समय पर ट्रैकिंग की सीमाएँ हैं।
  • सामाजिक भेदभाव और जातीय पूर्वाग्रह योजनाओं के निष्पक्ष क्रियान्वयन में बाधक बनते हैं।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय का अभाव संसाधनों के अपव्यय को बढ़ाता है।
  • बजटीय सीमाएँ और विलंबित फंड रिलीज़ भी बड़ी चुनौती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकार को योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सामाजिक भागीदारी को सशक्त करना होगा। केवल यही उपाय अति संवेदनशील वर्गों को सच्चे अर्थों में विकास की मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं।

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What role can the Finance Commission play in addressing regional disparities in India and what measures has it taken so far? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

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भारत में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में वित्त आयोग क्या भूमिका निभा सकता है और इसने अब तक क्या उपाय किए हैं ?

Ans: परिचय (Introduction):

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में क्षेत्रीय असमानताएँ (Regional Inequalities) एक प्रमुख चुनौती हैं। इन असमानताओं को कम करने में वित्त आयोग (Finance Commission) की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह आयोग केन्द्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के माध्यम से संतुलित विकास सुनिश्चित करता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • वित्त आयोग का गठन अनुच्छेद 280 के तहत हर पाँच वर्ष में किया जाता है।
  • इसका मुख्य कार्य केन्द्र और राज्यों के बीच राजस्व विभाजन (Tax Devolution) निर्धारित करना है।
  • आयोग वित्तीय संसाधनों का ऐसा वितरण करता है जिससे पिछड़े राज्यों को अधिक सहायता मिल सके।
  • यह राज्यों की वित्तीय क्षमता और आवश्यकताओं का तुलनात्मक मूल्यांकन करता है।
  • आयोग राज्यों की जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, आय स्तर और राजकोषीय अनुशासन जैसे मानदंडों को ध्यान में रखता है।
  • 14वें वित्त आयोग ने राज्यों को कुल कर राजस्व का 42% हिस्सा देने की अनुशंसा की, जिससे राज्यों की स्वायत्तता बढ़ी।
  • 15वें वित्त आयोग ने राज्यों के प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (Performance-based incentives) को जोड़ा।
  • विशेष सहायता पूर्वोत्तर, पहाड़ी और आकांक्षी जिलों के लिए दी गई।
  • आयोग ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अनुदान देने की व्यवस्था की।
  • इसने राज्यों के वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया।
  • आयोग की सिफारिशों से क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।
  • फिर भी, राज्य-स्तरीय नीति कार्यान्वयन में असमानताएँ बनी हुई हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

वित्त आयोग भारत में वित्तीय समानता और क्षेत्रीय संतुलन का प्रमुख साधन है। इसके विवेकपूर्ण सुझावों से राज्यों की आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

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How does the Indian Constitution compare with other modern constitutions in terms of flexibility and rigidity? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

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लचीलेपन और कठोरता के संदर्भ में भारतीय संविधान की तुलना अन्य आधुनिक संविधानों से कैसे की जा सकती है ?

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और संतुलित संविधान है, जिसमें न तो पूर्ण कठोरता है और न ही पूर्ण लचीलापन। यह विशेष रूप से इस प्रकार निर्मित किया गया है कि समय और परिस्थितियों के अनुसार संशोधन संभव हो सकें। लचीलापन और कठोरता के इस मिश्रण के कारण यह संविधान स्थायित्व और परिवर्तनशीलता दोनों को संतुलित करता है।

मुख्य बिंदु (12 Important Points):

  • ब्रिटेन का संविधान पूर्णतः लचीला है, क्योंकि वहाँ संसद सर्वोच्च है और संशोधन सामान्य कानूनों की तरह होते हैं।
  • अमेरिका का संविधान अत्यंत कठोर है; संशोधन के लिए दोनों सदनों और राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है।
  • भारत का संविधान इन दोनों के बीच का संतुलित रूप है।
  • अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया तीन प्रकार की है – सरल, विशेष, और राज्यों की सहमति से।
  • केवल संसद द्वारा संशोधन योग्य प्रावधान इसे लचीला बनाते हैं।
  • संघीय ढाँचे या न्यायपालिका से जुड़े प्रावधानों के लिए राज्यों की सहमति आवश्यक है, जो इसे कठोर बनाते हैं।
  • संविधान में अब तक 100 से अधिक संशोधन हुए हैं, जो इसके लचीलेपन का प्रमाण हैं।
  • फिर भी, मूल ढाँचे (Basic Structure) को परिवर्तित नहीं किया जा सकता, जो कठोरता दर्शाता है।
  • केशवानंद भारती मामला (1973) ने संविधान की मूल संरचना को सुरक्षित रखा।
  • इस संतुलन से संविधान समय के साथ विकसित होता रहा है।
  • अन्य आधुनिक संविधानों की तुलना में यह अधिक व्यावहारिक और अनुकूलनीय है।
  • इसकी यह प्रकृति भारतीय लोकतंत्र को स्थिरता और प्रगतिशीलता दोनों प्रदान करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारतीय संविधान का लचीलापन इसे समयानुकूल बनाता है, जबकि कठोरता इसके मूल मूल्यों की रक्षा करती है। इसी संतुलन के कारण यह संविधान विश्व के सबसे जीवंत और दीर्घजीवी संविधानों में स्थान रखता है।

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What are the implications of the revised appointment process of Election Commission for ensuring its independence? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

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चुनाव आयोग की स्वतन्त्रता सुनिश्चित करने के लिए उसकी संशोधित नियुक्ति प्रक्रिया के निहितार्थ क्या हैं ?

Ans: परिचय (Introduction):

भारत में चुनाव आयोग (Election Commission of India) लोकतंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता का प्रमुख आधार है। इसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत आवश्यक है। हाल ही में आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन किए गए हैं, जिनके गहरे निहितार्थ लोकतांत्रिक संतुलन पर पड़े हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • पूर्व में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती थी।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 में स्वतंत्र चयन समिति का सुझाव दिया था।
  • इसके अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल होने थे।
  • सरकार ने संशोधन कर मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को सदस्य बनाया।
  • यह संशोधन कार्यपालिका (Executive) के प्रभाव को बढ़ाता है।
  • इससे आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता पर प्रश्न उठे हैं।
  • विपक्ष और नागरिक संगठनों ने इसे “संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिकरण” की दिशा में कदम बताया।
  • सरकार का तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के अनुरूप है।
  • आयोग की स्वतंत्रता उसकी विश्वसनीयता और चुनावों की निष्पक्षता के लिए अनिवार्य है।
  • न्यायपालिका की उपस्थिति चयन प्रक्रिया को संतुलित और पारदर्शी बनाती थी।
  • संशोधित प्रक्रिया से शक्तियों का केंद्रीकरण बढ़ने का खतरा है।
  • दीर्घकाल में यह लोकतंत्र के संस्थागत ढाँचे को प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

संशोधित नियुक्ति प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। लोकतंत्र की सुदृढ़ता के लिए आवश्यक है कि आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष, संतुलित और पारदर्शी बनी रहे।

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Analyze the statement, “State legislatures are often seen as the voice of the states within India’s federal structure.” [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-2

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इस कथन का विश्लेषण कीजिए, “राज्य विधान-मंडलों को अक्सर भारत के संघीय ढाँचे के भीतर राज्यों की आवाज के रूप में देखा जाता है।”

Ans: परिचय (Introduction ):

भारत का संविधान संघीय (Federal) शासन प्रणाली पर आधारित है, जिसमें केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है। राज्य विधान-मंडल (State Legislature) राज्य स्तर पर जनता की प्रतिनिधि संस्था है। इसे भारत के संघीय ढाँचे में राज्यों की आवाज़ के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह राज्य की नीतियों, हितों और आवश्यकताओं को अभिव्यक्त करता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • भारत में 28 राज्यों में से अधिकांश के पास द्विसदनीय (Bicameral) या एकसदनीय (Unicameral) विधान-मंडल है।
  • विधान सभा (Legislative Assembly) राज्य की निचली सदन है, जो प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुनी जाती है।
  • विधान परिषद (Legislative Council) ऊपरी सदन है, जो विभिन्न सामाजिक समूहों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
  • राज्य विधान-मंडल राज्य की नीतियों, कानूनों और बजट को निर्धारित करता है।
  • यह केन्द्र की नीतियों पर भी चर्चा कर राज्य के दृष्टिकोण को सामने लाता है।
  • संघीय ढाँचे में यह संस्था राज्यों की स्वायत्तता को सुदृढ़ करती है।
  • विधान सभा राज्य सरकार की कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है।
  • यह केन्द्र-राज्य सम्बन्धों में संतुलन बनाए रखने का माध्यम है।
  • विधान परिषद् शिक्षाविदों, स्नातकों व शिक्षकों की राय को अभिव्यक्त करने का मंच है।
  • यह राज्य की समस्याओं और आकांक्षाओं को केन्द्र तक पहुँचाने का कार्य करती है।
  • राज्य विधान-मंडल के माध्यम से राज्य के नागरिक सीधे शासन प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
  • यह संघीय लोकतंत्र की आत्मा – ‘राज्यों की भागीदारी’ को मूर्त रूप देती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार राज्य विधान-मंडल भारत के संघीय ढाँचे में राज्यों की लोकतांत्रिक आवाज़ के रूप में कार्य करता है। यह न केवल राज्य के हितों की रक्षा करता है, बल्कि केन्द्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को भी सुदृढ़ बनाता है।

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Discuss India’s regional policy towards South-East Asia. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रति भारत की क्षेत्रीय नीति की विवेचना कीजिए।

Ans:  परिचय:

भारत की दक्षिण–पूर्व एशिया नीति एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। 1990 के दशक में शुरू की गई “Look East Policy” को बाद में “Act East Policy” में परिवर्तित किया गया। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के देशों के साथ रणनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को सशक्त बनाना है।

मुख्य बिंदु:

  • भारत ASEAN (Association of Southeast Asian Nations) का रणनीतिक साझेदार है।
  • नीति का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय व्यापार, संपर्कता और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना है।
  • Act East Policy (2014) ने भारत की भूमिका को अधिक सक्रिय और प्रभावशाली बनाया।
  • म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम जैसे देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंध मज़बूत हुए।
  • सड़क, जल और वायु मार्गों की कनेक्टिविटी परियोजनाएँ (जैसे India–Myanmar–Thailand Highway) प्रगति पर हैं।
  • भारत और ASEAN के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से व्यापारिक सहयोग बढ़ा है।
  • यह नीति चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन और इंडो-पैसिफिक रणनीति में भी सहायक है।

निष्कर्ष:

भारत की दक्षिण–पूर्व एशिया नीति पारस्परिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर आधारित है। यह नीति भारत को एशियाई परिदृश्य में एक सशक्त, संतुलित और सक्रिय शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

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Describe the organisational structure and funding of the World Health Organisation (WHO). [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की संगठनात्मक संरचना और वित्त-पोषण का वर्णन कीजिए।

Ans: परिचय:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization – WHO) की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को वैश्विक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई। यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशिष्ट एजेंसी है जो विश्व स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों, अनुसंधान और रोग नियंत्रण में समन्वय करती है।

मुख्य बिंदु :

  • WHO का मुख्यालय जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में स्थित है।
  • इसकी संगठनात्मक संरचना तीन स्तरों पर आधारित है – विश्व स्वास्थ्य सभा, कार्यकारी बोर्ड, और सचिवालय।
  • विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय है, जिसमें सभी सदस्य देश शामिल होते हैं।
  • कार्यकारी बोर्ड (Executive Board) में 34 विशेषज्ञ सदस्य होते हैं जो सभा के निर्णयों को लागू करते हैं।
  • महानिदेशक (Director-General) WHO के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
  • WHO का वित्त-पोषण दो स्रोतों से होता है – सदस्य देशों के नियमित अंशदान और स्वैच्छिक योगदान (Voluntary Contributions)।
  • हाल के वर्षों में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा विश्व बैंक जैसे संस्थानों से भी वित्तीय सहयोग प्राप्त होता है।

निष्कर्ष:

WHO वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ है। इसकी संरचना और वित्तीय व्यवस्था विश्व के देशों को स्वास्थ्य सहयोग और नीतिगत मार्गदर्शन से जोड़ती है।

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India-Maldives relations are linked to mutual interests. Explain. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

भारत-मालदीव सम्बन्ध परस्पर हितों से जुड़े हैं। स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय:

भारत और मालदीव के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामरिक दृष्टि से अत्यंत घनिष्ठ हैं। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और स्थिरता के साझा हितों से जुड़े हैं। इन संबंधों ने “Neighborhood First” नीति को और सशक्त बनाया है।

मुख्य बिंदु:

  • भारत मालदीव का सबसे निकटतम पड़ोसी और प्रमुख विकास साझेदार है।
  • दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और तस्करी नियंत्रण पर सहयोग है।
  • भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश किया है।
  • ‘मालदीव–भारत मित्रता परियोजनाएँ’ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती हैं।
  • 1988 में भारत ने ‘ऑपरेशन कैक्टस’ द्वारा मालदीव की स्थिरता बनाए रखने में मदद की।
  • दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन और सामरिक सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
  • पर्यटन, व्यापार और मानवीय सहायता के माध्यम से आपसी विश्वास गहराया है।

निष्कर्ष:

भारत–मालदीव संबंध परस्पर सम्मान, सुरक्षा और विकास के साझा हितों पर आधारित हैं। यह साझेदारी हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सहयोग का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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Examine the role of civil society in Indian administrative development. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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भारतीय प्रशासनिक विकास में नागरिक समाज की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

Ans: परिचय:

नागरिक समाज (Civil Society) सरकार और जनता के बीच सेतु का कार्य करता है। इसमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs), मीडिया, सामाजिक समूह और जागरूक नागरिक शामिल होते हैं। यह प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने में सहायक है।

मुख्य बिंदु (7 बुलेट्स):

  • नागरिक समाज नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाता है।
  • जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से सामाजिक सुधार को प्रोत्साहित करता है।
  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध निगरानी रखकर प्रशासन में पारदर्शिता लाता है।
  • सूचना का अधिकार (RTI) जैसे कानूनों के प्रभावी उपयोग से जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
  • गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता जैसे क्षेत्रों में सरकारी प्रयासों को सहयोग देता है।
  • प्रशासन और जनता के बीच संवाद एवं सहभागिता को मजबूत करता है।
  • आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में साझेदार की भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष:

नागरिक समाज ने भारतीय प्रशासन को अधिक उत्तरदायी और लोकतांत्रिक बनाया है। इसकी सक्रिय भागीदारी सुशासन और जनकल्याण की दिशा में एक मजबूत आधार प्रस्तुत करती है।

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What is the role of self help groups in rural development? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय:

स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं और गरीब वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम हैं। ये छोटे समूह आत्मनिर्भरता, सहयोग और वित्तीय समावेशन की भावना को बढ़ावा देते हैं। ग्रामीण विकास की नीतियों में इनकी भूमिका अब अत्यंत केंद्रीय हो गई है।

मुख्य बिंदु:

  • SHGs के माध्यम से गरीब महिलाएँ सामूहिक बचत और ऋण सुविधा प्राप्त करती हैं।
  • ये स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देते हैं।
  • ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक सशक्तिकरण बढ़ता है।
  • बैंकिंग प्रणाली से जुड़कर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत SHGs को संस्थागत समर्थन मिला है।
  • सामुदायिक निर्णयों में भागीदारी से स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है।

निष्कर्ष:

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी है। ये न केवल गरीबी घटाते हैं, बल्कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाते हैं।

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