UPPCS Mains

Home UPPCS Mains Page 3

Clarify the role of Civil Servants in strengthening the democratic process in India. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

0

भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण में सिविल सेवकों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय:

भारत में सिविल सेवक (Civil Servants) प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं। वे नीतियों को धरातल पर लागू करके लोकतांत्रिक शासन को प्रभावी बनाते हैं। उनकी निष्पक्षता, जवाबदेही और दक्षता लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

मुख्य बिंदु:

1. नीति-कार्यान्वयन: सिविल सेवक सरकार की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।

2. प्रशासनिक निरंतरता: राजनीतिक बदलावों के बावजूद शासन की स्थिरता और निरंतरता बनाए रखते हैं।

3. जनसेवा भावना: नागरिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर लोकतंत्र को जन-केंद्रित बनाते हैं।

4. विधि का शासन (Rule of Law): सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित कर संविधान की भावना को बनाए रखते हैं।

5. पारदर्शिता और जवाबदेही: सुशासन के सिद्धांतों को लागू कर जनता का विश्वास बढ़ाते हैं।

6. चुनाव प्रक्रिया में योगदान: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव मजबूत करते हैं।

7. नीतिगत सलाह: मंत्रीगण को नीतियों के निर्माण हेतु वस्तुनिष्ठ और तथ्यपरक सलाह देते हैं।

8. सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाकर समानता को प्रोत्साहित करते हैं।

9. नैतिक प्रशासन: ईमानदारी, तटस्थता और अनुशासन से प्रशासनिक विश्वसनीयता बनाए रखते हैं।

10. संकट प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं या सामाजिक तनाव की स्थिति में प्रशासनिक दक्षता से शांति और व्यवस्था बनाए रखते हैं।

11. नागरिक सहभागिता: जनसुनवाई, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा वितरण से नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।

12. सुधारात्मक भूमिका: शासन में नवाचार (innovation) और ई-गवर्नेंस से प्रशासन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाते हैं।

निष्कर्ष:

सिविल सेवक लोकतंत्र के मौन प्रहरी हैं जो शासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। उनकी ईमानदारी, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण की वास्तविक नींव है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Describe the law-making process in the Legislative Assembly of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

0

उत्तर प्रदेश की विधान सभा में विधि-निर्माण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश की विधान सभा (Legislative Assembly) राज्य की प्रमुख विधायी संस्था है, जो कानून निर्माण का मुख्य कार्य करती है। यह प्रक्रिया संविधान द्वारा निर्धारित नियमों और विधायी परंपराओं पर आधारित होती है। विधान निर्माण की प्रत्येक अवस्था में लोकतांत्रिक चर्चा और अनुमोदन आवश्यक होता है।

मुख्य बिंदु :

1. विधेयक का प्रारूप (Drafting of Bill): किसी मंत्री या सदस्य द्वारा नया कानून बनाने हेतु विधेयक का प्रारूप तैयार किया जाता है।

2. विधेयक के प्रकार: विधेयक दो प्रकार के होते हैं — सरकारी (Government Bill) और निजी सदस्य विधेयक (Private Member Bill)।

3. प्रथम पठन (First Reading): विधेयक को विधान सभा में प्रस्तुत किया जाता है और शीर्षक पढ़ा जाता है।

4. प्रकाशन (Publication): विधेयक को राज्य राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है ताकि सदस्यों को इसकी जानकारी हो।

5. द्वितीय पठन (Second Reading): इसमें विधेयक पर सामान्य चर्चा होती है और आवश्यकता पड़ने पर इसे समिति को भेजा जाता है।

6. समिति चरण (Committee Stage): समिति विधेयक का गहन परीक्षण कर संशोधन के सुझाव देती है।

7. रिपोर्ट प्रस्तुति: समिति अपनी रिपोर्ट विधान सभा को सौंपती है।

8. तृतीय पठन (Third Reading): विधेयक पर विस्तृत चर्चा कर मतदान कराया जाता है।

9. पारित होना: बहुमत से विधेयक पारित होने पर इसे विधान परिषद (यदि लागू हो) को भेजा जाता है।

10. परिषद द्वारा अनुमोदन: यदि परिषद 14 दिनों में संशोधन नहीं सुझाती, तो विधेयक स्वीकृत माना जाता है।

11. राज्यपाल की स्वीकृति: पारित विधेयक राज्यपाल को भेजा जाता है, जो उसे स्वीकृति, अस्वीकृति या पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।

12. अधिनियम बनना: राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात विधेयक राज्य अधिनियम (State Act) बन जाता है और राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है।

निष्कर्ष:

उत्तर प्रदेश की विधान सभा में विधि-निर्माण प्रक्रिया लोकतांत्रिक विमर्श और सहमति पर आधारित है।यह प्रणाली जनता की इच्छाओं को कानून का रूप देकर शासन को संवैधानिक वैधता प्रदान करती है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

What alternative mechanism of dispute resolution have emerged in recent years ? How far have they been effective ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

0

विवादों के समाधान के लिए, हाल के वर्षों में कौन-से वैकल्पिक तंत्र उभरे है ? वे कितने प्रभावी सिद्ध हुए है ?

Ans: परिचय:

भारत में पारंपरिक न्यायालयों पर बढ़ते भार और लंबित मामलों की समस्या के कारण वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र (Alternative Dispute Resolution – ADR) की अवधारणा तेजी से विकसित हुई है। ये तंत्र विवादों को तेज, सस्ता और मैत्रीपूर्ण तरीके से सुलझाने में सहायक हैं। हाल के वर्षों में इनकी प्रभावशीलता ने न्यायिक प्रणाली को नया विकल्प प्रदान किया है।

मुख्य बिंदु:

  • मध्यस्थता (Mediation): पक्षकारों के बीच समझौता कराने की प्रक्रिया, विशेषकर दीवानी मामलों में प्रभावी रही है।
  • सुलह (Conciliation): इसमें एक निष्पक्ष सुलहकर्ता पक्षों को समझौते तक पहुँचने में मदद करता है।
  • पंचायती न्याय (Arbitration): व्यावसायिक व अंतरराष्ट्रीय विवादों में प्रचलित, जिसमें न्यायालय की जगह पंच निर्णय करता है।
  • लोक अदालतें (Lok Adalats): राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तहत संचालित, लाखों छोटे-मोटे मामले निपटाए गए हैं।
  • परिवार न्यायालयों में मध्यस्थता केंद्र: पारिवारिक विवादों को संवेदनशीलता के साथ सुलझाने का माध्यम बने हैं।
  • ई-मध्यस्थता (E-Mediation): तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन विवाद निपटान की सुविधा बढ़ी है।
  • ग्रामीण स्तर पर ग्राम न्यायालय: स्थानीय विवादों को सुलझाने में ग्रामीण न्याय तक पहुंच आसान हुई है।
  • कॉर्पोरेट और व्यापारिक विवादों में संस्थागत मध्यस्थता केंद्र (जैसे NDIAC): भरोसेमंद मंच प्रदान करते हैं।
  • उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग: उपभोक्ताओं को सस्ता और तेज न्याय दिलाने में कारगर रहे हैं।
  • प्री-लिटिगेशन सुलह बोर्ड: अदालतों में जाने से पहले ही विवाद निपटाने की व्यवस्था करते हैं।
  • ADR को कानूनी मान्यता: आर्बिट्रेशन एंड कन्सिलिएशन एक्ट, 1996 और लीगल सर्विसेज अथॉरिटी एक्ट, 1987 ने इसे मजबूत आधार दिया।
  • चुनौतियाँ: प्रशिक्षित मध्यस्थों की कमी, जागरूकता का अभाव और कुछ मामलों में समझौते का पालन न होना।

निष्कर्ष:

वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र ने न्याय व्यवस्था का बोझ कम किया और शीघ्र समाधान का मार्ग खोला है। यदि इनकी पारदर्शिता, जागरूकता और संस्थागत क्षमता बढ़ाई जाए, तो ये न्याय तक पहुँच का प्रभावी साधन बन सकते हैं।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

How does the federal structure in India accommodates the diverse needs and aspiration of different states ? Are there any challenges, if yes, then how are they addressed ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

0

भारत में संघीय ढाँचा विभिन्न राज्यों की विविध आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को कैसे समायोजित करता है ? क्या इसके सम्मुख कुछ चुनौतियाँ भी है, यदि है, तो उसका समाधान कैसे किया जाता है ?

Ans: परिचय:

भारत का संघीय ढाँचा (Federal Structure) एक संविधानिक समझौता है जो एकता में विविधता को बनाए रखता है। यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करके शासन को संतुलित बनाता है। परंतु, विविध सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य बिंदु:

  • भारतीय संविधान ने शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों – संघ, राज्य और समवर्ती – में किया है।
  • यह विभाजन राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीति बनाने की स्वतंत्रता देता है।
  • वित्त आयोग राज्यों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है ताकि विकास का असमानता कम की जा सके।
  • भाषा, संस्कृति और धर्म की विविधता को संविधान द्वारा मान्यता दी गई है।
  • राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा, शिक्षा नीति और स्थानीय प्रशासन में लचीलापन दिया गया है।
  • अंतरराज्यीय परिषद् और नीति आयोग जैसे संस्थान सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देते हैं।
  • आपातकालीन स्थितियों में केंद्र को अधिक अधिकार मिलते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।
  • राजनीतिक दलों का राज्य और केंद्र स्तर पर समन्वय नीति-निर्माण में मदद करता है।
  • फिर भी, वित्तीय असमानता और संसाधन वितरण पर विवाद संघीय संतुलन को चुनौती देते हैं।
  • राज्यों द्वारा क्षेत्रीय अस्मिता या अलगाववाद की भावना कभी-कभी तनाव उत्पन्न करती है।
  • केंद्र का अत्यधिक हस्तक्षेप राज्यों की स्वायत्तता को सीमित करता है।
  • इन चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और सहकारी संघवाद की भावना आवश्यक है

निष्कर्ष:

भारतीय संघवाद लचीला और व्यावहारिक है, जो विविध राज्यों की आकांक्षाओं को संतुलित करता है। परंतु इसकी सफलता निरंतर संवाद, सहयोग और समान विकास के प्रयासों पर निर्भर करती है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Critically examine the increasing powers and role of Prime Minister. How does it impact other institutions ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

0

प्रधानमंत्री की बढ़ती शक्तियों और भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। अन्य संस्थाओं पर इसका कैसे प्रभाव पडता है ?

Ans: परिचय:

भारत में प्रधानमंत्री संसदीय लोकतंत्र का प्रमुख स्तंभ हैं। समय के साथ प्रधानमंत्री की शक्तियाँ और भूमिका काफी बढ़ी हैं, जिससे वे शासन का वास्तविक केंद्र बन गए हैं। परंतु इस शक्ति-संतुलन ने अन्य संस्थाओं की स्वायत्तता पर भी प्रभाव डाला है।

मुख्य बिंदु:

  • प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के नेता होते हैं और सरकार की नीतियों की दिशा तय करते हैं।
  • वे मंत्रियों की नियुक्ति, पदमुक्ति एवं कार्य-विभाजन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
  • नीति-निर्माण एवं प्रशासनिक निर्णयों में अंतिम अधिकार प्रायः प्रधानमंत्री के पास होता है।
  • संसद में बहुमत पर उनका नियंत्रण उन्हें अत्यधिक राजनीतिक शक्ति प्रदान करता है।
  • कैबिनेट का कार्य प्रायः ‘प्रधानमंत्री-केंद्रित’ हो गया है, जिसे “प्रधानमंत्री शासन” कहा जाता है।
  • प्रधानमंत्री का मीडिया, जनमत और नौकरशाही पर भी प्रभाव बढ़ा है।
  • पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ होने से वे राजनीतिक एजेंडा तय करते हैं।
  • विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत भूमिका निर्णायक हो गई है।
  • राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका व्यवहार में प्रतीकात्मक रह गई है।
  • संसद की भूमिका सीमित हो गई है क्योंकि अधिकांश निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिए जाते हैं।
  • संघीय ढाँचे में राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण बढ़ा है, जिससे ‘सहकारी संघवाद’ कमजोर पड़ता है।
  • न्यायपालिका और मीडिया पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिलता है, जिससे संस्थागत संतुलन प्रभावित होता है।

निष्कर्ष :

प्रधानमंत्री की बढ़ती शक्तियाँ शासन की स्थिरता और निर्णायकता के लिए उपयोगी हैं। परंतु लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही भी समान रूप से आवश्यक है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

What is the significance of India’s Presidency in G-20 ? Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

समूह -20 (G-20) में भारत की अध्यक्षता का क्या महत्व है ? विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

समूह-20 (G-20) विश्व की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का समूह है जो वैश्विक आर्थिक नीतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने 2023 में पहली बार इसकी अध्यक्षता की, जो उसके वैश्विक नेतृत्व और कूटनीतिक प्रभाव का प्रतीक है। यह अध्यक्षता भारत के “विश्वगुरु” और “वैश्विक दक्षिण की आवाज़” बनने के दृष्टिकोण को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • भारत की अध्यक्षता का विषय था — “वसुधैव कुटुम्बकम्” (One Earth, One Family, One Future)।
  • भारत ने जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, डिजिटल समावेशन और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर फोकस किया।
  • भारत ने ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज दी।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI मॉडल को विश्व स्तर पर सराहा गया।
  • भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ (African Union) को G-20 की स्थायी सदस्यता दी गई।
  • यह अध्यक्षता भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और संतुलित वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण रही।
  • भारत ने संवाद, सहयोग और समावेशिता की भावना के साथ वैश्विक नेतृत्व का परिचय दिया।

निष्कर्ष (Conclusion):

G-20 की अध्यक्षता ने भारत को विश्व मंच पर निर्णायक भूमिका में स्थापित किया। यह न केवल भारत की आर्थिक शक्ति बल्कि उसकी मानवीय और नैतिक नेतृत्व क्षमता का भी प्रतीक बनी।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Explain the rationale behind India’s involvement in QUAD. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘क्वाड’ में भारत की भागीदारी के औचित्य की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

‘क्वाड’ (QUAD – Quadrilateral Security Dialogue) एक रणनीतिक समूह है जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मुक्त नौवहन सुनिश्चित करना है।

भारत की इसमें भागीदारी उसकी रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा नीतियों के अनुरूप है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और शक्ति संतुलन बनाए रखना चाहता है।
  • क्वाड चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का एक माध्यम है।
  • यह समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन रेज़िलिएंस पर सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और सागर (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण को यह मजबूती देता है।
  • क्वाड के माध्यम से भारत को उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा साझेदारी के अवसर मिलते हैं।
  • यह बहुपक्षीय मंच भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को भी रेखांकित करता है।
  • भारत क्वाड को किसी सैन्य गठबंधन की बजाय सहयोग मंच के रूप में देखता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत की क्वाड में भागीदारी उसका रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए वैश्विक साझेदारी को संतुलित करने का प्रयास है। यह न केवल सुरक्षा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

The failure of ‘SAARC’ forced India to strengthen ‘BIMSTEC’. Explain. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘सार्क’ की असफलता ने भारत को ‘बिम्सटेक’ (BIMSTEC) को सशक्त बनाने के लिए बाध्य किया। विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) क्षेत्रीय एकता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बना था। परंतु राजनीतिक मतभेदों, विशेषकर भारत-पाकिस्तान तनावों के कारण सार्क निष्क्रिय हो गया। इसके परिणामस्वरूप भारत ने बिम्सटेक (BIMSTEC) को क्षेत्रीय सहयोग का नया मंच बनाया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सार्क की बैठकों का स्थगन भारत-पाक तनावों का सीधा परिणाम रहा है।
  • बिम्सटेक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं।
  • यह संगठन दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है, जिससे भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” को बल मिलता है।
  • बिम्सटेक आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा, संपर्क और आपदा प्रबंधन पर केंद्रित है
  • इसमें पाकिस्तान की अनुपस्थिति भारत को क्षेत्रीय नेतृत्व का अवसर देती है।
  • भारत ने बिम्सटेक को सार्क का विकल्प बनाते हुए क्षेत्रीय कूटनीति को पुनर्परिभाषित किया है।
  • हाल के वर्षों में BIMSTEC Summit और Connectivity Master Plan इसके सशक्तिकरण के संकेत हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सार्क की विफलता ने भारत को नई रणनीतिक दिशा दी है। बिम्सटेक के माध्यम से भारत क्षेत्रीय सहयोग और एशियाई एकीकरण की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

“The application of Information and Communication Technology (I.C.T.) is for delivering government service.” Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

0

“सरकारी सेवा देने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.) एक अनुप्रयोग है।” व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology – ICT) आधुनिक शासन प्रणाली की रीढ़ बन चुकी है। यह सरकार और नागरिकों के बीच एक सेतु का कार्य करती है। आईसीटी के प्रयोग से सरकारी सेवाएँ अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुलभ हो गई हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • ICT के माध्यम से ई-गवर्नेंस (E-Governance) को बढ़ावा मिला है।
  • नागरिक सेवाएँ जैसे — जन्म प्रमाणपत्र, भूमि रिकॉर्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल आदि ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
  • इससे पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) में वृद्धि हुई है।
  • डिजिटल इंडिया जैसी पहल ICT के सफल उपयोग के उदाहरण हैं।
  • सरकारी प्रक्रियाओं में समय और लागत की बचत होती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुँच बढ़ी है।
  • डेटा प्रबंधन और नीति निर्माण में भी ICT महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार, ICT ने शासन को नागरिक-केंद्रित और कुशल बनाया है। यह “सुशासन” (Good Governance) प्राप्त करने का एक प्रभावी उपकरण बनकर उभरा है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Write an analytical note on Self Help Group’s composition and their functions. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

स्वयं सहायता समूह की संरचना और उनके कार्यों पर एक विश्लेषणात्मक टिप्पणी कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) ग्रामीण विकास की एक प्रभावी अवधारणा है, जो महिलाओं एवं कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बनी है। यह समूह सामूहिक बचत, ऋण और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसकी संरचना विकेन्द्रित, सहभागी एवं लोकतांत्रिक ढंग से निर्मित होती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रत्येक SHG में सामान्यतः 10 से 20 सदस्य होते हैं।
  • सदस्य समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से होते हैं।
  • समूह का नेतृत्व अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • नियमित बैठकें, बचत संग्रह और लघु ऋण वितरण इसकी प्रमुख क्रियाएँ हैं।
  • यह बैंक लिंकेज कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय संस्थानों से जुड़ा होता है।
  • निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
  • यह ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता, शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के अवसर देता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ाया है इनके माध्यम से सामाजिक समानता, आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Popular Posts

My Favorites

What are the main challenges facing the production, distribution and marketing...

0
उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं? सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करते हुए विज्ञान...