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“Transparency and Accountability are complementary to each other.” Comment. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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“पारदर्शिता एवं जवाबदेही एक दूसरे के पूरक है।” टिप्पणी कीजिए।

Ans: भूमिका:

लोक प्रशासन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुशासन के दो मूल स्तंभ हैं। पारदर्शिता से नागरिकों को शासन की गतिविधियों की जानकारी मिलती है, जबकि जवाबदेही यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता का दुरुपयोग न हो। दोनों का संबंध आपस में गहराई से जुड़ा है।

मुख्य बिंदु:

  • पारदर्शिता से शासन की नीतियाँ, निर्णय और व्यय जनता के सामने स्पष्ट होते हैं।
  • यह नागरिकों को शासन में भागीदारी और निगरानी का अवसर देती है।
  • जवाबदेही यह सुनिश्चित करती है कि अधिकारी अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी रहें।
  • पारदर्शिता के बिना जवाबदेही का मूल्यांकन संभव नहीं है।
  • सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • जब शासन पारदर्शी होता है, तो भ्रष्टाचार और अपारदर्शी निर्णयों में कमी आती है।
  • जवाबदेही नागरिक विश्वास को सुदृढ़ बनाती है, जिससे शासन अधिक प्रभावी होता है।

निष्कर्ष:

इस प्रकार पारदर्शिता और जवाबदेही एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों मिलकर लोकतंत्र में जनहित, विश्वास और सुशासन की नींव को मजबूत करते हैं।

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How the power of Governor to Pardon is different from the power of the President under Article 72 of the Indian Constitution ? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान का अधिकार राष्ट्रपति की अधिकार से किस प्रकार भिन्न है ?

Ans: भूमिका :

भारतीय संविधान में दया, क्षमा, उपशमन और दंड परिवर्तन के अधिकार राष्ट्रपति (अनुच्छेद 72) और राज्यपाल (अनुच्छेद 161) दोनों को दिए गए हैं। इनका उद्देश्य न्याय के साथ मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना है। किंतु दोनों के अधिकारों की सीमा और क्षेत्र अलग-अलग हैं।

मुख्य बिंदु:

  • संवैधानिक आधार: राष्ट्रपति का अधिकार अनुच्छेद 72 में, जबकि राज्यपाल का अनुच्छेद 161 में निहित है।
  • प्रभाव क्षेत्र: राष्ट्रपति का अधिकार पूरे भारत पर लागू होता है, जबकि राज्यपाल का अधिकार केवल अपने राज्य तक सीमित है।
  • विधायी क्षेत्र: राष्ट्रपति केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत अपराधों पर दया दे सकते हैं; राज्यपाल केवल राज्य कानूनों के अंतर्गत।
  • मृत्युदंड: राष्ट्रपति मृत्युदंड को क्षमा कर सकते हैं; राज्यपाल केवल उसे स्थगित या परिवर्तित कर सकते हैं।
  • न्यायिक शक्तियाँ: राष्ट्रपति सैन्य न्यायालयों द्वारा दिए गए दंड को भी क्षमा कर सकते हैं; राज्यपाल नहीं।
  • अधिकार का उपयोग: राष्ट्रपति केंद्र सरकार की सलाह पर कार्य करते हैं; राज्यपाल राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर।
  • विस्तार का स्तर: राष्ट्रपति का दया अधिकार अधिक व्यापक और प्रभावशाली है।

निष्कर्ष :

अतः राज्यपाल का क्षमादान अधिकार सीमित है और केवल राज्य के अपराधों तक सीमित रहता है, जबकि राष्ट्रपति का अधिकार राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक और सर्वोच्च होता है।

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Mention three demerits of Judicial Activism. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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न्यायिक सक्रियता के तीन दोषों का वर्णन कीजिए ।

Ans: भूमिका:

न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से न्यायालय संविधान की भावना के अनुरूप कार्यपालिका और विधायिका के निर्णयों की समीक्षा करता है। हालांकि इसका उद्देश्य जनहित की रक्षा करना है, परंतु अत्यधिक हस्तक्षेप कई बार नकारात्मक प्रभाव भी छोड़ता है।

मुख्य बिंदु:

  • सत्ता पृथक्करण का उल्लंघन: न्यायपालिका का प्रशासनिक या विधायी क्षेत्र में हस्तक्षेप संविधान की त्रिसत्ता सिद्धांत को कमजोर करता है।
  • लोकतांत्रिक जवाबदेही में कमी: न्यायाधीश निर्वाचित नहीं होते, फिर भी नीतिगत निर्णय लेने लगते हैं।
  • नीतिगत असंतुलन: न्यायिक आदेश कभी-कभी सरकार की नीतियों के व्यावहारिक क्रियान्वयन को बाधित करते हैं।
  • अत्यधिक जनहित याचिकाएँ (PIL misuse): तुच्छ या राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित याचिकाएँ न्यायिक समय की हानि करती हैं।
  • विधायिका की भूमिका में हस्तक्षेप: न्यायालय कभी-कभी कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ जाता है।
  • प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव: बार-बार के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अधिकारियों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता घटती है।
  • न्यायिक विश्वसनीयता पर प्रश्न: अत्यधिक हस्तक्षेप से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होता है।

निष्कर्ष :

इस प्रकार न्यायिक सक्रियता तभी लाभकारी है जब वह संवैधानिक सीमाओं में रहे। अति सक्रियता लोकतंत्र की संतुलित संरचना को कमजोर कर सकती है।

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Why the 42nd Amendment is called a revision of the Indian Constitution? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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42 वें भारतीय संशोधन को संविधान का पुनः लेखन क्यों कहा जाता है ?

Ans:  भूमिका:

सन् 1976 में किया गया 42वां संविधान संशोधन भारतीय संविधान के इतिहास का सबसे व्यापक संशोधन माना जाता है। इसे “मिनी संविधान” या “संविधान का पुनः लेखन” कहा गया क्योंकि इसने संविधान के अनेक भागों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए। इस संशोधन से संविधान की मूल भावना पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।

मुख्य बिंदु:

  • प्रस्तावना में “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द जोड़े गए।
  • मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51A) का नया भाग जोड़ा गया।
  • न्यायपालिका की शक्तियों पर नियंत्रण के प्रयास किए गए।
  • संसद को व्यापक संशोधन शक्तियाँ प्रदान की गईं।
  • केन्द्र सरकार की शक्तियाँ राज्यों की तुलना में बढ़ाई गईं।
  • न्यायिक पुनरावलोकन की सीमा तय करने का प्रयास किया गया।
  • नियोजन नीति और समाजवादी सिद्धांतों पर बल दिया गया।

निष्कर्ष:

इस प्रकार 42वां संशोधन संविधान की संरचना, स्वरूप और दिशा में व्यापक बदलाव लाया। इसलिए इसे भारतीय संविधान का पुनः लेखन कहा जाता है।

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Why the Preamble is called the Philosophy of the Indian Constitution?[Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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प्रस्तावना को भारतीय संविधान का दर्शन क्यों कहा जाता है ?

Ans:  भूमिका (Introduction):

भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान की आत्मा मानी जाती है। यह न केवल संविधान की मूल भावना को व्यक्त करती है, बल्कि उसके उद्देश्यों और आदर्शों का दार्शनिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। इसे संविधान का दर्पण कहा जाता है क्योंकि इसमें भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सोच का सार निहित है।

मुख्य बिंदु (Important points):

  • प्रस्तावना संविधान के मूल उद्देश्यों – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—को स्पष्ट करती है।
  • यह भारत को “संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य” घोषित करती है।
  • यह संविधान की भावना और आदर्शों की दिशा निर्धारित करती है।
  • प्रस्तावना नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के मूल स्रोत की प्रेरणा देती है
  • यह संविधान निर्माताओं की विचारधारा और उद्देश्य को दर्शाती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे संविधान की “मूल संरचना” का भाग माना है।
  • यह भारत की लोकतांत्रिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

निष्कर्ष:

अतः प्रस्तावना संविधान के आदर्शों और मूल्यों का सार प्रस्तुत करती है। यही कारण है कि इसे भारतीय संविधान का दर्शन कहा जाता है।

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What positive and negative changes occurred due to the media revolution in India and around the world? Explain the role of media in national and international security. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

भारत तथा विश्व में मीडिया से क्या सकारात्मक व नकारात्मक परिवर्तन हुए है? राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा में मीडिया का क्या योगदान है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मीडिया आधुनिक समाज का एक प्रभावशाली स्तंभ है, जो सूचना, विचार और जनमत निर्माण का प्रमुख साधन है। भारत और विश्व में मीडिया ने राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाए हैं। इन परिवर्तनों में जहाँ सकारात्मक पहलू हैं, वहीं इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सकारात्मक परिवर्तन: मीडिया ने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है।
  • इसने लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त किया और जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाई।
  • सोशल मीडिया ने आम नागरिक को अपनी आवाज़ बुलंद करने का अवसर दिया।
  • आपदा, आतंकवाद और संकट के समय त्वरित सूचना से राहत कार्यों में सहयोग मिला।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया ने देशों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन दिया।
  • नकारात्मक परिवर्तन: फेक न्यूज और भ्रामक प्रचार से सामाजिक विभाजन बढ़ा।
  • सनसनीखेज़ रिपोर्टिंग ने समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता घटाई।
  • राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव ने मीडिया की निष्पक्षता को प्रभावित किया।
  • सोशल मीडिया पर अफवाहें और ट्रोलिंग ने सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाया।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में मीडिया ने आतंकवाद, सीमाई तनाव और साइबर खतरों पर जनचेतना बढ़ाई।
  • अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा में यह वैश्विक संकटों, युद्धों और कूटनीतिक घटनाओं पर सही सूचना देकर शांति के प्रयासों को सशक्त करता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

मीडिया राष्ट्र और विश्व को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम है। यदि यह जिम्मेदारी और सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करे, तो यह सुरक्षा, शांति और विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

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Money laundering poses a serious threat to a country’s economic sovereignty. Information and communication technology has made it more challenging.” Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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“अवैध धन स्थानान्तरण देश की आर्थिक प्रभुसत्ता के लिए गम्भीर खतरा है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने इसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है।” व्याख्या कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

अवैध धन स्थानान्तरण (Illegal Money Transfer) या मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अवैध कमाई को वैध रूप में दिखाया जाता है। यह देश की आर्थिक स्थिरता और वित्तीय प्रणाली के लिए बड़ा खतरा है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के विकास ने इसे और जटिल बना दिया है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • अवैध धन स्थानान्तरण से कर चोरी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है।
  • यह देश की आर्थिक प्रभुसत्ता (Economic Sovereignty) को कमजोर करता है क्योंकि पूंजी का अनियंत्रित बहिर्गमन होता है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन लेन-देन ने अपराधियों को गुप्त रूप से धन स्थानांतरित करने का आसान माध्यम दिया है।
  • क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब के उपयोग से धन का स्रोत छिपाना और कठिन हो गया है।
  • इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय नीतियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक वित्तपोषण (Terror Financing) को बढ़ाता है।
  • सरकार ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 लागू किया है।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) इस पर निगरानी रखती हैं।
  • Know Your Customer (KYC) और PAN–Aadhaar linking से पहचान सत्यापन को मजबूत किया गया है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी ने निगरानी बढ़ाई है, परंतु साइबर अपराधियों ने नए तकनीकी तरीके अपनाए हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे FATF (Financial Action Task Force) के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
  • डिजिटल साक्षरता और डेटा सुरक्षा के उपाय इस खतरे को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

अवैध धन स्थानान्तरण आर्थिक सुरक्षा और नीति निर्माण की नींव को कमजोर करता है। सशक्त नियामक ढाँचा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी सतर्कता से ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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Distinguish between natural and manmade disasters. Also, elucidate the effectiveness of the disaster management system in India. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं में अन्तर स्पष्ट करें। साथ ही, भारत में आपदा प्रबन्धन प्रणाली की प्रभावशीलता स्पष्ट करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

आपदाएँ दो प्रकार की होती हैं – प्राकृतिक (Natural) और मानव निर्मित (Man-made)। ये मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। भारत, अपने भौगोलिक विविधता के कारण, दोनों प्रकार की आपदाओं के प्रति संवेदनशील है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्राकृतिक आपदाएँ – वे आपदाएँ जो प्रकृति की शक्तियों से उत्पन्न होती हैं, जैसे भूकम्प, बाढ़, चक्रवात, सूखा आदि।
  • मानव निर्मित आपदाएँ – वे आपदाएँ जो मानव की गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं, जैसे औद्योगिक दुर्घटनाएँ, रासायनिक रिसाव, परमाणु दुर्घटनाएँ आदि।
  • प्राकृतिक आपदाएँ अप्रत्याशित होती हैं, जबकि मानव निर्मित आपदाएँ प्रायः लापरवाही या तकनीकी विफलता से होती हैं।
  • भारत विश्व के उन देशों में है जहाँ लगभग 60% भूमि भूकम्प संभावित क्षेत्र में है।
  • देश के तटीय भागों में चक्रवात और सुनामी का खतरा बना रहता है।
  • मानव निर्मित आपदाओं में भोपाल गैस त्रासदी (1984) प्रमुख उदाहरण है।
  • भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 लागू किया गया।
  • इसके तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना हुई।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) व जिला आपदा प्राधिकरण (DDMA) स्थानीय स्तर पर कार्य करते हैं।
  • NDRF (National Disaster Response Force) त्वरित राहत व बचाव कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती है।
  • सरकार ने ‘Sendai Framework for Disaster Risk Reduction’ के अनुरूप नीति अपनाई है।
  • समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से तैयारी में सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत की आपदा प्रबंधन प्रणाली निरंतर सुदृढ़ हो रही है, परंतु स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। समन्वित प्रयासों से ही आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।

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What are India’s main achievements in biotechnology? How will these help in the upliftment of poor sections of society? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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जैव प्रौद्योगिकी में भारत की मुख्य उपलब्धियाँ कौन-सी हैं? इनसे समाज के गरीब वर्ग के उत्थान में कैसे मदद मिलेगी?

Ans: परिचय (Introduction):

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीवित कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों और उनके जैविक घटकों का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाता है। भारत ने कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग जैसे क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति की है।

भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ (Major Achievements of India in Biotechnology):

  • हरित क्रांति के बाद जैव क्रांति (Bio-Revolution): उच्च उत्पादकता वाली फसलों और रोग-प्रतिरोधी बीजों का विकास।
  • Bt कपास (Bt Cotton): कीट-प्रतिरोधी कपास की फसल से कृषि उत्पादन में वृद्धि।
  • COVID-19 वैक्सीन विकास: भारत बायोटेक द्वारा कोवैक्सिन का सफल निर्माण।
  • बायोफार्मास्यूटिकल्स: इंसुलिन, वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसे उत्पादों का घरेलू उत्पादन।
  • बायोफ्यूल उत्पादन: गन्ना, जैव कचरे और शैवाल से स्वच्छ ईंधन का विकास।
  • जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट: भारतीय जनसंख्या के आनुवंशिक मानचित्रण की पहल।
  • कृषि जैव प्रौद्योगिकी: सूखा-रोधी और पोषक तत्वों से भरपूर फसलों का विकास।
  • बायोइन्फॉर्मेटिक्स: जैविक डाटा विश्लेषण हेतु कंप्यूटर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा।
  • बायोफर्टिलाइज़र और बायोपेस्टिसाइड्स: रासायनिक प्रदूषण कम करने में सहायक।
  • डी.बी.टी. (Department of Biotechnology) द्वारा नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन।
  • राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी मिशन: अनुसंधान एवं उद्योग के बीच सेतु का कार्य।
  • मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी: सस्ती दवाओं और निदान तकनीकों का विकास।

गरीब वर्ग के उत्थान में योगदान (Contribution to Upliftment of Poor):

  • रोग-प्रतिरोधी बीजों से किसानों की आय में वृद्धि।
  • सस्ती वैक्सीन और दवाओं से स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ हुईं।
  • बायोफ्यूल उद्योग में ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े।
  • पोषक तत्वों से युक्त फसलों से कुपोषण में कमी।
  • जैविक खेती से लागत में कमी और पर्यावरण की रक्षा।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत की जैव प्रौद्योगिकी उपलब्धियाँ न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के माध्यम से समाज के गरीब वर्ग के सर्वांगीण उत्थान की दिशा में भी निर्णायक कदम हैं।

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What steps are being taken to meet the continuously increasing demand of energy resources in India? Discuss with special reference to renewable and sustainable energy resources. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

भारत में ऊर्जा संसाधनों की लगातार बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं? विशेष रूप से अक्षय एवं टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, जहाँ ऊर्जा संसाधनों की माँग निरंतर बढ़ रही है। पारंपरिक स्रोतों जैसे कोयला और पेट्रोलियम पर अत्यधिक निर्भरता पर्यावरणीय संकट को जन्म दे रही है। इसलिए भारत अब अक्षय (Renewable) और टिकाऊ (Sustainable) ऊर्जा स्रोतों की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।

भारत में ऊर्जा माँग पूरी करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम (Major Steps Taken to Meet Energy Demand):

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission): 280 GW सौर ऊर्जा उत्पादन लक्ष्य (2030 तक)।
  • राष्ट्रीय पवन ऊर्जा नीति: पवन ऊर्जा के उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहन।
  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना: नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर ग्रिड एकीकरण हेतु।
  • इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA): सौर ऊर्जा के वैश्विक सहयोग में भारत की अग्रणी भूमिका।
  • हाइड्रोपावर विकास: छोटे और मध्यम जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा।
  • बायो-ऊर्जा और कचरे से ऊर्जा कार्यक्रम: कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति: ईंधन खपत कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने हेतु।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE): ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री कुसुम योजना: किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध कराना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को प्रोत्साहन: निजी क्षेत्र के लिए कर रियायतें और निवेश सुरक्षा।
  • हाइड्रोजन मिशन: हरित हाइड्रोजन को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के रूप में विकसित करना।
  • राज्यों में ऊर्जा नीति सुधार: विकेन्द्रीकृत सौर परियोजनाओं और माइक्रोग्रिड का विस्तार।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है। सौर, पवन और हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित नीतियाँ न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता लाएँगी बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास को भी सुनिश्चित करेंगी।

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