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Explain the role of emotional intelligence for good governance and administration. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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सुशासन और प्रशासन के लिए संवेगात्मक बुद्धि की भूमिका की व्याख्या कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

संवेगात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence) का अर्थ है—अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझने, नियंत्रित करने और सकारात्मक रूप से उपयोग करने की क्षमता। सिविल सेवकों के लिए यह केवल बौद्धिक योग्यता से अधिक आवश्यक गुण है। यह सुशासन (Good Governance) और प्रभावी प्रशासन की आधारशिला बनती है।

मुख्य बिंदु (7 Important Points):

  • यह लोकसेवक को तनावपूर्ण परिस्थितियों में शांत और संतुलित बनाए रखती है।
  • सहानुभूति (Empathy) के माध्यम से जनता की भावनाओं और जरूरतों को समझने में मदद करती है।
  • आत्म-जागरूकता (Self-awareness) से अधिकारी अपने निर्णयों को नैतिक और तार्किक रख पाता है।
  • संबंध प्रबंधन (Relationship Management) से टीम वर्क और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
  • यह संघर्ष समाधान और संवाद कौशल को प्रभावी बनाती है।
  • भावनात्मक रूप से बुद्धिमान अधिकारी मानव-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देते हैं।
  • इससे शासन में विश्वास, करुणा और पारदर्शिता की भावना विकसित होती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः संवेगात्मक बुद्धि सुशासन के लिए एक नैतिक व प्रशासनिक पूरक शक्ति है।

यह सिविल सेवक को संवेदनशील, न्यायप्रिय और जनोन्मुख बनाती है।

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How can liberality and objectivity be fostered among civil servants? Give your suggestion. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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सिविल सेवकों के बीच उदारता और वस्तुनिष्ठता को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है? अपना सुझाव दीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सिविल सेवकों के कार्य का उद्देश्य जनहित की पूर्ति और न्यायपूर्ण शासन सुनिश्चित करना होता है। इसके लिए उनके भीतर उदारता (Tolerance) और वस्तुनिष्ठता (Objectivity) जैसे गुणों का होना अत्यंत आवश्यक है। ये गुण प्रशासन को निष्पक्ष, मानवीय और प्रभावी बनाते हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • नैतिक शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से संवेदनशीलता और निष्पक्ष सोच विकसित की जा सकती है।
  • विविध सामाजिक समूहों से संवाद बढ़ाकर सांस्कृतिक सहिष्णुता और समझ को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाकर व्यक्तिगत पूर्वाग्रह को कम किया जा सकता है।
  • टीम वर्क और सहभागिता आधारित प्रशासन से सहयोग और सम्मान की भावना बढ़ती है।
  • नियमित आत्ममूल्यांकन और फीडबैक तंत्र से सुधार और आत्मचिंतन की प्रवृत्ति विकसित होती है।
  • वरिष्ठ अधिकारियों का आदर्श आचरण अधीनस्थों में वस्तुनिष्ठता की प्रेरणा देता है।
  • प्रोत्साहन और पुरस्कार प्रणाली के माध्यम से निष्पक्ष और उदार व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः प्रशिक्षण, संवाद और मूल्य-आधारित कार्यसंस्कृति से उदारता और वस्तुनिष्ठता को सुदृढ़ किया जा सकता है। इन गुणों से सिविल सेवक प्रशासन में न्याय, पारदर्शिता और मानवता के मूल्यों को जीवंत रखते हैं।

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Discuss any two important attributes which you consider important for public servant. Justify your answer. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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किन्हीं दो महत्वपूर्ण गुणों की विवेचना कीजिए जिन्हें आप लोक-सेवक के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। तर्कसंगत व्याख्या कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोकसेवक प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ होता है, जिस पर जनकल्याण की जिम्मेदारी होती है। उसके आचरण और निर्णयों से सरकार की विश्वसनीयता निर्धारित होती है। अतः कुछ नैतिक और व्यक्तित्वगत गुण लोकसेवक के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) सत्यनिष्ठा (Integrity):

  • यह लोकसेवक को ईमानदारी और नैतिकता के मार्ग पर बनाए रखती है।
  • भ्रष्टाचार, पक्षपात और अनुचित प्रभावों से मुक्त निर्णय लेने में मदद करती है।
  • सत्यनिष्ठ अधिकारी जनता के बीच विश्वास और सम्मान अर्जित करता है।

(2) सहानुभूति (Empathy):

  • यह लोकसेवक को जनता की समस्याओं और भावनाओं को समझने की क्षमता देती है।
  • गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करती है।
  • सहानुभूतिपूर्ण अधिकारी मानवता और न्याय पर आधारित प्रशासन को बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः सत्यनिष्ठा और सहानुभूति लोकसेवक के व्यक्तित्व की दो अनिवार्य विशेषताएँ हैं।

इनसे प्रशासनिक कार्य न केवल प्रभावी बल्कि मानवीय और नैतिक भी बनता है।

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Describe various components of attitude and discuss factors that influence attitude formation. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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अभिवृत्ति के विभिन्न अवयवों का वर्णन कीजिए तथा अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों का विवेचन कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

अभिवृत्ति (Attitude) किसी व्यक्ति की सोच, भावना और व्यवहार का स्थायी मानसिक रुझान है। यह तय करती है कि व्यक्ति किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति के प्रति कैसा दृष्टिकोण रखेगा। अभिवृत्ति का निर्माण अनेक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों से होता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • अभिवृत्ति के तीन प्रमुख अवयव (Components) होते हैं:
  • संज्ञानात्मक (Cognitive): व्यक्ति के विचार, विश्वास और ज्ञान से संबंधित।
  • भावात्मक (Affective): किसी विषय के प्रति व्यक्ति की भावनाएँ या संवेदनाएँ।
  • व्यवहारात्मक (Behavioral): व्यक्ति का बाहरी आचरण या प्रतिक्रिया।
  • अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक (Factors) हैं—
  • परिवार और सामाजिक परिवेश: प्रारंभिक अनुभव और मूल्य प्रणाली से।
  • शिक्षा और मीडिया: नए विचारों और सूचनाओं के माध्यम से दृष्टिकोण बनाते हैं।
  • व्यक्तिगत अनुभव: सफलता या असफलता से उत्पन्न भावनात्मक प्रभाव।
  • समूह प्रभाव (Peer Influence): मित्रों व सहकर्मियों का दृष्टिकोण व्यक्ति को प्रभावित करता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः अभिवृत्ति व्यक्ति के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग है जो उसके व्यवहार को दिशा देता है। इसका निर्माण निरंतर सामाजिक अनुभवों और शिक्षा से होता है।

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“Concealment of Information impedes public access and involvement”. In the light of this statement discuss the importance of information sharing and transparency in Government. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

“सूचना का छिपाव सार्वजनिक पहुंच और भागीदारी को बाधित करता है।”, – इस कथन के आलोक में सरकार में सूचना साझा करने और पारदर्शिता के महत्व पर चर्चा करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोकतांत्रिक शासन में नागरिकों का शासन प्रक्रियाओं में सहभागिता अधिकार है। सूचना का छिपाव इस सहभागिता को सीमित कर देता है और शासन में अविश्वास पैदा करता है। इसलिए सरकार में सूचना साझा करना और पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • सूचना का अधिकार (RTI) नागरिकों को सरकारी कार्यप्रणाली पर निगरानी का अवसर देता है।
  • पारदर्शिता जवाबदेही और जिम्मेदारी की भावना को सशक्त बनाती है।
  • सूचना साझा करने से भ्रष्टाचार, पक्षपात और कुप्रशासन में कमी आती है।
  • यह जनता को नीति निर्माण और क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
  • खुली सूचना व्यवस्था जनविश्वास और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाती है।
  • मीडिया और सिविल सोसाइटी को शासन की समीक्षा और सुधार में सहायक बनाती है।
  • पारदर्शी शासन से सरकार की वैधता और नैतिक आधार मजबूत होता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः सूचना साझा करना और पारदर्शिता सुशासन (Good Governance) के मूल तत्व हैं। इनसे ही नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास, सहयोग और सहभागिता का वातावरण बनता है।

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In the era of Globalization International ethics is the need of hour for ensuring peace and stability among the nations”. Explain critically. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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“वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रों के मध्य शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र समय की मांग है।”, आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

वैश्वीकरण (Globalization) ने विश्व के राष्ट्रों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से परस्पर जुड़ दिया है। इस युग में किसी एक देश की नीतियाँ अन्य देशों को सीधे प्रभावित करती हैं। अतः अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र (International Ethics) वैश्विक शांति और स्थिरता का अनिवार्य आधार बन गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र राष्ट्रों के बीच न्याय, समानता और सहयोग के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करता है।
  • यह मानवता के हित को राष्ट्रीय स्वार्थों से ऊपर रखने की प्रेरणा देता है।
  • युद्ध, शोषण और पर्यावरणीय दोहन जैसी समस्याओं के समाधान हेतु नैतिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
  • विकसित देशों का दायित्व है कि वे विकासशील देशों के प्रति सहयोग और निष्पक्षता दिखाएँ।
  • वैश्विक संस्थाएँ (जैसे—UN, WHO, WTO) तभी प्रभावी बन सकती हैं जब उनके निर्णय नैतिक सिद्धांतों पर आधारित हों।
  • परंतु व्यवहार में कई बार राष्ट्र अपने राजनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।
  • इसलिए अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र की सफलता नैतिक प्रतिबद्धता और पारदर्शिता पर निर्भर करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

निष्कर्षतः, अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र आज की वैश्विक व्यवस्था में शांति और संतुलन का मार्गदर्शक है। जब राष्ट्र नैतिक आचरण अपनाएँगे तभी वास्तविक वैश्विक सौहार्द और स्थिरता संभव होगी।

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A child learns values by what he observes around him”. Discuss the role of family and society in the formation of values in the light of this statement. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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“बालक अपने चतुर्दिक जो देखता है, उससे मूल्यों को सीखता है” – इस कथन के आलोक में मूल्यों के निर्माण में परिवार और समाज की भूमिका की विवेचना कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मूल्य (Values) किसी व्यक्ति के जीवन की नैतिक दिशा निर्धारित करते हैं। बालक का व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होता, बल्कि उसके परिवेश से विकसित होता है। वह अपने परिवार और समाज से देखकर, सुनकर और अनुभव करके मूल्य सीखता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • परिवार बालक का प्रथम विद्यालय होता है, जहाँ वह सत्य, ईमानदारी, और अनुशासन जैसे मूल्य सीखता है।
  • माता-पिता के आचरण से बालक आदर्श व्यवहार का अनुकरण करता है।
  • घर का वातावरण – प्रेम, सहयोग और सहिष्णुता – बालक की भावनात्मक स्थिरता बनाता है।
  • समाज बालक को सामाजिक मूल्य जैसे समानता, न्याय, और सहअस्तित्व सिखाता है।
  • विद्यालय, मित्र समूह और मीडिया भी मूल्य निर्माण में सहायक माध्यम बनते हैं।
  • समाज की सांस्कृतिक परंपराएँ और रीति-रिवाज नैतिकता की जड़ों को मजबूत करते हैं।
  • परिवार और समाज के समन्वित प्रयास से बालक में जिम्मेदारी और नैतिक चेतना विकसित होती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः परिवार और समाज बालक के मूल्य-निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। इनके आदर्श व्यवहार से ही एक नैतिक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण होता है।

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Examine the relevance of the following in the context of civil service. a) Spirit of service b) Courage of firm conviction. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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सिविल सेवा के सन्दर्भ में निम्नलिखित की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए। अ) सेवा भाव ब) दृढ़ विश्वास का साहस।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सिविल सेवा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है। इसमें लोकहित, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व सर्वोपरि होते हैं। सेवा भाव और दृढ़ विश्वास का साहस, दोनों ही गुण एक आदर्श लोकसेवक की पहचान हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • सेवा भाव लोकसेवक को जनता की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।
  • यह करुणा, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
  • लोकसेवक को आत्मकेंद्रित न होकर सार्वजनिक कल्याण के प्रति समर्पित रखता है।
  • दृढ़ विश्वास का साहस नैतिकता और सत्य के मार्ग पर टिके रहने की शक्ति देता है।
  • यह लोकसेवक को राजनीतिक या व्यक्तिगत दबावों से स्वतंत्र होकर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • नैतिक दुविधाओं की स्थिति में यह गुण सही के पक्ष में खड़े रहने का साहस प्रदान करता है।
  • दोनों गुण मिलकर प्रशासन में नैतिक नेतृत्व और जनविश्वास को सशक्त करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः सेवा भाव और दृढ़ विश्वास का साहस सिविल सेवक के चरित्र की दो आधारशिलाएँ हैं।

इनके समन्वय से प्रशासन जनहितकारी, नैतिक और उत्तरदायी बनता है।

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What do you understand by Moral insight? How does it help in Moral situation of civil servants? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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नैतिक अन्तर्दृष्टि से आप क्या समझते हैं? लोकसेवकों की नैतिक परिस्थिति में यह किस प्रकार सहायक है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

नैतिक अन्तर्दृष्टि (Moral Insight) का अर्थ है—सही और गलत के बीच भेद करने की गहरी समझ। यह व्यक्ति को अपने आचरण और निर्णयों में नैतिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करने की दिशा देती है। लोकसेवकों के लिए यह अंतर्दृष्टि ईमानदारी, निष्पक्षता और सार्वजनिक हित बनाए रखने की नींव है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • यह लोकसेवक को जटिल परिस्थितियों में नैतिक निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
  • व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सार्वजनिक कल्याण को प्राथमिकता देने में सहायता करती है।
  • भ्रष्टाचार, पक्षपात और शक्ति दुरुपयोग से बचाव का आधार बनती है।
  • पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को सुदृढ़ करती है।
  • नैतिक दुविधाओं में विवेकपूर्ण संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
  • सेवा के आदर्शों जैसे सत्यनिष्ठा, करुणा और सहिष्णुता को प्रोत्साहित करती है।
  • प्रशासनिक निर्णयों में मानवता और न्याय के मूल्यों का समावेश सुनिश्चित करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार नैतिक अन्तर्दृष्टि लोकसेवकों के लिए एक नैतिक दिशा-सूचक का कार्य करती है। यह उनके कार्य को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जनोन्मुख बनाती है।

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Examine state government’s efforts, initiatives and policy directions in the medical and healthcare sphere with reference to Uttar Pradesh Health Policy 2018. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 के संदर्भ में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयासों, पहलों और नीति निर्देशों का परीक्षण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 राज्य में सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस नीति का लक्ष्य सभी नागरिकों को समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना और प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना को मजबूत करना है। राज्य सरकार ने इस नीति के तहत चिकित्सा क्षेत्र में अनेक सुधारात्मक कदम और नवाचार अपनाए हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • मुख्य उद्देश्य: ‘सबका स्वास्थ्य–सबके लिए स्वास्थ्य’ के लक्ष्य के अनुरूप सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) सुनिश्चित करना।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचा सुदृढ़ीकरण: प्रत्येक ब्लॉक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) को सशक्त किया गया।
  • आयुष्मान भारत योजना का समन्वय: गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा प्रदान की गई।
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: जननी सुरक्षा योजना और मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी का प्रयास।
  • चिकित्सा शिक्षा में सुधार: नए मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग कॉलेजों और पैरामेडिकल संस्थानों की स्थापना की गई।
  • ई-स्वास्थ्य पहल: ई-हॉस्पिटल, टेलीमेडिसिन और हेल्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।
  • रोग नियंत्रण कार्यक्रम: टीबी, मलेरिया, डेंगू और कुपोषण जैसी बीमारियों के नियंत्रण हेतु विशेष अभियान चलाए गए।
  • आपातकालीन चिकित्सा सेवा: 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के माध्यम से त्वरित सहायता सुनिश्चित की गई।
  • जन-जागरूकता अभियान: ‘पोषण अभियान’, ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे कार्यक्रमों से स्वास्थ्य व्यवहार में सुधार।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: PPP (Public-Private Partnership) मॉडल के तहत निजी क्षेत्र को स्वास्थ्य ढाँचा सुदृढ़ करने में जोड़ा गया।
  • महिला एवं किशोरी स्वास्थ्य: ‘मिशन शक्ति’ और किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से महिला स्वास्थ्य सशक्तिकरण।
  • वित्तीय प्रबंधन: स्वास्थ्य बजट में वृद्धि और योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर बल।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 ने राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा दी है। इन पहलों ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सशक्त बनाया है।

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