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Discuss the nature and objectives of the first Ayush University established in Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में स्थापित प्रथम आयुष विश्वविद्यालय के स्वरूप और उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

भारत की परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य का प्रथम आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किया है। यह विश्वविद्यालय आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा प्रणालियों के समन्वित विकास हेतु समर्पित है। इसकी स्थापना से राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई दिशा प्राप्त हुई है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • स्थापना वर्ष: उत्तर प्रदेश का प्रथम आयुष विश्वविद्यालय वर्ष 2020 में स्थापित किया गया।
  • नाम: विश्वविद्यालय का नाम है महाराज सुहेलदेव राज्य आयुष विश्वविद्यालय, जो भदोही (पूर्व में सिद्धार्थनगर) में स्थित है।
  • प्रमुख उद्देश्य: पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के अध्ययन, शोध और प्रसार को प्रोत्साहित करना।
  • आयुष पद्धतियों का एकीकरण: आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी की शिक्षा को एक मंच पर लाना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: आयुष संस्थानों में उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और मानकीकरण सुनिश्चित करना।
  • अनुसंधान एवं नवाचार: पारंपरिक चिकित्सा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक अनुसंधान को प्रोत्साहन।
  • स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • जन-जागरूकता: प्राकृतिक उपचार और जीवनशैली सुधार के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना।
  • संस्थानिक संबद्धता: राज्य के सभी आयुष कॉलेजों और संस्थानों को इस विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक स्तर पर आयुष चिकित्सा की पहचान और प्रसार को बढ़ावा देना।
  • रोजगार सृजन: आयुष क्षेत्र में शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना।
  • सरकारी दृष्टिकोण: यह विश्वविद्यालय ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश, स्वस्थ भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

निष्कर्ष (Conclusion):

महाराज सुहेलदेव राज्य आयुष विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा के पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि भारतीय चिकित्सा परंपरा को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित कर रहा है।

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Uttar Pradesh has an important place in the propagation of Buddhism. Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण स्थान है। व्याख्या कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म के उद्भव, विकास और प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ बुद्ध के जीवन से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ घटीं, जिन्होंने बौद्ध धर्म को विश्वव्यापी स्वरूप दिया। इस प्रदेश की भूमि बुद्ध के उपदेशों, शिक्षाओं और स्मृतियों से अनुप्राणित मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • लुम्बिनी के समीप कपिलवस्तु: सिद्धार्थ गौतम का बाल्यकाल कपिलवस्तु (वर्तमान सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश के निकट) में बीता।
  • सारणाथ (वाराणसी): बुद्ध ने यहाँ अपने पाँच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया — ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ यही से प्रारंभ हुआ।
  • कुशीनगर (गोरखपुर): यहीं बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ, जो बौद्ध श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ है।
  • श्रावस्ती: बुद्ध ने अपने जीवन के अधिकतम वर्ष यहाँ बिताए और अनेक उपदेश दिए।
  • कौशाम्बी: यहाँ बुद्ध ने संघ की स्थापना और संगठनात्मक कार्यों का विस्तार किया।
  • संकिसा (फर्रुखाबाद): माना जाता है कि यहीं बुद्ध स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आए थे।
  • बौद्ध स्तूप और विहार: सारनाथ, श्रावस्ती और कुशीनगर में बने प्राचीन स्तूप बौद्ध कला के अनमोल उदाहरण हैं।
  • अशोक का योगदान: सम्राट अशोक ने उत्तर प्रदेश में अनेक स्तंभ, स्तूप और शिलालेख बनवाकर बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया।
  • बौद्ध शिक्षा केंद्र: सारनाथ और श्रावस्ती प्राचीन काल में बौद्ध अध्ययन के प्रमुख केंद्र रहे।
  • अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ यात्रा मार्ग: उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थल आज भी वैश्विक पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं।
  • आधुनिक पुनर्जागरण: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने यहाँ से बौद्ध धर्म के नवजागरण को गति दी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: बौद्ध विचारधारा ने प्रदेश की कला, वास्तुकला और सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म की जीवन यात्रा का साक्षी और केंद्र बिंदु रहा है। यह भूमि आज भी विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए श्रद्धा, अध्ययन और प्रेरणा का प्रमुख स्थल है।

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Throw light on the contributions of the warriors of Uttar Pradesh in the Freedom Struggle of 1857. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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1857 के स्वातंत्र्य समर में उत्तर प्रदेश के योद्धाओं के योगदान पर प्रकाश डालिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सन 1857 का स्वातंत्र्य समर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम व्यापक प्रयास था। उत्तर प्रदेश इस विद्रोह का केंद्र रहा, जहाँ अनेक वीरों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध शौर्य और बलिदान का परिचय दिया। यह आंदोलन देशभक्ति, एकता और स्वराज की भावना का प्रतीक बन गया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • मेरठ से शुरुआत: 10 मई 1857 को मेरठ में सैनिक विद्रोह से आंदोलन की चिंगारी भड़की।
  • दिल्ली की ओर कूच: मेरठ के सिपाहियों ने दिल्ली पहुँचकर बहादुरशाह ज़फर को सम्राट घोषित किया।
  • कानपुर में नाना साहेब पेशवा: उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध मोर्चा संभाला और कानपुर को विद्रोह का केंद्र बनाया।
  • तात्या टोपे: नाना साहेब के सेनापति के रूप में उन्होंने अंग्रेजों को अनेक बार पराजित किया।
  • झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई: वीरांगना लक्ष्मीबाई ने झाँसी की रक्षा में अभूतपूर्व साहस दिखाया।
  • अज़ीमुल्ला खाँ: आंदोलन के बौद्धिक और रणनीतिक योजनाकार रहे।
  • फ़ैज़ाबाद के मौलवी अहमदुल्ला शाह: धार्मिक एकता और विद्रोह के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • लखनऊ में बेगम हज़रत महल: उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रशासनिक और सैन्य नेतृत्व संभाला।
  • बलिया और गाज़ीपुर के क्रांतिकारी: ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी ठिकानों पर हमले कर जन-आंदोलन को बल दिया।
  • बरेली के ख़ान बहादुर ख़ाँ: उन्होंने स्वतंत्र शासन की घोषणा कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
  • इलाहाबाद और बनारस: यहाँ विद्रोह ने धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का स्वरूप लिया।
  • जनसामान्य की भागीदारी: किसानों, कारीगरों और सामान्य जनता ने भी बड़े पैमाने पर विद्रोह का समर्थन किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

1857 के स्वातंत्र्य समर में उत्तर प्रदेश के वीर योद्धाओं ने अपार साहस और देशभक्ति का परिचय दिया। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव बना, जिसने आगे आज़ादी की लड़ाई को दिशा दी।

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Analyse the achievements of Baba Ramchandra as a Peasant Leader. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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एक किसान नेता के रूप में बाबा रामचन्द्र की उपलब्धियों का विश्लेषण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

बाबा रामचन्द्र 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर प्रदेश के प्रमुख किसान नेता थे। उन्होंने किसानों के आर्थिक शोषण, अत्याचार और ज़मींदारी प्रथा के विरुद्ध जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उनका आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ग्रामीण चेतना और किसान एकता का प्रतीक बन गया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रारंभिक जीवन: मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले बाबा रामचन्द्र ने बाद में अवध क्षेत्र को अपने आंदोलन का केंद्र बनाया।
  • फिजी से वापसी: उन्होंने गिरमिटिया मज़दूर के रूप में फिजी में अन्याय का अनुभव किया, जिसने उनके भीतर सामाजिक न्याय की भावना को प्रबल किया।
  • अवध किसान सभा (1919): बाबा रामचन्द्र ने अवध किसान सभा की स्थापना की, जो किसानों के अधिकारों की प्रमुख संस्था बनी।
  • मुख्य उद्देश्य: ज़मींदारों द्वारा लगान, बेगार और शोषण के खिलाफ संगठित प्रतिरोध।
  • किसान आंदोलन: उन्होंने रायबरेली, प्रतापगढ़, और फैज़ाबाद जिलों में किसानों को एकजुट किया।
  • रामायण पाठ’ आंदोलन: किसानों को धार्मिक-लोकभाषा के माध्यम से जागरूक करने की अनूठी पद्धति अपनाई।
  • महात्मा गांधी से संपर्क: गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर किसानों की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर उठाया।
  • हिंसामुक्त आंदोलन: उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों के अनुरूप संघर्ष किया।
  • किसान अधिकारों की माँग: उन्होंने ‘लगान में कमी’, ‘बेगार की समाप्ति’ और ‘कृषि भूमि पर किसानों के अधिकार’ की मांग की।
  • सामाजिक एकता: जाति और वर्ग से ऊपर उठकर किसानों में एकजुटता पैदा की।
  • राजनीतिक प्रभाव: उनके नेतृत्व ने ग्रामीण राजनीति में किसान वर्ग को नई पहचान दिलाई।
  • दीर्घकालिक प्रभाव: उनके आंदोलन ने आगे चलकर भारत के किसान आंदोलनों की नींव को मजबूत किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

बाबा रामचन्द्र ने किसानों को संगठित कर शोषण के विरुद्ध एक सशक्त आवाज़ दी। उनकी नेतृत्व क्षमता और संघर्ष ने भारतीय किसान आंदोलनों को नई दिशा और चेतना प्रदान की।

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Describe the role of Uttar Pradesh Police ‘Special Task Force’ in the prevention of the organized crime. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

संगठित अपराध को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ की भूमिका का वर्णन कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध (Organized Crime) राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती रहा है। इसे नियंत्रित करने हेतु 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की स्थापना की गई। इस विशेष बल का उद्देश्य अपराधियों, माफिया गिरोहों और आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

मुख्य बिंदु (Main Points ):

  • स्थापना वर्ष: 1998 में राज्य सरकार द्वारा STF की स्थापना की गई थी।
  • मुख्य उद्देश्य: संगठित अपराध, आतंकवाद, फिरौती, अपहरण और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर नियंत्रण।
  • विशेषीकृत बल: STF में प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और खुफिया कर्मी शामिल हैं।
  • खुफिया सूचना एकत्रण: अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी और सटीक खुफिया जानकारी एकत्र करना।
  • तकनीकी सहायता: आधुनिक संचार तकनीक, सॉफ्टवेयर ट्रैकिंग और साइबर निगरानी उपकरणों का उपयोग।
  • अंतर-जिला समन्वय: विभिन्न जिलों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग में कार्य करना
  • गैंगस्टर नियंत्रण: कुख्यात अपराधियों और माफिया गिरोहों के विरुद्ध संगठित अभियान चलाना।
  • आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण: आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी तत्वों की पहचान और गिरफ्तारी में भूमिका।
  • साइबर अपराध जांच: डिजिटल अपराधों और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की जाँच में विशेषज्ञता।
  • आपराधिक संपत्ति जब्ती: माफिया की अवैध संपत्तियों की पहचान और जब्ती के लिए कार्रवाई।
  • राजनीतिक-प्रशासनिक सहयोग: शासन के निर्देशानुसार कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय सहयोग।
  • सफल अभियानों का उदाहरण: अतीक अहमद, विकास दुबे, मुख्तार अंसारी जैसे गिरोहों पर कार्रवाई STF की उल्लेखनीय उपलब्धि रही।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्पेशल टास्क फोर्स ने उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध पर नियंत्रण और भयमुक्त वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी दक्षता और तकनीकी क्षमता ने राज्य की कानून-व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया है।

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How do caste hierarchies and power structure affect access to resources and opportunities in rural Uttar Pradesh? Discuss. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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ग्रामीण उत्तर प्रदेश में जाति पदानुक्रम तथा शक्ति संरचना किस प्रकार संसाधनों तथा अवसरों तक पहुँच को प्रभावित करते हैं? विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):
ग्रामीण उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना जाति आधारित पदानुक्रम (Caste Hierarchy) और शक्ति संबंधों (Power Structure) पर आधारित है। यह व्यवस्था सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संसाधनों के वितरण को गहराई से प्रभावित करती है।
फलस्वरूप समाज में असमानता और अवसरों की विषमता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  1. जाति आधारित सामाजिक ढाँचा: गाँवों में ऊँची और नीची जातियों के बीच परंपरागत सामाजिक विभाजन बना हुआ है।
  2. भूमि स्वामित्व पर नियंत्रण: ऊँची जातियों के पास अधिकांश कृषि भूमि और संसाधन केंद्रित हैं।
  3. आर्थिक असमानता: नीची जातियों और दलित समुदायों के पास पूँजी एवं रोजगार के सीमित अवसर हैं।
  4. राजनीतिक प्रभुत्व: ग्राम पंचायतों और स्थानीय सत्ता संस्थानों पर ऊँची जातियों का वर्चस्व रहता है।
  5. सामाजिक बहिष्करण: निम्न जातियों को कई बार सामाजिक निर्णय-प्रक्रियाओं और सामुदायिक संसाधनों से अलग रखा जाता है।
  6. शिक्षा तक सीमित पहुँच: जातिगत भेदभाव के कारण शिक्षा संस्थानों में भी असमान अवसर मिलते हैं।
  7. सरकारी योजनाओं का असमान लाभ: लाभार्थी चयन में अक्सर जातीय पक्षपात देखने को मिलता है।
  8. रोजगार के अवसरों में भेदभाव: परंपरागत पेशे और सामाजिक धारणाएँ रोजगार विकल्पों को सीमित करती हैं।
  9. महिलाओं पर दोहरी वंचना: जाति और लिंग आधारित असमानता महिलाओं की स्थिति को और कमजोर करती है।
  10. दलित आंदोलनों का उदय: असमानता के प्रतिकार में दलित और पिछड़े वर्गों में राजनीतिक चेतना बढ़ी है।
  11. सरकारी हस्तक्षेप: आरक्षण नीति, पंचायत आरक्षण और सामाजिक न्याय योजनाओं से सुधार के प्रयास हुए हैं।
  12. धीरे-धीरे परिवर्तन: शिक्षा, मीडिया और शहरी प्रभाव से जातिगत सीमाएँ कुछ हद तक कमजोर हो रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion ):
ग्रामीण उत्तर प्रदेश में जाति और शक्ति संरचना अब भी संसाधनों और अवसरों तक पहुँच को गहराई से प्रभावित करती है। हालाँकि सामाजिक सुधार और नीतिगत हस्तक्षेपों से यह असमानता धीरे-धीरे कम होती दिख रही है, पर पूर्ण समानता अभी भी एक चुनौती है।

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Throw light on the e.District Project of Uttar Pradesh government. Is it a good initiative in the direction of E.governance in Uttar Pradesh? Examine. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश सरकार की ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना पर प्रकाश डालें। क्या यह उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेन्स की दिशा में एक अच्छी पहल है? परीक्षण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

ई-डिस्ट्रिक्ट (e-District) परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्त्वपूर्ण ई-गवर्नेन्स पहल है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएँ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। यह परियोजना राज्य के डिजिटल प्रशासनिक ढाँचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • परियोजना का शुभारंभ: उत्तर प्रदेश में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना 2010 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्स योजना (NeGP) के अंतर्गत प्रारंभ हुई।
  • मुख्य उद्देश्य: नागरिक सेवाओं का डिजिटलीकरण और सेवा वितरण में पारदर्शिता लाना।
  • सेवाओं की संख्या: जन्म, मृत्यु, आय, जाति, निवास, चरित्र प्रमाणपत्र आदि 40 से अधिक सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध।
  • सिंगल पोर्टल व्यवस्था: नागरिकों को सभी प्रमाणपत्रों और सेवाओं के लिए एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
  • CSC एवं जनसेवा केंद्र: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने हेतु स्थापित।
  • सेवा वितरण समय: निर्धारित समय-सीमा में सेवाएँ उपलब्ध कराकर भ्रष्टाचार एवं देरी को कम किया गया।
  • डिजिटल सत्यापन: आवेदन और दस्तावेजों की ई-प्रमाणीकरण प्रणाली लागू की गई।
  • फीडबैक प्रणाली: नागरिक संतुष्टि हेतु ऑनलाइन ट्रैकिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था।
  • डेटा सुरक्षा: नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा हेतु आधुनिक आईटी संरचना।
  • वित्तीय लेन-देन: सेवाओं के शुल्क का ऑनलाइन भुगतान संभव बनाया गया।
  • सरकारी दक्षता में वृद्धि: विभागीय समन्वय और फाइल प्रबंधन में तीव्रता आई।
  • डिजिटल साक्षरता में वृद्धि: ग्रामीण नागरिकों में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ी।

परीक्षण (Evaluation):

ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना ने उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेन्स को मजबूत आधार प्रदान किया है। इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, नागरिक सहभागिता और प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion):

ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश की डिजिटल प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि नागरिक केंद्रित शासन का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। यह ई-गवर्नेन्स की दिशा में राज्य की एक सफल और प्रेरणादायक पहल साबित हुई है।

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Examine the role of the Chief Secretary in the administration of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश के प्रशासन में मुख्य सचिव की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मुख्य सचिव (Chief Secretary) उत्तर प्रदेश शासन का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। यह राज्य के मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद का प्रमुख सलाहकार और प्रशासनिक समन्वयक होता है। मुख्य सचिव की भूमिका राज्य के सुचारु शासन संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मुख्य सचिव की प्रमुख भूमिकाएँ (Main Roles of Chief Secretary ):

  • प्रशासनिक प्रमुख: राज्य के समस्त विभागों का सर्वोच्च नौकरशाह और उनका नियंत्रणकर्ता।
  • मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव: मुख्यमंत्री को नीतिगत निर्णयों में सलाह देना और कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • मंत्रिपरिषद सचिवालय प्रमुख: मंत्रिपरिषद की बैठकें आयोजित करना एवं निर्णयों के अभिलेख बनाए रखना।
  • समन्वयक की भूमिका: विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारु रहें।
  • कार्मिक प्रबंधन: वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति से संबंधित कार्यों का नियंत्रण।
  • नीति निर्माण: राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं को व्यावहारिक स्वरूप देने में प्रमुख भूमिका।
  • विकास कार्यक्रमों की निगरानी: प्रमुख विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और मूल्यांकन की देखरेख।
  • राज्य और केंद्र के बीच समन्वय: केंद्र सरकार और राज्य के विभागों के बीच संवाद सेतु के रूप में कार्य।
  • आपदा प्रबंधन: राज्य में आपदा या आपात स्थिति में प्रशासनिक नियंत्रण और राहत कार्यों का संचालन।
  • वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना: बजट उपयोग और वित्तीय नीतियों के पालन की देखरेख।
  • लोकसेवा सुधार: प्रशासन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देना।
  • राज्य शासन की निरंतरता: राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना।

निष्कर्ष (Conclusion):

मुख्य सचिव राज्य शासन की रीढ़ होता है, जो प्रशासनिक मशीनरी को सुचारु रूप से संचालित करता है। उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता से ही उत्तर प्रदेश में नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाता है।

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Discuss the various stages of land reforms in Uttar Pradesh. How landless agricultural labourers were benefited from the land reforms? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों के विभिन्न चरणों की विवेचना कीजिए । भूमि सुधारों से भूमिहीन कृषि मजदूर कैसे लाभान्वित हुए ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश में कृषि व्यवस्था में समानता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए भूमि सुधार (Land Reforms) एक महत्वपूर्ण कदम था। इन सुधारों का उद्देश्य भूमिस्वामित्व की असमानता को समाप्त करना और किसानों को भूमि का अधिकार देना था। भूमि सुधारों के माध्यम से भूमिहीन मजदूरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

मुख्य बिंदु (Main Points ):

  • जमींदारी उन्मूलन अधिनियम (1952): मध्यस्थता समाप्त कर किसानों को भूमि का सीधा स्वामित्व दिया गया।
  • भूमि ceiling कानून (1960): एक परिवार द्वारा रखी जाने वाली अधिकतम भूमि सीमा तय की गई।
  • अधिशेष भूमि वितरण: अतिरिक्त भूमि भूमिहीन किसानों और कृषि मजदूरों में बाँटी गई।
  • किरायेदारी सुधार: बटाईदारों को सुरक्षा और स्थायी अधिकार प्रदान किए गए।
  • भूमि अभिलेख सुधार: भूमि रिकॉर्डों का आधुनिकीकरण किया गया ताकि पारदर्शिता बढ़े।
  • कृषि सहकारिता संस्थाएं: छोटे किसानों को सामूहिक खेती और संसाधन उपलब्ध कराने हेतु प्रोत्साहन।
  • भूमि समेकन योजना (Consolidation of Holdings): बिखरी हुई जोतों को एकीकृत कर खेती आसान बनाई गई।
  • समान अवसर नीति: भूमिहीनों को कृषि विकास योजनाओं में भागीदारी का अवसर मिला।
  • कृषि ऋण और सहायता योजनाएं: भूमिहीन किसानों को सस्ते ऋण और तकनीकी सहायता दी गई।
  • महिला भूमिधारिता को प्रोत्साहन: महिलाओं को भी भूमि स्वामित्व अधिकार दिए गए।
  • राज्य सरकार की योजनाएं: ‘भूमि अधिकार योजना’ जैसी योजनाओं से गरीब परिवारों को लाभ मिला।
  • सामाजिक न्याय में योगदान: भूमि सुधारों ने ग्रामीण समाज में वर्गीय असमानता घटाई।
  • भूमिहीन कृषि मजदूरों को लाभ (Benefits to Landless Labourers):
  • उन्हें भूमि के स्वामित्व या पट्टे का अधिकार मिला, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ी।
  • स्थायी रोजगार, आवास और सम्मानजनक सामाजिक स्थिति प्राप्त हुई।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों ने ग्रामीण समाज की आर्थिक संरचना को अधिक न्यायसंगत बनाया। इन सुधारों से भूमिहीन किसानों को न केवल भूमि बल्कि आत्म-सम्मान और स्थायित्व भी प्राप्त हुआ।

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How much has the ‘Operation Kayakalp’ been significant in the efforts of converting the primary and upper primary schools into model schools? Analyse. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल स्कूलों में बदलने के प्रयासों में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ कितना महत्वपूर्ण रहा है? विश्लेषण कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

‘ऑपरेशन कायाकल्प’ उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को आदर्श विद्यालयों में परिवर्तित करना है। यह कार्यक्रम विद्यालयों के भौतिक, शैक्षिक और स्वच्छता संबंधी ढाँचे में व्यापक सुधार लाने पर केंद्रित है। इस पहल ने राज्य के बुनियादी शिक्षा ढांचे को नई दिशा प्रदान की है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) बुनियादी सुविधाओं का विकास: स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विद्युत व्यवस्था और फर्नीचर जैसी आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान किया गया।

(2) डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा: स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट और तकनीकी संसाधनों का उपयोग प्रोत्साहित किया गया।

(3) विद्यालय सौंदर्यीकरण: दीवार चित्रण, हरियाली और साफ-सफाई से विद्यालय वातावरण को आकर्षक बनाया गया।

(4) सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ी।

(5) छात्र उपस्थिति में सुधार: बेहतर सुविधाओं के कारण विद्यार्थियों की उपस्थिति और नामांकन में वृद्धि हुई।

(6) बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन: सुरक्षित और स्वच्छ माहौल से बालिकाओं की विद्यालय में भागीदारी बढ़ी।

(7) गुणवत्ता सुधार: शिक्षण-सामग्री और विद्यालय प्रबंधन में नवाचार से शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion):

‘ऑपरेशन कायाकल्प’ ने उत्तर प्रदेश के विद्यालयों को सुविधासंपन्न और आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह पहल न केवल भौतिक ढाँचे बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और समानता को भी सशक्त बनाती है।

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