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Highlight the key components of upstream and downstream activities in food processing supply chain management with suitable examples.[Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन में ऊर्ध्व प्रवाह तथा अधो प्रवाह क्रियाओं के प्रमुख अवयवों को सोदाहरण चिन्हांकित कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति श्रृंखला (Food Processing Supply Chain) एक ऐसी प्रणाली है जो कच्चे कृषि उत्पादों को उपभोक्ता तक पहुँचने योग्य तैयार खाद्य में बदलती है। इसमें ऊर्ध्व प्रवाह (Upstream) और अधो प्रवाह (Downstream) दोनों चरण शामिल होते हैं। इन दोनों का कुशल प्रबंधन खाद्य गुणवत्ता, लागत और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करता है।

मुख्य अवयव (Key Components):

  • ऊर्ध्व प्रवाह क्रियाएँ (Upstream Activities):
  • कृषि उत्पादन एवं कच्चे माल की आपूर्ति
  • संग्रहण, ग्रेडिंग और प्राथमिक प्रसंस्करण
  • किसानों, आपूर्तिकर्ताओं और प्रसंस्करण इकाइयों के बीच समन्वय
  • अधो प्रवाह क्रियाएँ (Downstream Activities):
  • प्रसंस्कृत उत्पादों का पैकेजिंग और भंडारण
  • वितरण नेटवर्क एवं लॉजिस्टिक्स
  • थोक, खुदरा और ई-कॉमर्स विपणन
  • उपभोक्ता प्रतिक्रिया और गुणवत्ता प्रबंधन

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार, ऊर्ध्व एवं अधो प्रवाह दोनों की दक्षता से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में मूल्यवर्धन होता है। इनका समुचित समन्वय खाद्य सुरक्षा, निर्यात वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है।

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Critically evaluate the achievements of global investor summits organized by the Uttar Pradesh Government. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर सम्मेलनों की उपलब्धियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को औद्योगिक रूप से विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की शुरुआत की। इसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • पहला ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2018 में लखनऊ में आयोजित हुआ।
  • इसमें लगभग ₹4.68 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
  • वर्ष 2023 में दूसरा समिट हुआ, जिसमें ₹33.5 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले।
  • इस सम्मेलन में 29 से अधिक देशों ने भाग लिया।
  • प्रमुख निवेश क्षेत्र – रक्षा, एयरोस्पेस, IT, MSME, कृषि, पर्यटन और ऊर्जा रहे।
  • ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी’ के माध्यम से कई परियोजनाएँ शुरू की गईं।
  • लगभग 10 लाख से अधिक रोजगार सृजन की संभावना बताई गई।
  • निवेश से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  • सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई औद्योगिक नीतियाँ लागू कीं।
  • बुनियादी ढाँचे में सुधार से एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित हुए।
  • आलोचनात्मक रूप से, अधिकांश MoU अभी क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में हैं।
  • छोटे निवेशकों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव अभी सीमित है।

निष्कर्ष (Conclusion): ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर स्थापित किया है। इसकी स्थायी सफलता वास्तविक परियोजनाओं के शीघ्र और समान रूप से क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

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What are the major scientific challenges for Uttar Pradesh in becoming a trillion dollar economy? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश का ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनने के लिये मुख्य वैज्ञानिक चुनौतियाँ क्या हैं?

Ans: परिचय: उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंतु इस दिशा में राज्य को कई वैज्ञानिक, तकनीकी और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • अनुसंधान एवं नवाचार में निवेश की कमी से तकनीकी प्रगति सीमित है।
  • कृषि और उद्योगों में आधुनिक तकनीक का कम उपयोग उत्पादकता घटाता है।
  • कौशल प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जनशक्ति की अपर्याप्तता नवाचार को बाधित करती है।
  • स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण में वैज्ञानिक समाधान की कमी है।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर व लैब सुविधाएँ अनुसंधान संस्थानों में पर्याप्त नहीं हैं।
  • AI, बायोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता का अभाव है।
  • सरकारी-निजी क्षेत्र के समन्वय की कमी से नवाचारों का व्यावसायीकरण धीमा है।

निष्कर्ष: इन चुनौतियों को दूर कर उत्तर प्रदेश विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को अपनाकर ही ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुँच सकता है।

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What are the challenges to promote viticulture in Uttar Pradesh and how it can support economic development of Uttar Pradesh? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती को बढ़ावा देने में क्या चुनौतियाँ हैं और यह उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक हो सकती है?

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती (Grape Cultivation) अब धीरे-धीरे विकसित हो रही है, विशेषकर पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में। यह खेती राज्य में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आय वृद्धि की बड़ी संभावना रखती है, परंतु कई चुनौतियाँ भी सामने हैं।

मुख्य बिंदु:

  • अनुकूल जलवायु और मिट्टी का अभाव कई हिस्सों में उत्पादन सीमित करता है।
  • उच्च प्रारंभिक लागत और तकनीकी ज्ञान की कमी से किसान हिचकते हैं।
  • सिंचाई की असमान उपलब्धता अंगूर उत्पादन को प्रभावित करती है।
  • कीट और रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज और विपणन ढाँचे की कमी से नुकसान बढ़ता है।
  • सफल अंगूर खेती से फल प्रसंस्करण उद्योग (वाइन, जूस आदि) को बढ़ावा मिल सकता है।
  • यह रोजगार, निर्यात और ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन देकर आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है।

निष्कर्ष: यदि उचित नीतिगत सहयोग और तकनीकी प्रशिक्षण मिले, तो अंगूर की खेती उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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What are the benefits of commercialization of agriculture in Uttar Pradesh? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में कृषि के व्यवसायीकरण के क्या लाभ हैं?

Ans:  परिचय:

 उत्तर प्रदेश में कृषि व्यावसायीकरण (Commercialization of Agriculture) का अर्थ है खेती को केवल जीविका का साधन न मानकर लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना। इससे किसानों की आय बढ़ी है और कृषि क्षेत्र में तकनीकी व आर्थिक प्रगति हुई है।

मुख्य बिंदु:

  • कृषि उत्पादन में विविधता, जैसे – फल, सब्जी, दुग्ध और फूलों की खेती का विस्तार।
  • कृषि आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ी।
  • रोजगार के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़े।
  • आधुनिक तकनीक और सिंचाई साधनों का उपयोग बढ़ा।
  • निर्यातोन्मुख कृषि उत्पादों से विदेशी मुद्रा अर्जन हुआ।
  • किसानों की आय में वृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता आई।
  • कृषि विपणन, भंडारण व प्रसंस्करण का विकास हुआ।

निष्कर्ष: कृषि व्यावसायीकरण से उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता और किसानों की समृद्धि दोनों में वृद्धि हुई है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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Discuss the role of ‘Inland Waterways Authority’ to boost the water transport and tourism in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में जल परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा देने में ‘अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction)

उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और घाघरा जैसी नदियाँ जल परिवहन के लिए अत्यंत संभावनाशील हैं। इन नदियों के विकास हेतु अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI – Inland Waterways Authority of India) की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य जलमार्गों को आर्थिक, पर्यावरणीय और पर्यटन दृष्टि से उपयोगी बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • IWAI की स्थापना 1986 में हुई, ताकि देश में अंतर्देशीय जल परिवहन को प्रोत्साहन मिले।
  • उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (हल्दिया से वाराणसी) प्रमुख परियोजना है।
  • इस जलमार्ग से माल परिवहन की लागत घटाने और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिली।
  • वाराणसी मल्टीमॉडल टर्मिनल का निर्माण पर्यटन और व्यापार दोनों को सशक्त कर रहा है।
  • गंगा नदी पर क्रूज़ पर्यटन की शुरुआत से रोजगार और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी।
  • पर्यावरण अनुकूल परिवहन से प्रदूषण में कमी आई है।
  • IWAI राज्य सरकार के साथ मिलकर नदी तट विकास और घाट सुधार पर कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion) – अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश में जल आधारित परिवहन और पर्यटन की नई संभावनाएँ खोली हैं। उचित रखरखाव और निवेश से यह राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

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