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Discuss the causes and consequences of poverty. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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गरीबी के कारणों और परिणामों की चर्चा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

गरीबी किसी भी देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। भारत जैसे विकासशील देश में यह समस्या ऐतिहासिक, आर्थिक और संरचनात्मक कारणों से जुड़ी है। गरीबी न केवल आर्थिक अभाव बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में अवसरों की असमानता को भी दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • गरीबी के प्रमुख कारण:
  • जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर दबाव बढ़ाती है।
  • बेरोजगारी: रोजगार के अवसरों की कमी से आय घटती है और गरीबी बढ़ती है।
  • असमान आय वितरण: अमीर और गरीब के बीच आर्थिक खाई लगातार बढ़ रही है।
  • शिक्षा की कमी: अशिक्षा से लोग बेहतर रोजगार और आय के अवसर नहीं पा पाते।
  • कृषि पर निर्भरता: अस्थिर कृषि व्यवस्था और कम उत्पादकता ग्रामीण गरीबी का मुख्य कारण है।
  • औद्योगिक पिछड़ापन: सीमित औद्योगिक विकास से शहरी गरीबों की संख्या बढ़ी है।
  • गरीबी के परिणाम:
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: कुपोषण, बीमारियाँ और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बढ़ जाती है।
  • शिक्षा से वंचित रहना: गरीब परिवार अपने बच्चों को उचित शिक्षा नहीं दिला पाते।
  • सामाजिक असमानता: गरीबी सामाजिक वर्गों में दूरी और भेदभाव को जन्म देती है।
  • अपराध और असुरक्षा: आर्थिक अभाव अपराध दर और अस्थिरता को बढ़ाता है।
  • राष्ट्रीय विकास में बाधा: गरीबी उत्पादकता और मानव संसाधन विकास को सीमित करती है।
  • राजनीतिक अस्थिरता: असमानता और असंतोष लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव डालते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

गरीबी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानव विकास की चुनौती है। इसके समाधान हेतु शिक्षा, रोजगार, समान अवसर और सामाजिक न्याय पर आधारित समग्र नीति आवश्यक है।

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Discuss the role of ‘Inland Waterways Authority’ to boost the water transport and tourism in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में जल परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा देने में ‘अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction)

उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और घाघरा जैसी नदियाँ जल परिवहन के लिए अत्यंत संभावनाशील हैं। इन नदियों के विकास हेतु अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI – Inland Waterways Authority of India) की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य जलमार्गों को आर्थिक, पर्यावरणीय और पर्यटन दृष्टि से उपयोगी बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • IWAI की स्थापना 1986 में हुई, ताकि देश में अंतर्देशीय जल परिवहन को प्रोत्साहन मिले।
  • उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (हल्दिया से वाराणसी) प्रमुख परियोजना है।
  • इस जलमार्ग से माल परिवहन की लागत घटाने और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिली।
  • वाराणसी मल्टीमॉडल टर्मिनल का निर्माण पर्यटन और व्यापार दोनों को सशक्त कर रहा है।
  • गंगा नदी पर क्रूज़ पर्यटन की शुरुआत से रोजगार और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी।
  • पर्यावरण अनुकूल परिवहन से प्रदूषण में कमी आई है।
  • IWAI राज्य सरकार के साथ मिलकर नदी तट विकास और घाट सुधार पर कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion) – अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश में जल आधारित परिवहन और पर्यटन की नई संभावनाएँ खोली हैं। उचित रखरखाव और निवेश से यह राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

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What are the challenges to promote viticulture in Uttar Pradesh and how it can support economic development of Uttar Pradesh? [8 Marks] UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती को बढ़ावा देने में क्या चुनौतियाँ हैं और यह उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक हो सकती है?

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती (Grape Cultivation) अब धीरे-धीरे विकसित हो रही है, विशेषकर पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में। यह खेती राज्य में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आय वृद्धि की बड़ी संभावना रखती है, परंतु कई चुनौतियाँ भी सामने हैं।

मुख्य बिंदु:

  • अनुकूल जलवायु और मिट्टी का अभाव कई हिस्सों में उत्पादन सीमित करता है।
  • उच्च प्रारंभिक लागत और तकनीकी ज्ञान की कमी से किसान हिचकते हैं।
  • सिंचाई की असमान उपलब्धता अंगूर उत्पादन को प्रभावित करती है।
  • कीट और रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज और विपणन ढाँचे की कमी से नुकसान बढ़ता है।
  • सफल अंगूर खेती से फल प्रसंस्करण उद्योग (वाइन, जूस आदि) को बढ़ावा मिल सकता है।
  • यह रोजगार, निर्यात और ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन देकर आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है।

निष्कर्ष: यदि उचित नीतिगत सहयोग और तकनीकी प्रशिक्षण मिले, तो अंगूर की खेती उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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Critically evaluate the achievements of global investor summits organized by the Uttar Pradesh Government. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर सम्मेलनों की उपलब्धियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को औद्योगिक रूप से विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की शुरुआत की। इसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • पहला ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2018 में लखनऊ में आयोजित हुआ।
  • इसमें लगभग ₹4.68 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
  • वर्ष 2023 में दूसरा समिट हुआ, जिसमें ₹33.5 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले।
  • इस सम्मेलन में 29 से अधिक देशों ने भाग लिया।
  • प्रमुख निवेश क्षेत्र – रक्षा, एयरोस्पेस, IT, MSME, कृषि, पर्यटन और ऊर्जा रहे।
  • ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी’ के माध्यम से कई परियोजनाएँ शुरू की गईं।
  • लगभग 10 लाख से अधिक रोजगार सृजन की संभावना बताई गई।
  • निवेश से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  • सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई औद्योगिक नीतियाँ लागू कीं।
  • बुनियादी ढाँचे में सुधार से एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित हुए।
  • आलोचनात्मक रूप से, अधिकांश MoU अभी क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में हैं।
  • छोटे निवेशकों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव अभी सीमित है।

निष्कर्ष (Conclusion): ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर स्थापित किया है। इसकी स्थायी सफलता वास्तविक परियोजनाओं के शीघ्र और समान रूप से क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

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Critically evaluate the strategy of poverty alleviation programmes in India, in recent years. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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हाल के वर्षों में, भारत में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की रणनीति का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत में गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) स्वतंत्रता के बाद से सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है। हाल के वर्षों में गरीबी घटाने की रणनीति में केवल आय वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और समावेशी विकास पर भी ध्यान दिया गया है। फिर भी, चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रारंभिक कार्यक्रम जैसे – गरीबी हटाओ योजना, IRDP, NREP आदि प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने पर केंद्रित थे।
  • हाल के वर्षों में दृष्टिकोण “कल्याण आधारित” से “सशक्तिकरण आधारित” (Empowerment-based) रणनीति की ओर बदला है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, जन-धन योजना और उज्ज्वला योजना ने जीवन स्तर सुधारने में मदद की।
  • मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण रोजगार व आय सुरक्षा को मजबूत किया।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया।
  • Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली ने भ्रष्टाचार और रिसाव को कम किया।
  • डिजिटल इंडिया और आधार ने पारदर्शिता व वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया।
  • हालांकि, कई योजनाओं में लक्षित लाभार्थियों की पहचान, निगरानी और स्थायित्व की समस्या बनी रही।
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों व शहरी गरीबों तक योजनाओं की पहुँच सीमित है।
  • बहु-आयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) — शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण— पर अभी और ध्यान की आवश्यकता है।
  • नीतियों में क्षेत्रीय असमानता व सामाजिक विषमता को कम करने के लिए स्थानीय समाधान जरूरी हैं।
  • सरकार अब “गरीबी से समृद्धि” की दिशा में टिकाऊ आजीविका और कौशल विकास पर बल दे रही है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः हाल की रणनीतियाँ गरीबी घटाने में प्रभावी रही हैं, परंतु स्थायी परिणामों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सामाजिक सुरक्षा पर निरंतर निवेश आवश्यक है। गरीबी उन्मूलन तभी सफल होगा जब विकास वास्तव में समावेशी और न्यायसंगत बने।

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What do you understand by buffer stock? Is it essential for food security in India? Explain clearly. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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बफर स्टॉक से आप क्या समझते हैं ? क्या भारत में खाद्य सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है ? स्पष्ट रूप से व्याख्या कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

बफर स्टॉक (Buffer Stock) से तात्पर्य सरकार द्वारा आवश्यक मात्रा में खाद्यान्नों (जैसे गेहूँ, चावल आदि) का भंडारण करना है, ताकि आपातकालीन स्थितियों—जैसे सूखा, बाढ़ या बाजार में मूल्य अस्थिरता—में जन-आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यह प्रणाली भारत की खाद्य सुरक्षा नीति का एक प्रमुख आधार है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बफर स्टॉक का निर्माण भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देना और उपभोक्ताओं के लिए खाद्यान्न की स्थिर आपूर्ति बनाए रखना है।
  • यह स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीब व कमजोर वर्गों तक भोजन पहुँचाने में सहायक होता है।
  • प्राकृतिक आपदाओं या आपूर्ति संकट के समय यह भंडार देश को राहत प्रदान करता है।
  • बफर स्टॉक मूल्य स्थिरीकरण (Price Stabilization) का भी प्रभावी साधन है।
  • सरकार प्रत्येक वर्ष खाद्य सुरक्षा मानदंडों के अनुसार न्यूनतम बफर स्टॉक सीमा निर्धारित करती है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ने इस प्रणाली को कानूनी समर्थन दिया है।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी योजनाओं के सफल संचालन के पीछे यही तंत्र कार्य करता है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान बफर स्टॉक ने देशभर में मुफ्त अनाज वितरण संभव बनाया।
  • हालांकि, अत्यधिक भंडारण से गोदामों पर दबाव, खाद्यान्न की बर्बादी और वित्तीय बोझ भी बढ़ता है।
  • इसलिए, तकनीकी भंडारण, आपूर्ति प्रबंधन और समयबद्ध निकासी जरूरी है।
  • डिजिटल निगरानी और ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली बफर स्टॉक प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बना सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफर स्टॉक नितांत आवश्यक है। यह न केवल संकट के समय भोजन की उपलब्धता बनाए रखता है, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा भी करता है।

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