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In the process of policy making by public administrators whether the priority should be given to the moral transparency or the effectiveness of consequences/results? Elucidate. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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लोक प्रशासकों द्वारा नीति-निर्माण की प्रक्रिया में वांछित सामाजिक-नैतिक लक्षणों की प्राप्ति हेतु, क्या साधनों की नैतिक पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए अथवा परिणामों की प्रभावशीलता को? समझाइये।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोक प्रशासक नीति-निर्माण में ऐसे निर्णय लेते हैं जो समाज के जीवन-मूल्यों को प्रभावित करते हैं। इन निर्णयों में नैतिक पारदर्शिता और परिणामों की प्रभावशीलता दोनों का संतुलन आवश्यक है। यह प्रश्न इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि साधन और परिणाम दोनों ही शासन की नैतिकता को परिभाषित करते हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points – 12 bullet points):

  • साधनों की नैतिकता (Ethical Means): नीति-निर्माण में अपनाए गए साधन पारदर्शी, न्यायसंगत और सत्यनिष्ठ होने चाहिए।
  • परिणामों की प्रभावशीलता (Effectiveness of Outcomes): नीतियों के परिणाम व्यावहारिक, जनोन्मुखी और समाजहितकारी हों।
  • गांधीजी का दृष्टिकोण: उन्होंने कहा – “असत्य साधनों से सत्य उद्देश्य प्राप्त नहीं हो सकता।”
  • नैतिक पारदर्शिता का महत्व: यह नीति-निर्माताओं की विश्वसनीयता और सार्वजनिक विश्वास को सुदृढ़ करती है।
  • परिणाम-आधारित दृष्टिकोण: आधुनिक प्रशासन में परिणामों की गुणवत्ता और मापन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
  • संतुलन की आवश्यकता: केवल साधनों पर या केवल परिणामों पर ध्यान देना नैतिक असंतुलन पैदा कर सकता है।
  • उद्देश्य और साधन की एकता: जब नीति-निर्माण में दोनों एक-दूसरे के पूरक बनते हैं, तभी नैतिकता और दक्षता दोनों सुनिश्चित होती हैं।
  • लोकहित सर्वोपरि सिद्धांत: नीति चाहे कोई भी हो, उसका अंतिम उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: नीति प्रक्रिया खुली और उत्तरदायी होनी चाहिए ताकि भ्रष्टाचार व पक्षपात न बढ़े।
  • मानवीय दृष्टिकोण: नीति बनाते समय समाज के कमजोर वर्गों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • दीर्घकालिक प्रभाव: नैतिक साधनों से बनी नीतियाँ स्थायी और व्यापक प्रभाव डालती हैं।
  • नैतिक नेतृत्व की भूमिका: नीति-निर्माताओं के व्यक्तिगत मूल्य पूरे प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion – 2 lines):

लोक प्रशासन में साधनों की नैतिक पारदर्शिता को प्राथमिकता देना ही सच्चा सुशासन है। जब नीति निर्माण में नैतिक साधन और प्रभावी परिणाम साथ चलते हैं, तभी जनविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होती है।

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What is the moral basis of the work performance in the system of governance? Discuss in the light of result contingent and result non-contingent karma. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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शासन व्यवस्था में कार्य निष्पादन का नैतिक आधार क्या है? परिणाम-निरपेक्ष एवं परिणाम-सापेक्ष कर्म के आलोक में विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

शासन व्यवस्था में कार्य निष्पादन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नैतिक उत्तरदायित्व भी है। अधिकारी का आचरण लोकहित, पारदर्शिता और न्याय पर आधारित होना चाहिए। इस संदर्भ में परिणाम-निरपेक्ष (duty-based) और परिणाम-सापेक्ष (result-based) कर्म की अवधारणाएँ नैतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • नैतिक आधार (Moral Foundation): सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व शासन के नैतिक स्तंभ हैं।
  • कर्तव्य-निष्ठा (Duty Orientation): अधिकारी को अपने कार्य को नैतिक दायित्व मानकर निष्पादित करना चाहिए।
  • परिणाम-निरपेक्ष कर्म (Result-Independent Action): गीता के अनुसार, “कर्म करो, फल की चिंता मत करो” — यह कर्तव्य-निष्ठ दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • नैतिक निष्ठा (Ethical Commitment): निर्णय लेते समय सही और न्यायसंगत मार्ग अपनाना, भले ही परिणाम तात्कालिक रूप से अनुकूल न हों।
  • लोकहित सर्वोपरि (Public Good First): प्रत्येक कार्य जनकल्याण के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।
  • पारदर्शिता और उत्तरदायित्व (Transparency & Accountability): नैतिक शासन इन्हीं सिद्धांतों पर टिका है।
  • परिणाम-सापेक्ष कर्म (Result-Oriented Action): आधुनिक शासन में दक्षता और परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं।
  • संतुलन की आवश्यकता (Need for Balance): केवल परिणाम पर ध्यान देने से नैतिक मूल्य कमजोर पड़ सकते हैं; अतः दोनों दृष्टिकोणों में संतुलन आवश्यक है।
  • व्यावसायिक नैतिकता (Professional Ethics): कार्य निष्पादन में ईमानदारी और दक्षता का संयोजन आवश्यक है।
  • नैतिक नेतृत्व (Moral Leadership): वरिष्ठ अधिकारियों को उदाहरण प्रस्तुत कर अधीनस्थों में नैतिक आचरण प्रेरित करना चाहिए।
  • सार्वजनिक विश्वास (Public Trust): जब कार्य निष्पादन नैतिक आधार पर होता है, तब शासन में जनता का विश्वास बढ़ता है।
  • नैतिक आत्मसंतोष (Moral Satisfaction): परिणाम कुछ भी हो, सही तरीके से किया गया कार्य आत्मसंतोष देता है।

निष्कर्ष (Conclusion): शासन में कार्य निष्पादन का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह नैतिक सिद्धांतों से निर्देशित हो। कर्तव्य-निष्ठा और परिणाम-दक्षता के बीच संतुलन ही सुशासन और नैतिक प्रशासन की पहचान है।

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What should be the nature of civil service values for a public administrator? How can he create a balance between these values in his personal and public life? Explain. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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लोक प्रशासन में कार्यरत अधिकारी के लिए सिविल सेवा मूल्यों का स्वरूप क्या होना चाहिए? वह अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में इन मूल्यों के बीच कैसे संतुलन स्थापित कर सकता है? समझाइये।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोक प्रशासन में कार्यरत अधिकारी समाज और सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है। उसके आचरण में सिविल सेवा मूल्यों का प्रतिबिंब जनविश्वास और सुशासन की नींव बनता है। अतः इन मूल्यों का स्पष्ट स्वरूप और संतुलित पालन अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सत्यनिष्ठा (Integrity): ईमानदारी और नैतिकता को प्रत्येक कार्य का आधार बनाना।
  • निष्पक्षता (Impartiality): सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना, किसी भी दबाव से मुक्त रहना।
  • उत्तरदायित्व (Accountability): अपने निर्णयों और कार्यों के लिए जनता और सरकार के प्रति जवाबदेह रहना।
  • पारदर्शिता (Transparency): नीतियों और निर्णयों को स्पष्ट, सार्वजनिक और जाँच योग्य रखना।
  • लोकहित की भावना (Public Service Orientation): निजी लाभ से ऊपर जनहित को रखना।
  • कर्तव्यनिष्ठा (Dedication to Duty): प्रशासनिक कार्यों को समय पर और पूर्ण समर्पण से पूरा करना।
  • संवेदनशीलता (Empathy): विशेषकर कमजोर वर्गों की समस्याओं के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखना।
  • व्यावसायिकता (Professionalism): ज्ञान, दक्षता और नैतिकता का संयोजन बनाए रखना।
  • शुचिता (Probity): पद की गरिमा बनाए रखते हुए भ्रष्टाचार रहित आचरण अपनाना।
  • साहसिकता (Courage of Conviction): सही निर्णय के लिए नैतिक साहस दिखाना, चाहे दबाव कोई भी हो।
  • संतुलन (Balance): निजी जीवन में सादगी, संयम और पारिवारिक मूल्यों का पालन करते हुए सार्वजनिक जीवन में निष्पक्षता बनाए रखना।
  • निरंतर आत्ममंथन (Self-evaluation): अपने आचरण की समय-समय पर समीक्षा करना ताकि नैतिकता बनी रहे।

निष्कर्ष (Conclusion):

सिविल सेवक के लिए नैतिक मूल्य केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि आचरण की रीढ़ हैं। जब वह निजी और सार्वजनिक जीवन दोनों में इन मूल्यों का संतुलन रखता है, तभी वह सच्चे अर्थों में जनसेवक कहलाता है।

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Discuss the moral bases to deal with the challenges of corruption prevailing in the present society. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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वर्तमान समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की चुनौतियों से निपटने के लिए नैतिक आधारों की विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

भ्रष्टाचार वर्तमान समाज की सबसे गंभीर नैतिक एवं प्रशासनिक समस्या बन गया है। यह केवल आर्थिक हानि ही नहीं पहुँचाता, बल्कि लोक सेवा की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है। इससे निपटने के लिए नैतिक मूल्यों पर आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सत्यनिष्ठा (Integrity): लोकसेवकों में ईमानदारी एवं पारदर्शिता का विकास।
  • उत्तरदायित्व (Accountability): प्रत्येक निर्णय के लिए नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय हो।
  • निष्पक्षता (Impartiality): व्यक्तिगत लाभ या पक्षपात से मुक्त निर्णय प्रक्रिया।
  • लोकहित (Public Interest): निजी स्वार्थ के बजाय जनहित को प्राथमिकता देना।
  • कर्तव्यपरायणता (Duty Consciousness): संविधान और सेवा नियमों के प्रति निष्ठा।
  • पारदर्शिता (Transparency): कार्यप्रणालियों को खुला और जाँच योग्य बनाना।
  • संवेदनशीलता (Sensitivity): नागरिकों की समस्याओं को समझने की नैतिक प्रतिबद्धता।
  • स्वयं अनुशासन (Self-discipline): नैतिक सीमाओं का स्वयं पालन।
  • शुचिता (Probity): भ्रष्टाचार रहित आचरण को जीवन का मूल सिद्धांत बनाना।
  • नैतिक शिक्षा (Ethical Education): समाज और प्रशासन में नैतिक मूल्यों की शिक्षा का प्रसार।
  • सामाजिक नियंत्रण (Social Control): नागरिक समाज और मीडिया द्वारा निगरानी को प्रोत्साहन।
  • सांस्कृतिक पुनर्जागरण (Moral Renaissance): भारतीय नैतिक परंपराओं जैसे सत्य, अहिंसा, सेवा की पुनर्स्थापना।

निष्कर्ष (Conclusion): भ्रष्टाचार का उन्मूलन केवल कानूनी उपायों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए नैतिक जागरूकता अनिवार्य है। जब समाज और प्रशासन दोनों नैतिक मूल्यों को अपनाएँगे, तभी एक ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था संभव होगी।

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Public servants often work with the public from diverse backgrounds and with different viewpoints. How do you ensure that their needs will met out while maintaining professionalism? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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लोक सेवक अक्सर अलग-अलग पृष्ठभूमि और अलग-अलग दृष्टिकोण वाले लोगों के साथ काम करते हैं। आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि व्यावसायिकता बनाए रखते हुए उनकी आवश्यकताएँ पूरी की जाएगी?

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

लोक सेवक विविध सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के साथ कार्य करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में व्यवसायिकता (Professionalism) और समान व्यवहार बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है। यह प्रशासनिक निष्पक्षता, संवेदनशीलता और दक्षता का संतुलन मांगता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रत्येक व्यक्ति के साथ समान सम्मान और निष्पक्षता का व्यवहार करना।
  • व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर कार्य के उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करना।
  • प्रभावी संवाद (Effective Communication) के माध्यम से उनकी आवश्यकताओं को समझना।
  • भावनात्मक बुद्धि और सहानुभूति से सहयोगी माहौल बनाना।
  • निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियम आधारित दृष्टिकोण अपनाना।
  • सांस्कृतिक विविधता और संवेदनशीलता पर प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।
  • फीडबैक प्रणाली से यह सुनिश्चित करना कि सभी की आवश्यकताएँ उचित रूप से पूरी हों।

निष्कर्ष (Conclusion):

व्यवसायिकता और संवेदनशीलता का संतुलन लोक सेवक की असली पहचान है। इसी के माध्यम से वह विविध समाज की आवश्यकताओं को न्यायपूर्ण और प्रभावी ढंग से पूरा कर सकता है।    

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your suggestions to promote the tolerance and compassion among civil servants to serve better to weaker sections. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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कमजोर वर्गों की बेहतर सेवा हेतु लोक सेवकों में सहिष्णुता एवं करुणा को बढ़ावा देने के लिए अपने सुझावों की व्याख्या कीजिए। Explain

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोक सेवकों के लिए सहिष्णुता (Tolerance) और करुणा (Compassion) जैसे गुण कमजोर वर्गों की सेवा का आधार हैं।  ये गुण प्रशासन को मानवीय और समावेशी बनाते हैं। इनका विकास लोकसेवकों में संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नैतिकता, मानवाधिकार और संवेदनशीलता पर बल दिया जाए।
  • समुदायों के साथ प्रत्यक्ष संवाद से सामाजिक विविधता की समझ विकसित की जाए।
  • नीति-निर्माण में गरीब, महिला, दिव्यांग और वंचित वर्गों की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाए।
  • कार्य मूल्यांकन में मानवीय व्यवहार और सहानुभूति को भी शामिल किया जाए।
  • वरिष्ठ अधिकारियों को उदाहरण प्रस्तुत कर प्रेरक नेतृत्व देना चाहिए।
  • तनाव प्रबंधन और भावनात्मक बुद्धि के विकास पर ध्यान दिया जाए।
  • “सेवा भाव” आधारित प्रशासनिक संस्कृति को संस्थागत रूप से बढ़ावा दिया जाए।

निष्कर्ष (Conclusion):

सहिष्णुता और करुणा से युक्त लोक सेवक ही सामाजिक न्याय और समानता को साकार कर सकते हैं। इन गुणों का विकास प्रशासन को संवेदनशील, जनोन्मुख और विश्वसनीय बनाता है।

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What is the role of empathy in shaping the attitude of a civil servant? How it can enhance their interaction with the public? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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एक लोकसेवक की अभिवृत्ति को आकार देने में समानुभूति की भूमिका क्या है? यह जनता के साथ उनकी अंतर्क्रिया को कैसे बढ़ा सकता है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

समानुभूति (Empathy) लोकसेवक की वह क्षमता है, जिससे वह दूसरों की भावनाओं, कठिनाइयों और दृष्टिकोण को समझ पाता है। यह मानवीय दृष्टिकोण से प्रशासन को अधिक संवेदनशील बनाती है। समानुभूति लोकसेवक की अभिवृत्ति (Attitude) और जनता के साथ उसके संबंधों को गहराई प्रदान करती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • समानुभूति लोकसेवक में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण विकसित करती है।
  • इससे वह नागरिकों की वास्तविक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ पाता है।
  • निर्णय प्रक्रिया में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने में मदद करती है।
  • यह जनता के प्रति विश्वास और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करती है।
  • तनावपूर्ण या विवादित परिस्थितियों में संतुलित व्यवहार को बनाए रखती है।
  • शिकायत निवारण और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाती है।
  • समानुभूति से लोकसेवक जनता के साथ संवाद और विश्वास को मजबूत करता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

समानुभूति लोकसेवक की नैतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का मूल है। यह उसकी अभिवृत्ति को जनोन्मुख बनाकर प्रभावी, उत्तरदायी प्रशासन की नींव रखती है।

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Why the evaluation of unanticipated consequences is important in public policy planning? Answer with appropriate arguments. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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सार्वजनिक नीति नियोजन में अप्रत्याशित परिणामों का मूल्यांकन क्यों आवश्यक होता है? उपयुक्त तर्कों सहित उत्तर दीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सार्वजनिक नीति नियोजन (Public Policy Planning) में अप्रत्याशित परिणामों का मूल्यांकन नीति की प्रभावशीलता और सुधार का आधार है।हर नीति के कुछ अनपेक्षित सामाजिक, आर्थिक या पर्यावरणीय प्रभाव हो सकते हैं।  इसलिए नीति निर्माण के बाद उसका वस्तुनिष्ठ विश्लेषण आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • अप्रत्याशित परिणामों से नीति की कमजोरियों और दुष्प्रभावों की पहचान होती है।
  • यह भविष्य की नीतियों में सुधार और बेहतर क्रियान्वयन में मदद करता है।
  • संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को रोकने में सहायक है।
  • नागरिकों पर नीति के वास्तविक प्रभाव का आकलन संभव होता है।
  • यह नीति-निर्माताओं को उत्तरदायी और पारदर्शी बनाता है।
  • सामाजिक न्याय और समावेशी विकास सुनिश्चित करने में सहायता करता है।
  • उदाहरण: मनरेगा या जीएसटी जैसी नीतियों में मूल्यांकन से सुधार की दिशा मिली।

निष्कर्ष (Conclusion):

अप्रत्याशित परिणामों का मूल्यांकन नीति-निर्माण को यथार्थवादी और उत्तरदायी बनाता है। यह सुशासन और सतत विकास की दिशा में एक आवश्यक कदम है।

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What is the role of emotional intelligence in establishing harmony at disaster management and workplace? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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आपदा प्रबंधन एवं कार्यस्थल पर सामंजस्य बनाने में सांवैगिक बुद्धि की क्या भूमिका है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सांवेगिक बुद्धि (Emotional Intelligence – EI) व्यक्ति की अपनी एवं दूसरों की भावनाओं को समझने और नियंत्रित करने की क्षमता है। आपदा प्रबंधन और कार्यस्थल दोनों में यह संतुलित निर्णय एवं सहयोग की कुंजी है। यह तनावपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य, नेतृत्व और टीम भावना को बनाए रखती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • आपदा के समय भय, घबराहट और तनाव को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
  • टीम सदस्यों के बीच सहयोग और भरोसा बढ़ाने में मदद करती है।
  • सहानुभूति (Empathy) से पीड़ितों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझा जा सकता है।
  • नेतृत्व कौशल विकसित कर संकट प्रबंधन को प्रभावी बनाती है।
  • सकारात्मक संवाद और भावनात्मक संतुलन से विवादों का समाधान आसान होता है।
  • कार्यस्थल पर मोटिवेशन, अनुशासन और उत्पादकता को बढ़ाती है।
  • सांवेगिक रूप से सक्षम अधिकारी बेहतर निर्णय और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सांवेगिक बुद्धि आपदा प्रबंधन और कार्यस्थल दोनों में संतुलित, संवेदनशील नेतृत्व की नींव है। यह न केवल दक्षता बल्कि मानवीय संवेदना को भी सशक्त बनाती है।

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Explain the difference between code of ethics and code of conduct and elucidate their behavioural impact and applications by appropriate examples. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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आचार संहिता और आचरण संहिता के बीच अंतर की व्याख्या कीजिए तथा उनके व्यवहारिक प्रभावों एवं अनुप्रयोगों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

आचार संहिता और आचरण संहिता दोनों ही प्रशासनिक नैतिकता के महत्वपूर्ण अंग हैं। ये लोक सेवकों के व्यवहार, निर्णय और सार्वजनिक जिम्मेदारी को दिशा देती हैं। दोनों का उद्देश्य सुशासन और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • आचार संहिता नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित मार्गदर्शन देती है।
  • आचरण संहिता विधिक या संगठनात्मक नियमों का औपचारिक ढांचा होती है।
  • आचार संहिता में “क्या सही है” पर बल दिया जाता है, जबकि आचरण संहिता में “क्या करना है” पर।
  • आचार संहिता स्वेच्छिक होती है, जबकि आचरण संहिता बाध्यकारी होती है।
  • उदाहरण: सिविल सेवा आचरण नियम, 1964 आचरण संहिता का उदाहरण है।
  • आचार संहिता नैतिक व्यवहार को प्रोत्साहित करती है, जैसे—ईमानदारी, निष्पक्षता।
  • दोनों मिलकर प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

आचार संहिता और आचरण संहिता का संतुलित पालन लोक प्रशासन को नैतिक और प्रभावी बनाता है। इनका समन्वय ही जिम्मेदार और जवाबदेह शासन की पहचान है।

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