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Discuss the various skills by which a public servant may enhance public commitment to the rules of law. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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उन विभिन्न कौशलों की चर्चा कीजिए जिनके द्वारा एक लोक सेवक कानून के नियमों के प्रति जनता की प्रतिबद्धता को बढ़ा सकता है।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोक सेवक समाज और शासन के बीच सेतु का कार्य करता है। उसकी भूमिका केवल कानून लागू करने की नहीं, बल्कि जनता में कानून के प्रति सम्मान विकसित करने की भी होती है। इसके लिए उसे विविध प्रशासनिक, संवादात्मक और नैतिक कौशलों की आवश्यकता होती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • संवाद कौशल: स्पष्ट, संवेदनशील और पारदर्शी संचार द्वारा नागरिकों को जागरूक करना।
  • नेतृत्व कौशल: उदाहरण प्रस्तुत कर कानून पालन की प्रेरणा देना।
  • नैतिक कौशल: ईमानदारी और निष्पक्षता से जनता का विश्वास अर्जित करना।
  • सहभागिता कौशल: निर्णय प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • संघर्ष प्रबंधन कौशल: विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना।
  • जनसंपर्क कौशल: जनता के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना।
  • प्रेरणात्मक कौशल: नागरिकों को कानून के प्रति कर्तव्यबोध के लिए प्रेरित करना।

निष्कर्ष (Conclusion): इन कौशलों के माध्यम से लोक सेवक कानून के प्रति जन-प्रतिबद्धता को सुदृढ़ बना सकता है। इससे प्रशासन में विश्वास, अनुशासन और सहयोग की भावना विकसित होती है।

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What is the role of emotional intelligence in establishing harmony at disaster management and workplace? (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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आपदा प्रबंधन एवं कार्यस्थल पर सामंजस्य बनाने में सांवैगिक बुद्धि की क्या भूमिका है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सांवेगिक बुद्धि (Emotional Intelligence – EI) व्यक्ति की अपनी एवं दूसरों की भावनाओं को समझने और नियंत्रित करने की क्षमता है। आपदा प्रबंधन और कार्यस्थल दोनों में यह संतुलित निर्णय एवं सहयोग की कुंजी है। यह तनावपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य, नेतृत्व और टीम भावना को बनाए रखती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • आपदा के समय भय, घबराहट और तनाव को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
  • टीम सदस्यों के बीच सहयोग और भरोसा बढ़ाने में मदद करती है।
  • सहानुभूति (Empathy) से पीड़ितों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझा जा सकता है।
  • नेतृत्व कौशल विकसित कर संकट प्रबंधन को प्रभावी बनाती है।
  • सकारात्मक संवाद और भावनात्मक संतुलन से विवादों का समाधान आसान होता है।
  • कार्यस्थल पर मोटिवेशन, अनुशासन और उत्पादकता को बढ़ाती है।
  • सांवेगिक रूप से सक्षम अधिकारी बेहतर निर्णय और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सांवेगिक बुद्धि आपदा प्रबंधन और कार्यस्थल दोनों में संतुलित, संवेदनशील नेतृत्व की नींव है। यह न केवल दक्षता बल्कि मानवीय संवेदना को भी सशक्त बनाती है।

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Why the evaluation of unanticipated consequences is important in public policy planning? Answer with appropriate arguments. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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सार्वजनिक नीति नियोजन में अप्रत्याशित परिणामों का मूल्यांकन क्यों आवश्यक होता है? उपयुक्त तर्कों सहित उत्तर दीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सार्वजनिक नीति नियोजन (Public Policy Planning) में अप्रत्याशित परिणामों का मूल्यांकन नीति की प्रभावशीलता और सुधार का आधार है।हर नीति के कुछ अनपेक्षित सामाजिक, आर्थिक या पर्यावरणीय प्रभाव हो सकते हैं।  इसलिए नीति निर्माण के बाद उसका वस्तुनिष्ठ विश्लेषण आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • अप्रत्याशित परिणामों से नीति की कमजोरियों और दुष्प्रभावों की पहचान होती है।
  • यह भविष्य की नीतियों में सुधार और बेहतर क्रियान्वयन में मदद करता है।
  • संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को रोकने में सहायक है।
  • नागरिकों पर नीति के वास्तविक प्रभाव का आकलन संभव होता है।
  • यह नीति-निर्माताओं को उत्तरदायी और पारदर्शी बनाता है।
  • सामाजिक न्याय और समावेशी विकास सुनिश्चित करने में सहायता करता है।
  • उदाहरण: मनरेगा या जीएसटी जैसी नीतियों में मूल्यांकन से सुधार की दिशा मिली।

निष्कर्ष (Conclusion):

अप्रत्याशित परिणामों का मूल्यांकन नीति-निर्माण को यथार्थवादी और उत्तरदायी बनाता है। यह सुशासन और सतत विकास की दिशा में एक आवश्यक कदम है।

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What is the moral basis of the work performance in the system of governance? Discuss in the light of result contingent and result non-contingent karma. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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शासन व्यवस्था में कार्य निष्पादन का नैतिक आधार क्या है? परिणाम-निरपेक्ष एवं परिणाम-सापेक्ष कर्म के आलोक में विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

शासन व्यवस्था में कार्य निष्पादन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नैतिक उत्तरदायित्व भी है। अधिकारी का आचरण लोकहित, पारदर्शिता और न्याय पर आधारित होना चाहिए। इस संदर्भ में परिणाम-निरपेक्ष (duty-based) और परिणाम-सापेक्ष (result-based) कर्म की अवधारणाएँ नैतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • नैतिक आधार (Moral Foundation): सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व शासन के नैतिक स्तंभ हैं।
  • कर्तव्य-निष्ठा (Duty Orientation): अधिकारी को अपने कार्य को नैतिक दायित्व मानकर निष्पादित करना चाहिए।
  • परिणाम-निरपेक्ष कर्म (Result-Independent Action): गीता के अनुसार, “कर्म करो, फल की चिंता मत करो” — यह कर्तव्य-निष्ठ दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • नैतिक निष्ठा (Ethical Commitment): निर्णय लेते समय सही और न्यायसंगत मार्ग अपनाना, भले ही परिणाम तात्कालिक रूप से अनुकूल न हों।
  • लोकहित सर्वोपरि (Public Good First): प्रत्येक कार्य जनकल्याण के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।
  • पारदर्शिता और उत्तरदायित्व (Transparency & Accountability): नैतिक शासन इन्हीं सिद्धांतों पर टिका है।
  • परिणाम-सापेक्ष कर्म (Result-Oriented Action): आधुनिक शासन में दक्षता और परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं।
  • संतुलन की आवश्यकता (Need for Balance): केवल परिणाम पर ध्यान देने से नैतिक मूल्य कमजोर पड़ सकते हैं; अतः दोनों दृष्टिकोणों में संतुलन आवश्यक है।
  • व्यावसायिक नैतिकता (Professional Ethics): कार्य निष्पादन में ईमानदारी और दक्षता का संयोजन आवश्यक है।
  • नैतिक नेतृत्व (Moral Leadership): वरिष्ठ अधिकारियों को उदाहरण प्रस्तुत कर अधीनस्थों में नैतिक आचरण प्रेरित करना चाहिए।
  • सार्वजनिक विश्वास (Public Trust): जब कार्य निष्पादन नैतिक आधार पर होता है, तब शासन में जनता का विश्वास बढ़ता है।
  • नैतिक आत्मसंतोष (Moral Satisfaction): परिणाम कुछ भी हो, सही तरीके से किया गया कार्य आत्मसंतोष देता है।

निष्कर्ष (Conclusion): शासन में कार्य निष्पादन का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह नैतिक सिद्धांतों से निर्देशित हो। कर्तव्य-निष्ठा और परिणाम-दक्षता के बीच संतुलन ही सुशासन और नैतिक प्रशासन की पहचान है।

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How far the views of Swami Vivekananda’s are successful in developing the core ideals and values of morality in human behaviours? Discuss. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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मानव व्यवहार में नैतिकता के मूल आदर्शों एवं मूल्यों को विकसित करने में स्वामी विवेकानंद के विचार कहाँ तक सफल रहे हैं? विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

स्वामी विवेकानंद के विचार मानव जीवन में नैतिकता, आत्मबल और सेवा भावना के प्रतीक हैं। उन्होंने व्यक्ति के आंतरिक विकास को समाज के उत्थान से जोड़ा। उनकी शिक्षाएँ आज भी नैतिक मूल्यों के निर्माण की प्रेरणा देती हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • विवेकानंद ने “नैतिकता का आधार आत्मा की शुद्धता” को बताया।
  • उन्होंने सेवा को सर्वोच्च धर्म माना — “ईश्वर की सेवा मनुष्य की सेवा है।”
  • आत्मविश्वास, सत्य और निष्ठा को नैतिक जीवन की जड़ माना।
  • युवाओं को चरित्र निर्माण और अनुशासन का संदेश दिया।
  • उन्होंने धर्म को व्यवहारिक बनाया, कर्मयोग का संदेश दिया।
  • समाज में सहिष्णुता, समानता और करुणा की भावना को बल दिया।
  • उनके विचारों से मानवता, आत्मसंयम और सकारात्मक सोच का प्रसार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion): स्वामी विवेकानंद के विचारों ने मानव व्यवहार में नैतिक चेतना को जागृत किया। उनके आदर्श आज भी नैतिक समाज निर्माण के लिए प्रकाशस्तंभ बने हुए हैं।

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Explain the difference between code of ethics and code of conduct and elucidate their behavioural impact and applications by appropriate examples. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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आचार संहिता और आचरण संहिता के बीच अंतर की व्याख्या कीजिए तथा उनके व्यवहारिक प्रभावों एवं अनुप्रयोगों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

आचार संहिता और आचरण संहिता दोनों ही प्रशासनिक नैतिकता के महत्वपूर्ण अंग हैं। ये लोक सेवकों के व्यवहार, निर्णय और सार्वजनिक जिम्मेदारी को दिशा देती हैं। दोनों का उद्देश्य सुशासन और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • आचार संहिता नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित मार्गदर्शन देती है।
  • आचरण संहिता विधिक या संगठनात्मक नियमों का औपचारिक ढांचा होती है।
  • आचार संहिता में “क्या सही है” पर बल दिया जाता है, जबकि आचरण संहिता में “क्या करना है” पर।
  • आचार संहिता स्वेच्छिक होती है, जबकि आचरण संहिता बाध्यकारी होती है।
  • उदाहरण: सिविल सेवा आचरण नियम, 1964 आचरण संहिता का उदाहरण है।
  • आचार संहिता नैतिक व्यवहार को प्रोत्साहित करती है, जैसे—ईमानदारी, निष्पक्षता।
  • दोनों मिलकर प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

आचार संहिता और आचरण संहिता का संतुलित पालन लोक प्रशासन को नैतिक और प्रभावी बनाता है। इनका समन्वय ही जिम्मेदार और जवाबदेह शासन की पहचान है।

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What are the key difference between ethics in private relations (family, friendships) and public relations (business, politics)? Explain.(Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

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निजी संबंधों (परिवार, मित्रता) और सार्वजनिक संबंधों (व्यापार, राजनीति) में नैतिकता के बीच मुख्य अंतर क्या है? समझाइए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

नैतिकता (Ethics) हमारे व्यवहार को सही और गलत के मानदंडों से परखने का आधार प्रदान करती है। यह जीवन के हर क्षेत्र—निजी (Private) और सार्वजनिक (Public)—में समान रूप से आवश्यक है। फिर भी, दोनों क्षेत्रों की प्रकृति और दायित्व अलग होने के कारण उनकी नैतिकता में अंतर पाया जाता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

1. संबंधों का आधार:

निजी संबंध भावनाओं, स्नेह और विश्वास पर आधारित होते हैं, जबकि सार्वजनिक संबंध कर्तव्य, नियम और निष्पक्षता पर टिका होता है।

2. उद्देश्य:

निजी संबंधों में व्यक्तिगत सुख-संतोष लक्ष्य होता है, जबकि सार्वजनिक संबंधों का उद्देश्य सामाजिक या सामूहिक कल्याण होता है।

3. जवाबदेही (Accountability):

परिवार या मित्रता में जवाबदेही व्यक्तिगत होती है, जबकि सार्वजनिक जीवन में यह जनता और कानून के प्रति होती है।

4. निर्णय-प्रक्रिया:

निजी जीवन में निर्णय भावनात्मक होते हैं, जबकि सार्वजनिक जीवन में निर्णय तार्किक और नीति-आधारित होते हैं।

5. नैतिक मानदंड:

निजी नैतिकता में करुणा, प्रेम और निष्ठा प्रमुख हैं; सार्वजनिक नैतिकता में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रमुख हैं।

6. गोपनीयता:

निजी संबंधों में गोपनीयता स्वीकार्य है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता आवश्यक है।

7. हितों का टकराव:

निजी संबंधों में पक्षपात स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक संबंधों में यह भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है।

8. परिणाम का प्रभाव:

निजी नैतिकता का प्रभाव सीमित दायरे में रहता है, जबकि सार्वजनिक नैतिकता का असर व्यापक समाज पर पड़ता है।

9. मूल्य-निर्देशन:

निजी क्षेत्र में नैतिकता व्यक्तिगत मूल्यों से निर्देशित होती है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में संस्थागत नियमों से।

10. समय और परिस्थिति:

निजी नैतिकता लचीली होती है, जबकि सार्वजनिक नैतिकता अधिक स्थिर और औपचारिक।

11. दायित्व की प्रकृति:

निजी संबंध स्वैच्छिक होते हैं, जबकि सार्वजनिक संबंध संवैधानिक या कानूनी दायित्वों पर आधारित होते हैं।

12. नैतिक संघर्ष:

कई बार निजी स्नेह और सार्वजनिक कर्तव्य में टकराव होता है, जहाँ प्रशासक को सार्वजनिक नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion):

निजी और सार्वजनिक नैतिकता दोनों मानव जीवन के पूरक हैं, परंतु शासन और प्रशासन में सार्वजनिक नैतिकता सर्वोपरि है। जब व्यक्ति दोनों में संतुलन बनाए रखता है, तभी वह सच्चे अर्थों में नैतिक जीवन जी सकता है।

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As an administrator, develop an intervention programme for attitude change in “corruption free India”.(Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

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एक प्रशासक के रूप में “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” के संवर्धन में अभिवृत्ति परिवर्तन है, अंतरावेशी कार्यक्रम विकसित कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों की अभिवृत्तियों (attitudes) में सकारात्मक परिवर्तन से संभव है।एक प्रशासक के रूप में यह आवश्यक है कि प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नैतिक जागरूकता विकसित की जाए।इसके लिए एक अंतराकोशी (Interventional) कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है जो व्यवहार, सोच और मूल्यों में बदलाव लाए।

मुख्य बिंदु (Main Points):

1. नैतिक शिक्षा अभियान: विद्यालयों, महाविद्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों में नैतिकता और ईमानदारी पर सत्र आयोजित करना।

2. लोक सेवकों का प्रशिक्षण: अधिकारियों व कर्मचारियों को “Integrity and Ethics” पर नियमित प्रशिक्षण देना।

3. पारदर्शिता बढ़ाना: ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देकर मानव संपर्क आधारित भ्रष्टाचार को कम करना।

4. जन-जागरूकता कार्यक्रम: नारे, पोस्टर, सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से नागरिकों में ईमानदारी की भावना जागृत करना।

5. प्रोत्साहन तंत्र: ईमानदार अधिकारियों और नागरिकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना।

6. शिकायत निवारण तंत्र: स्वतंत्र और पारदर्शी “जन-सुनवाई” प्रणाली लागू करना।

7. नैतिक क्लब (Ethics Clubs): स्कूलों व कॉलेजों में नैतिक क्लब स्थापित कर युवाओं को भ्रष्टाचार विरोधी संदेश देना।

8. नागरिक सहभागिता: समाज के विभिन्न समूहों—NGOs, RWA, मीडिया—को भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों से जोड़ना।

9. मूल्याधारित नेतृत्व: उच्च अधिकारियों को नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करना।

10. समाजिक अनुशासन: भ्रष्ट आचरण के प्रति समाज में अस्वीकार्यता (Zero Tolerance) का वातावरण बनाना।

11. मीडिया निगरानी: स्वतंत्र मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भ्रष्टाचार उजागर करने में सहयोगी बनाना।

12. सतत मूल्यांकन: अभियान की प्रभावशीलता मापने के लिए समय-समय पर निगरानी और सुधार करना।

निष्कर्ष (Conclusion):

भ्रष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में सबसे प्रभावी उपाय नागरिकों और प्रशासकों की सोच में नैतिक परिवर्तन है। जब अभिवृत्ति, व्यवहार और प्रशासनिक संस्कृति ईमानदारी से जुड़ेंगी, तभी सच्चा सुशासन साकार होगा।

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What is digital arrest ? Which are the States most effected by the problem of digital arrest in India in the last three years ? Mention the effective measures taken by the Government of India in this direction. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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डिजिटल अरेस्ट क्या है ? विगत तीन वर्षों में भारत में डिजिटल अरेस्ट की समस्या से सर्वाधिक प्रभावित राज्य कौन-से हैं ? इस दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाये गये प्रभावी उपायों का उल्लेख करें ।

Ans: परिचय (Introduction):  

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक उभरता हुआ साइबर अपराध है जिसमें अपराधी स्वयं को सरकारी एजेंसी (जैसे CBI, पुलिस या NCB) का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या संदेशों के माध्यम से लोगों को डराते हैं कि वे किसी अपराध में शामिल हैं और “ऑनलाइन गिरफ्तारी” से बचने के लिए धन जमा करें।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • यह अपराध भय और भ्रम फैलाकर आर्थिक ठगी करने का तरीका है।
  • कानूनी रूप से “डिजिटल गिरफ्तारी” का कोई अस्तित्व नहीं है।
  • पिछले तीन वर्षों में कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित राज्य रहे हैं।
  • 2024 में कर्नाटक में 600 से अधिक मामले दर्ज हुए और ₹100 करोड़ से अधिक की हानि हुई।
  • सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से नियंत्रण के प्रयास किए।
  • ‘Stop-Think-Act’ अभियान के ज़रिए जनजागरूकता बढ़ाई जा रही है।
  • फर्जी सिम कार्ड, व्हाट्सएप व स्काइप खातों को ब्लॉक करने की कार्रवाई जारी है।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकार के साइबर नियंत्रण उपायों और नागरिक जागरूकता से इस डिजिटल ठगी पर रोक लगाई जा सकती है। सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार ही डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है।

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your suggestions to promote the tolerance and compassion among civil servants to serve better to weaker sections. (8 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-4

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कमजोर वर्गों की बेहतर सेवा हेतु लोक सेवकों में सहिष्णुता एवं करुणा को बढ़ावा देने के लिए अपने सुझावों की व्याख्या कीजिए। Explain

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोक सेवकों के लिए सहिष्णुता (Tolerance) और करुणा (Compassion) जैसे गुण कमजोर वर्गों की सेवा का आधार हैं।  ये गुण प्रशासन को मानवीय और समावेशी बनाते हैं। इनका विकास लोकसेवकों में संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नैतिकता, मानवाधिकार और संवेदनशीलता पर बल दिया जाए।
  • समुदायों के साथ प्रत्यक्ष संवाद से सामाजिक विविधता की समझ विकसित की जाए।
  • नीति-निर्माण में गरीब, महिला, दिव्यांग और वंचित वर्गों की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाए।
  • कार्य मूल्यांकन में मानवीय व्यवहार और सहानुभूति को भी शामिल किया जाए।
  • वरिष्ठ अधिकारियों को उदाहरण प्रस्तुत कर प्रेरक नेतृत्व देना चाहिए।
  • तनाव प्रबंधन और भावनात्मक बुद्धि के विकास पर ध्यान दिया जाए।
  • “सेवा भाव” आधारित प्रशासनिक संस्कृति को संस्थागत रूप से बढ़ावा दिया जाए।

निष्कर्ष (Conclusion):

सहिष्णुता और करुणा से युक्त लोक सेवक ही सामाजिक न्याय और समानता को साकार कर सकते हैं। इन गुणों का विकास प्रशासन को संवेदनशील, जनोन्मुख और विश्वसनीय बनाता है।

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